गोरखपुर में बोले सीएम योगी: सभी जानते हैं अयोध्या के श्रीराम मंदिर के प्रति गोरक्षपीठ का समर्पण

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 25 Sep 2021 10:19 AM IST

सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश आजाद हुआ और 1949 में जन्मभूमि पर श्रीरामलला का प्रकटीकरण हो जाता है। उस दौरान वहां के मूर्धन्य संतों को गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ का संरक्षण प्राप्त था।
सीएम योगी आदित्यनाथ।
सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 52वीं व गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 7वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के समापन सत्र में कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर को लेकर गोरक्षपीठ के समर्पण को सब जानते हैं। जब मैं अयोध्या में होता हूं तो लगता ही नहीं कि गोरखपुर में नहीं हूं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश आजाद हुआ और 1949 में जन्मभूमि पर श्रीरामलला का प्रकटीकरण हो जाता है। उस दौरान वहां के मूर्धन्य संतों को गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ का संरक्षण प्राप्त था। परमहंस जी ने महंत दिग्विजयनाथ की ही प्रेरणा से श्रीरामलला के मुकदमे को आगे बढ़ाया। महंत दिग्विजयनाथ के अभियान को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ विस्तारित करते रहे। गोरक्षपीठ व संतों के नेतृत्व में अयोध्या के लिए तरह-तरह के संघर्ष करना पड़ा। संघर्ष करने वालों में से किसी ने भी यह नहीं सोचा कि उनको क्या मिलेगा। वास्तव में जब चारों ओर से एक आवाज निकलती है तो संकल्प साकार होता है।


सप्तपुरियों में पहली पुरी बनी अयोध्या
मुख्यमंत्री योगी ने प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में बन रहे मंदिर, अयोध्याधाम के विकास व वहां आयोजित होने वाले दीपोत्सव का भावनात्मक उल्लेख करते हुए कहा कि अब अयोध्या सप्तपुरियों में पहली पुरी बन गई है। वहां के दीपोत्सव में एक-एक संत की भावना परिलक्षित होती है। जो संत अब भौतिक शरीर में नहीं हैं, वे भी सूक्ष्म शरीर से इसे देखकर प्रसन्न होते हैं। देश ही नहीं दुनिया भी इसके भव्यता और दिव्यता की कायल है।

अमूल्य धरोहर के रूप में कुंभ को मिली यूनेस्को से मान्यता

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रयागराज के भव्य व दिव्य कुंभ के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि जितनी यूपी की आबादी है, उससे अधिक श्रद्धालु कुंभ में आए। अमूल्य धरोहर के रूप में प्रयागराज कुंभ को यूनेस्को से मान्यता मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यूपी के बारे में लोगों की धारणा बदली है, जबकि पहले, कुछ शहरों में यूपी के नाम पर लोगों को कमरा नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि यूपीवासी प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण, काशी विश्वनाथ, गुरु गोरखनाथ, महात्मा बुद्ध, संतकबीर के प्रतिनिधि हैं और इस पर गर्व की अनुभूति करनी चाहिए।

बिना थके- डिगे मूल्यों व आदर्शों की स्थापना की
मुख्यमंत्री ने अपने दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए कहा कि ब्रह्मलीन महंतद्वय ने संपूर्ण धर्म व समाज के सामने मूल्यों व आदर्शों की स्थापना की। 50 वर्ष पूर्व जिसने भी गोरखपुर और गोरक्षपीठ को देख होगा, उसे यह पता है कि आज यहां जो कुछ भी है, वह उन्हीं गुरुजनों की प्रेरणा व आशीर्वाद से है। महंत दिग्विजयनाथ ने जो नींव रखी, महंत अवेद्यनाथ ने उसे भवन का रूप दिया। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ को याद करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि जिस श्राद्ध पक्ष में हम अपने पितरों को श्रद्धांजलि देकर उनके विराट व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते हैं, महंतद्वय ने उसी पक्ष में अपना भौतिक शरीर छोड़ा। उनका व्यक्तित्व व कृतित्व आज भी हमारे लिए प्रेणास्रोत है। ब्रह्मलीन महंतद्वय ने स्वतंत्रता संग्राम और देश के स्वतंत्र होने के बाद भी हरेक क्षेत्र में योगदान दिया। बिना थके, बिना रुके, बिना डिगे और बिना झुके उन्होंने पौराणिक और ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए नवीनतम ज्ञान देने का कार्य किया।

सिर्फ उपासना तक सीमित नहीं रही गोरक्षपीठ

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्षपीठ ने अपने को सिर्फ उपासना तक सीमित नहीं रखा। 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर 1945-46 में महिलाओं की शिक्षा के लिए कॉलेज खोला गया। 1956 में एमपी पॉलिटेक्निक के जरिए तकनीकी शिक्षा की शुरुआत की तो साठ के दशक में संस्कृत और आयुर्वेद के संस्थान के लिए कदम बढ़ाया। सीएम ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ का लंबा सानिध्य प्राप्त हुआ। उनकी प्रेरणा से यह पीठ पूरी प्रतिबद्धता से जनता की सेवा व सम्मान के लिए कार्य कर रही है। जब तक आचार-विचार में समन्वय नहीं होगा, कल्याण या सफलता संभव नहीं है। संतों के व्यक्तित्व से यही प्रेरणा मिलती है।

इन्होंने भी किया संबोधित
श्रद्धांजलि सभा को रोहतक स्थित बाबा मस्तनाथ पीठ से आए अलवर, राजस्थान से सांसद महंत बालकनाथ, पूर्व सांसद डॉ. रामविलास वेदांती, अयोध्या से पधारे जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य, दिगंबर अखाड़ा अयोध्या के महंत सुरेशदास, नैमिषारण्य से आए स्वामी विद्या चैतन्य, अयोध्या से आए श्रीराम दिनेशाचार्य, हरिद्वार से आए योगी चेताईनाथ ने भी संबोधित किया। इस दौरान प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक डॉ. जीएन सिंह, अयोध्या के स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य, जूनागढ़ गुजरात से आए महंत शेरनाथ, जूना अखाड़ा गाजियाबाद के महंत श्रीनारायण गिरि, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो यूपी सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, भाजपा गोरखपुर के प्रभारी अजय सिंह गौतम, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय उपाध्यक्ष सत्य प्रकाश सिंह मुन्ना, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. आरपी त्रिपाठी, सिंधी समाज के महामंत्री लक्ष्मण नारंग, पंजाबी समाज के जगनैन सिंह नीटू, भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी नि:श्रेयसानंद आदि भी मौजूद रहे।
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