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हरियाणा: दो अगस्त तक बढ़ा लॉकडाउन, पचास प्रतिशत क्षमता के साथ खोले जा सकेंगे रेस्तरां

हरियाणा सरकार ने लॉकडाउन दो अगस्त तक बढ़ा दिया है। हालांकि रेस्तरां संचालकों को और राहत मिली है। यूनिवर्सिटी व अन्य शैक्षणिक संस्थान दाखिलों के लिए एंट्रेंस टेस्ट ले सकेंगे। सरकारी विभागों में भर्ती के लिए होने वाली लिखित परीक्षाओं को भी मंजूरी दी गई है।

महामारी अलर्ट-सुरक्षित हरियाणा के तहत लॉकडाउन की अवधि 26 जुलाई शाम पांच बजे तक थी। उसके खत्म होने से पहले ही राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नए आदेश जारी कर दिए। मुख्य सचिव विजयवर्धन की तरफ से जारी आदेश के अनुसार सभी रेस्तरां पचास प्रतिशत क्षमता के साथ खोले जा सकेंगे। कोविड मानकों का सख्ती से पालन कराना होगा।

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इस दौरान मॉल में स्थित रेस्तरां को खोलने का समय सुबह 10 बजे से रात 11 बजे तक रहेगा। अन्य रेस्तरां सुबह आठ बजे से रात 11 बजे तक खोले जा सकेंगे। होटल में स्थित रेस्तरां पर यह समय अवधि लागू नहीं होगी। होटल, रेस्तरां व फास्ट फूड की होम डिलीवरी रात 11 बजे तक कर सकते हैं। 

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सरकार ने एंट्रेंस व भर्ती परीक्षाएं कराने की छूट दी है। यूनिवर्सिटी, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों व भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि 10 सितंबर 2020 की केंद्र सरकार की कोविड गाइडलाइन के तहत एंट्रेंस और भर्तियों की लिखित परीक्षाएं आयोजित करें। प्रदेश में आठ अगस्त से पुलिस कांस्टेबल भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो रही है। दिसंबर तक 15 हजार हजार से अधिक पदों के लिए लिखित परीक्षाएं और शारीरिक परीक्षण होने हैं। मुख्य सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि पूर्व में दी गई छूट जारी रहेंगी। सभी जिलों के डीसी अपने-अपने क्षेत्र में कोविड मानकों का कड़ाई से पालन कराएं। 
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हरियाणा में दो अगस्त तक बढ़ा लॉकडाउन हरियाणा में दो अगस्त तक बढ़ा लॉकडाउन

हरियाणा में कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: सरकार ने 28 फीसदी किया महंगाई भत्ता, एक जुलाई से लागू होगी बढ़ी दर

हरियाणा के साढ़े पांच लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को केंद्र सरकार की तर्ज पर डीए मिलेगा। सरकार ने महंगाई भत्ते की दर को 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दिया है। सीएम मनोहर लाल ने शनिवार को इसकी घोषणा की। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2021 से लागू होगा।

बढ़े हुए महंगाई भत्ते में पहली जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और पहली जनवरी 2021 से देय महंगाई दर भी शामिल है। एरियर मिलेगा या नहीं, सरकार ने यह साफ नहीं किया है। इससे कर्मचारियों में डीए बहाल होने की खुशी के साथ निराशा भी है। महंगाई दर में बढ़ोतरी से लगभग 2.85 लाख सरकारी कर्मचारी व 2.62 लाख पेंशनर्स को लाभ होगा। इससे सरकार के खजाने पर प्रति माह लगभग 210 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा ।


 
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हरियाणा: भाजपा प्रदेश प्रधान ओपी धनखड़ को किसानों ने दिखाए काले झंडे, सड़क के बीचों बीच बैठे

हरियाणा में कृषि कानूनों के विरोध में भाजपा-जजपा नेताओं के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। भाजपा के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को बादली में किसानों ने काले झंडे दिखाए। धनखड़ बादली में भाजपा मंडल कार्यकारिणी की मीटिंग को संबोधित करने पहुंचे थे। 

सूचना मिलते ही बैठक स्थल के बाहर ही किसान एकत्रित हो गए और काले झंडे दिखाकर धनखड़ का विरोध प्रकट किया। वहीं किसानों के बैठक स्थल के बाहर पहुंचने से पहले ही पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया। डीएसपी राहुल देव और उपमंडल अधिकारी (नागरिक) विशाल कुमार पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। किसानों ने भाजपा सरकार के विरोध में नारेबाजी की और धनखड़ को काले झंडे दिखाए। किसान सड़क के बीचोंबीच बैठ गए और भाजपा के कार्यक्रम पर रोष प्रकट किया।
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पहल: अब विकास से जुड़ी शिकायत व सुझाव दर्ज करा सकेंगे ग्रामीण, हरियाणा सरकार ने 'ग्राम दर्शन' पोर्टल किया शुरू

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि ग्रामीण अब सरकार को विकास कार्यों संबंधी मांग/शिकायत और सुझाव सीधे ऑनलाइन दे सकेंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यह बात शुक्रवार को चंडीगढ़ में ऑनलाइन पोर्टल ग्राम दर्शन gramdarshan.haryana.gov.in का लोकार्पण करने के अवसर पर कही। इस अवसर पर हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर भविष्य की विकास योजनाओं का खाका तैयार किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने विभाग की पांच कामों की प्राथमिकताएं तय करें। मनोहर लाल ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों की शिकायतों का निवारण करना है। ग्रामीणों द्वारा ग्राम दर्शन पोर्टल पर की जाने वाली शिकायतों को सीएम विंडो के साथ लिंक किया जाएगा ताकि शिकायतों का दोहराव न हो। मुख्यमंत्री ने ग्राम दर्शन पोर्टल का लिंक ‘जन सहायक’ एप के साथ जोड़ने का भी निर्देश दिया।

अपने गांव की शिकायत ही की जा सकेगी दर्ज
ग्राम दर्शन पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति केवल अपने स्थाई निवास के गांव (जो परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो) के संबंध में शिकायत दर्ज कर सकेगा। ग्रामीणों द्वारा दिया गया सुझाव और मांग सीधे सरपंच/पंचायत समिति सदस्य/जिला परिषद सदस्य/विधायक और सांसद को दिखाई देंगे। सभी जनप्रतिनिधियों को उनके अधिकार क्षेत्र के ही सुझाव डैशबोर्ड पर दिखाई देंगे, जिन्हें संबंधित जनप्रतिनिधि संस्तुति के साथ आगे बढ़ा सकेंगे।

एसएमएस से मिलेगी सुझाव/शिकायत के स्टेटस की जानकारी
पोर्टल पर सुझाव/शिकायत दर्ज कराने के साथ ही एक आईडी जेनरेट होगी जो संबंधित आवेदक को एसएमएस के माध्यम से मिलेगी। इसके साथ ही आवेदक को समय समय पर सुझाव/शिकायत पर हुई कार्रवाई की अपडेट सूचना एसएमएस के मध्यम से मिलती रहेगी।
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Tokyo olympic 2021: पिता का अधूरा सपना पूरा करने की ख्वाहिश, तोहफे में पदक देने की तमन्ना, ऐसी है सीमा बिसला की कहानी

मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला
पापा, मुझे ओलंपिक खेलने दो फिर आप जहां कहोगे, शादी कर लूंगी। देश के लिए मेडल लाने की भूख और अपने पिता का सपना पूरा करने ओलंपिक दंगल में उतरी पहलवान सीमा बिसला का यही कहना है। यह भावुक बात करने वाली गुढान की साहसी बेटी का पिता से मेडल का तोहफा देने का वादा है। अपने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए इस बेटी ने टोक्यो ओलंपिक के लिए कूच कर दिया है। कलानौर के गुढान निवासी कबड्डी खिलाड़ी आजाद सिंह की बेटी सीमा बिसला अंतरराष्ट्रीय पहलवान है। यह बेटी अपने पिता का ओलंपिक में मेडल जीतकर नाम रोशन करने का सपना पूरा करने ओलंपिक दंगल में उतरेगी। बेटी का कहना है कि पिता आजाद सिंह देश के लिए खेलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल करना चाहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने व संसाधनों के अभाव में वे अपना यह सपना पूरा नहीं कर सके। 
 
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पर्यावरण संरक्षण : हरित अंतिम संस्कार से हरियाणा और पंजाब बचा रहे हजारों पेड़, अब प्रोजेक्ट को देशव्यापी बनाने की तैयारी

हरियाणा और पंजाब में हरित अंतिम संस्कार के जरिए हर साल हजारों पेड़ बचाए जा रहे हैं। विशेष मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. सुनील गुलाटी और आपसी संस्था के डॉ. रामजी जैमल ने इसका बीड़ा उठाया है। संस्था ने दोनों राज्यों में लगभग साढ़े तीन सौ हरित शवदाह गृह बनाए हैं। इसमें एक व्यक्ति के अंतिम संस्कार पर दो पेड़ बचते हैं।

इस प्रोजेक्ट को अब देशव्यापी बनाने की तैयारी है। संस्था व सेवानिवृत्त आईएएस ने इसी हफ्ते नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण व वन राज्य मंत्री अश्विनी चौबे को अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें 76 हजार करोड़ रुपये के कैंपा फंड के जरिए हरित शवदाह गृह हर पंचायत में बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।


केंद्रीय मंत्री चौबे ने इसका अध्ययन करने के बाद उचित कदम उठाने का भरोसा दिया है। डॉ. रामजी जैमल ने हरित शवदाह गृह प्रोजेक्ट की शुआत कुछ साल पहले सिरसा जिले के दड़बी गांव से की थी। इनमें गोबर के डंडों और उपलों से शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। इसमें एक व्यक्ति का शव जलाने में केवल 60 किलोग्राम गोबर के डंडे ही प्रयोग होते हैं। साथ ही अगर दूसरा शव भी जलाना है तो भट्ठी के गरम होने के कारण उसमें गोबर के 30 किलोग्राम डंडों का ही इस्तेमाल होता है।

डॉ. सुनील गुलाटी ने बताया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट में हरित शवदाह गृह बनाने में केवल तीन लाख रुपये खर्च आता है, जिसमें तीन साल की गारंटी भी है। गोबर से डंडे व उपले बनाने की डी-वाटरिंग मशीन ढाई लाख रुपये तक स्थापित हो रही है। इससे अगरबत्ती व गमले भी बना सकते हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री को भी इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए पत्र लिख रहे हैं। चूंकि, हरियाणा में कैंपा फंड में 950 करोड़ रुपये हैं। इस फंड से पौधरोपण तो बड़े पैमाने पर हो नहीं रहा, हरित शवदाह गृह बनाकर पेड़ों को बचाया जा सकता है।    

पर्यावरण में मीथेन कम होगी, गंगा भी दूषित होने से बचेगी
डॉ. गुलाटी ने बताया कि हरित दाह संस्कार से पर्यावरण संरक्षित होगा। लकड़ी के बजाय गोबर के डंडों से शव जलाने पर अस्थियों में राख कम होगी, साथ ही मीथेन भी वातावरण में घटेगी। वायु प्रदूषण को कम किया जा सकेगा। लकड़ी से जलाए शव की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने से जल प्रदूषण होता है, उससे बचाव होगा। केंद्र सरकार को सौंपी रिपोर्ट में इसका विस्तृत अध्ययन है। उन्होंने बताया कि अगस्त महीने में इस प्रोजेक्ट पर दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस भी करने जा रहे हैं।

प्रोजेक्ट रिपोर्ट में दिए गए तर्क
  •  देश में 70 फीसदी शवों का अंतिम संस्कार लकड़ी से होता है
  • देश में 28 वृक्ष प्रति व्यक्ति हैं, जबकि अमेरिका में 716
  • देश में सालाना 90 लाख मृत्यु औसतन
  • 70 लाख शव जलाए जाते हैं, जिसमें 1.40 करोड़ पेड़ लगते हैं
  • हरित दाह संस्कार प्रोजेक्ट लागू होने पर ये पेड़ बचाए जा सकते हैं
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Tokyo Olympic 2021: 19 साल की अंशु को कड़ी मेहनत से मिला मुकाम, अब पिता के सपने को पूरा करने की आस

Tokyo Olympic 2021: संघर्ष की आग में तप कर भिवानी के मुक्केबाजों ने पाई ओलंपिक की राह, निश्चय-इस बार नहीं चूकेंगे

टोक्यो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले भिवानी के तीनों मुक्केबाजों के लिए यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। खेल के प्रति जुनून और लगातार संघर्ष की बदौलत इन खिलाड़ियों ने गांव की पगडंडियों से टोक्यो की उड़ान भरी है। कोच संजय श्योराण ने कहा कि जिले के सभी बॉक्सर हालातों से लड़कर यहां तक पहुंचे हैं। किसी की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि उसके पास दस्ताने खरीदने के पैसे भी नहीं होते थे तो किसी को परिवार से ही सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद ये पीछे नहीं हटे और अपने लक्ष्य को साधे रहे। यही इन सबकी ताकत भी है। सभी बॉक्सरों में जीत के लिए भूख है और यही भूख उन्हें मेडल भी दिलाएगी।

लगातार अभ्यास से बीमारी पर पाई जीत, अब पहुंचे ओलंपिक
69 किलोभार वर्ग के बॉक्सर विकास कृष्णन यादव ने महज नौ वर्ष की आयु में मुक्केबाजी शुरू की थी। विकास की माता दर्शना देवी ने बताया कि विकास को बचपन में जुकाम जैसी मौसमी बीमारियां जल्द पकड़ लेती थीं। ऐसे में उन्होंने विकास को अच्छे स्वास्थ्य के उद्देश्य से बैडमिंटन खिलाना शुरू किया था। लेकिन धीरे-धीरे विकास का रुझान मुक्केबाजी की ओर होने लग गया। फिर उसने बॉक्सिंग में ही अपना भविष्य बना लिया। विकास के कोच विष्णु भगवान ने बताया कि विकास दुनिया के छठे नंबर के बॉक्सर हैं।


रिंग में उतरने से पहले सामाजिक बंधन तोड़ने पड़े
75 किलो भार वर्ग की बॉक्सर पूजा बोहरा के कोच संजय श्योराण ने बताया कि पूजा आदर्श महिला महाविद्यालय में पढ़ती थीं। उनकी पत्नी मुकेश रानी कॉलेज में लेक्चरर थी। उसी दौरान उसका पूजा से संपर्क हुआ और उसकी प्रेरणा से पूजा ने बॉक्सिंग शुरू कर दी। शुरुआत में परिजनों का सहयोग न होने के कारण पूजा को काफी दिक्कतें आई। इसी कारण पूजा बीच-बीच में मुकेश रानी के पास भी रहती थी। 2014 में एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद परिजनों ने पूजा का साथ देना शुरू कर दिया और आज वे ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्हें विश्वास है कि पूजा बोहरा गोल्ड मेडल जीत कर देश का नाम रोशन करेंगी।

मनीष के पास न गलव्ज थे और न था अच्छी खुराक
मनीष कौशिक ने वर्ष 2008 में बॉक्सिंग शुरू की थी। उन दिनों परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें बॉक्सिंग के अभ्यास के हिसाब से डाइट नहीं मिल पाती थी। अभ्यास के लिए बॉक्सिंग गलव्ज और अन्य उपयोगी साधन भी नहीं थे। मनीष ऑटो का किराया बचाने के लिए देवसर से भिवानी साइकिल पर आते थे। साईं हॉस्टल में चयन होने के बाद उन्हें पर्याप्त डाइट मिलनी शुरू हुई। अभ्यास न छूट जाए इसलिए होली और दिवाली जैसे त्यौहार पर भी मनीष घर नहीं आते थे। परिजनों और मनीष का ओलंपिक में गोल्ड मेडल का सपना है, जिसको साकार करने के लिए उन्होंने अपने जीवन को उसी अनुसार ढाल लिया है।
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