गोरखपुर: विधायक विनय शंकर तिवारी और पूर्व सांसद कुशल तिवारी को बसपा ने पार्टी से किया निष्कासित

अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 07 Dec 2021 09:52 AM IST

सार

सपा में जाने की अटकलों के बीच बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। साल 2017 में विनय बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे और जीत दर्ज की थी। 
भीष्म शंकर, गणेश शंकर और  विनय शंकर।
भीष्म शंकर, गणेश शंकर और विनय शंकर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

यूपी में सियासी उठापटक का दौर जारी है। सपा में जाने की अटकलों के बीच बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। उनके बड़े भाई एवं संतकबीर नगर से पूर्व सांसद कुशल तिवारी और पूर्व विधान परिषद अध्यक्ष गणेश शंकर पांडेय भी बसपा से निकाले गए हैं।
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बसपा ने विधायक विनय शंकर तिवारी और उनके परिवार के लोगों पर निष्कासन की जो कार्रवाई की है वह अपेक्षित ही है। माना जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से हाता परिवार की गतिविधियां बसपा विरोधी हो गई थीं। बताया जा रहा है कि विनय शंकर, भीष्म शंकर और गणेश शंकर पांडेय 12 दिसंबर को अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा की सदस्यता ले सकते हैं।  


दरअसल, पिछले कई दिनों से हाता परिवार के सपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। दो दिन पहले ही विधायक विनय शंकर तिवारी, पूर्व सांसद भीष्म शंकर तिवारी और पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय की मुलाकात सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुई थी। माना जा रहा है कि इन नेताओं के अलावा भाजपा के वर्तमान विधायक भी मिले हैं। उन्हें भी अखिलेश यादव ने टिकट देने का आश्वासन दिया है। इस संबंध में विधायक विनय शंकर तिवारी से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। जब भी उनका पक्ष आएगा प्रकाशित किया जाएगा।

 

12 साल पहले से हाथी की सवारी की थी हरि शंकर तिवारी के परिवार ने

प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के परिवार ने करीब 13 साल पहले हाथी की सवारी शुरू की थी।  बलिया से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर के खिलाफ पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर ने 2008 में बसपा से ताल ठोकी थी। हालांकि चुनाव में विनय को पराजय का मुंह देखना पड़ा।

गोरखपुर जिले के टाड़ा गांव निवासी पूर्व मंत्री पंडित हरिशंकर तिवारी के बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी ने बसपा के टिकट पर साल 2007 के उप चुनाव में संतकबीरनगर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी। 2009 के आम चुनाव में भी उनको बसपा के टिकट पर यहां से जीत मिली थी। लेकिन 2014 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार चुनाव से पहले बसपा ने उन्हें लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया था। सपा-बसपा गठबंधन में यह सीट बसपा के खाते में जाने के बाद से कुशल तिवारी को टिकट का प्रबल दावेदार भी माना जा रहा था।
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