आत्मनिर्भर भारत: कोरिया की मशीन से तैयार होंगी दिवाली की लड़ियां, गीडा की फैक्टरी ने की शुरुआत

अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 24 Sep 2021 12:48 PM IST

सार

इस मशीन से तैयार इलेक्ट्रिक लड़ियां चीनी लड़ियों की तुलना में न सिर्फ विश्वसनीय होंगी बल्कि काफी लंबे अरसे तक चलेंगी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत मुहिम अब रफ्तार पकड़ने लगी है। चीनी सामानों को मात देने के लिए गीडा के उद्यमी ने दक्षिण कोरिया की तकनीक से दिवाली की लड़ियां बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए दक्षिण कोरिया से ऑटोमेटिक मशीन भी मंगा ली गई है। इस मशीन से तैयार इलेक्ट्रिक लड़ियां चीनी लड़ियों की तुलना में न सिर्फ विश्वसनीय होंगी बल्कि काफी लंबे अरसे तक चलेंगी।
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जब से चीन के साथ गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों का विवाद के हुआ उसी वक्त गीडा के उद्यमी सनूप साहू ने चीन से अपना सारा आयात खत्म कर दिया। दक्षिण कोरिया और वियतनाम को उन्होंने सामानों के आयात के लिए चुना। इसी क्रम में उन्होंने दक्षिण कोरिया से इलेक्ट्रिक लड़ियां तैयार करने की मशीन का आयात किया है। इस मशीन की खासियत यह है कि इसे मात्र एक व्यक्ति ही संचालित कर सकता है। मशीन में बने खांचे में बल्बों का पैकेट डालना होगा। बिजली के तार का बंडल निर्धारित जगह पर लगा देना होगा। मशीन ऑन होते ही तार का बंडल घूमना शुरू करेगा। बल्ब को टेस्ट करने के बाद मशीन उसे तार से जोड़ देगी। कुछ ही मिनट में 12.5 मीटर की इलेक्ट्रिक लड़ियां तैयार हो जाएंगी।


साहू समूह के एमडी सनूप साहू ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के तहत यह छोटी सी कोशिश है। दक्षिण कोरिया से इलेक्ट्रिक लड़ियां तैैयार करने वाली 16-16 लाख रुपये की तीन मशीनें मंगाई गईं हैं। ये मशीनें पूरी तरह से ऑटोमेटिक हैं। दिन भर में एक मशीन से 240 से 250 लड़ियां तैयार हो जाएंगी। बेहतर क्वालिटी की लड़ियां मंदिरों या अन्य किसी भी स्थान पर एक बार लगा देने पर बिना खराब हुए चार से पांच साल आसानी से चल जाएंगी।
 
10 हजार लड़ियों का मिला ऑर्डर
गीडा की कंपनी वीएस एनर्जी टेक्नोलॉजी को 10 हजार लड़ियों के लिए आर्डर भी मिल चुका है। वीएस एनर्जी के विवेक सिंह ने बताया कि अभी गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और प्रयागराज में महिला समूह इन लड़ियों को तैयार कर रही हैं। करीब तीन सौ महिलाएं उनके साथ जुड़कर अपने घर में ही आजीविका का संसाधन जुटा ले रही हैं। उत्तराखंड में तो करीब 2500 महिलाएं उनके साथ जुड़ी हुई हैं। तैयार माल दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र भेजा जाता है। दिवाली के मद्देनजर अब से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। गीडा स्थित केआईपीएम में ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहा है। ट्रेनिंग पाकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

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