गोरखपुर: जिला अस्पताल में इस नोटिस को देख निराश हुए मरीज, जानिए क्यों बढ़ी इनकी मुश्किलें

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 08 Oct 2020 12:55 PM IST

सार

  • जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म, मरीज लौटे
  • करीब डेढ़ सौ लोगों को प्रतिदिन लगाई जाती है वैक्सीन
  • अस्पताल की ओर से वैक्सीन खत्म होने का नोटिस चस्पा
गोरखपुर जिला अस्पताल।
गोरखपुर जिला अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गोरखपुर जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) खत्म हो गई है। अस्पताल की ओर से इस संबंध में नोटिस चस्पा कर दिया गया है। वैक्सीन नहीं होने से बिना इंजेक्शन लगवाए ही मरीजों को लौटना पड़ रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, कुत्ते के काटने से पीड़ित करीब डेढ़ सौ लोग रोजाना जिला अस्पताल में आते हैं। वैक्सीन खत्म होने से मरीजों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। दूर-दराज से आने वाले मरीजों को बिना टीका लगवाए लौटना पड़ा।


वैक्सीन अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपलब्ध नहीं है। इस कारण काफी संख्या में लोग रेबीज का टीका लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। बुधवार को वैक्सीन नहीं होने का नोटिस देखकर मरीजों को निराशा हुई। मरीज अस्पताल प्रबंधन से वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पूछते रहे, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
 
चिकित्सा अधीक्षक एके श्रीवास्तव ने बताया कि वैक्सीन की मांग मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन से की गई है। उम्मीद है कि शीघ्र ही वैक्सीन आ जाएगी। इसके बाद इंजेक्शन लगाना शुरू कर दिया जाएगा।

बिना इंजेक्शन लगवाए ही मरीजों को लौटना पड़ा।
बिना इंजेक्शन लगवाए ही मरीजों को लौटना पड़ा। - फोटो : अमर उजाला।
केवल 0.25 प्रतिशत कुत्ते होते हैं रैपिड
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि आमतौर पर 0.25 प्रतिशत कुत्ते ही रैपिड होते हैं, जिनके काटने से रेबीज होता है। पालतू कुत्तों के काटने से रेबीज की आशंका न के बराबर होती है, क्योंकि पालतू कुत्तों को लोग पहले ही एंटी रेबीज वैक्सीन लगवा देते हैं।

गर्दन के ऊपर काटे कुत्ता तो खतरा ज्यादा
जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अगर कुत्ता किसी को गर्दन के ऊपर काटता है तो यह ज्यादा खतरनाक है। ऐसे लोगों की संख्या साल में 20 से 25 के आसपास होती है। ऐसे लोगों को एआरवी के साथ-साथ इम्नोग्लोबोलीन का डोज दिया जाता है। इससे मरीज के ब्रेन पर संक्रमण का असर कम पड़ता है। अगर यह डोज न दी जाए तो मरीज के दिमाग पर वायरस असर कर जाता है।

कुत्ते के काटने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि यदि किसी को कुत्ते ने काट लिया, और वह एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाता है, तो वह अपनी जान से खेल रहा होता है। उन्होंने बताया कि कुत्तों के काटने का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता। जैसे-जैसे समय बीतता है, वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ता जाता है। ऐसे में मरीज के शरीर में क्या परिवर्तन हो जाए, यह किसी को नहीं पता। इसलिए कुत्ते के काटने पर तत्काल एआरवी जरूर लगवाएं।

लॉकडाउन में आक्रामक हो गए थे कुत्ते, अब बदला व्यवहार

लॉकडाउन में भूख और प्यास से बेहाल कुत्ते आक्रमक हो गए थे। अनलॉक में कुत्तों के व्यवहार में फिर बदलाव देखने को मिल रहा है। कुत्ते अब ज्यादा खतरनाक नहीं रह गए हैं। अनलॉक में रोजाना करीब 150 मरीज वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं, जबकि लॉकडाउन के दौरान यह संख्या 200 के आसपास थी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि अनलॉक में सब कुछ खुल गया है। ऐसे में अब कुत्तों को खाना-पीना मिलना शुरू हो गया है। यही वजह है कि अब इनके व्यवहार में बदलाव आ गया है।
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