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श्री सनातन धर्म सभा से निकाले गए 18 सदस्यों को वापस लेने के आदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 02:42 AM IST
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श्री सनातन सेवा सभा के वर्तमान प्रधान व संस्था के फाउंडर सदस्य नीरू वढेरा के बीच चल रहे विवाद में जिला फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार ने अपना फैसला जारी कर दिया है। करीब 10 बिदुओं पर जिला फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार ने फैसला जारी किया है। जिला फर्म एंड सोसायटी रजिस्ट्रार द्वारा 30 जुलाई को जारी आदेशों में कहा गया है कि 18 सदस्यों का गलत तरीके से निष्कासन किया गया। इन 18 सदस्यों को तुरंत वापस लिया जाए।
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उन्होंने कहा कि इन सभी सदस्यों से 3 वर्षों का बकाया सदस्यता शुल्क ही लिया जाए जोकि वर्ष 2020-21 तक होगा। यह शुल्क अगस्त 14 अगस्त तक जमा करवाना होगा। सोसायटी प्रधान प्रभुदयाल, फाउंडर सदस्य नीरू वढेरा व सदस्य देशबंधु मेहता के संयुक्त हस्ताक्षर वाली सदस्यता सूची 18 अगस्त तक रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा करवानी होगी। उपरोक्त 18 सदस्यों के सभी अधिकार मार्च 31, 2021 से पहले वाली स्थिति में ही माने जाएंगे क्योंकि उपरोक्त सदस्यों का निष्कासन सोसायटी एक्ट 2012 के अनुसार नहीं था। वर्तमान कार्यकारिणी एडहॉक टीम के तौर पर कार्य कर रही है। इसलिए मई 29 के बाद कोई नया सदस्य नहीं बना सकती। एक घर से दो-दो सदस्य - जोकि भविष्य में संवैधानिक समस्या खड़ी कर देगा के चुनाव होने की स्थिति में घर का कौन सा सदस्य प्रत्याशी होगा या दोनों ही प्रत्याशी होंगे? यह मामला भी संस्था के ‘कानून’ के खिलाफ पाया गया। ‘एक घर से एक सदस्य व एक वोट वाला’ सोसायटी एक्ट वाला नियम लागू हो। फाउंडर सदस्यों के बारे में रजिस्ट्रार ने स्थिति स्पष्ट की है। प्रभुदयाल द्वारा रजिस्ट्रार कार्यालय में जून 10 को दी गई सूची अनुसार 7 फाउंडर सदस्य हैं, जिसके बाद जुलाई 5 की नई सूची जारी कर कार्यालय में दी गई जिसमें 10 फाउंडर सदस्य हैं। अब प्रभुदयाल द्वारा अपने कार्यकाल का सोसायटी एक्ट 2012 के अनुसार ऑनलाइन अपडेट किया गया है जिसमें वर्तमान में केवल 3 लोगों एसपी गोयल, नीरू वढेरा व सुरेंद्र मोहन को ही फाउंडर सदस्य दिखाया गया है। ये रिकॉर्ड पर भी उपलब्ध है और अब केवल 3 फाउंडर सदस्य ही मान्य होंगे। सोसायटी के नियमों के अनुसार सिर्फ अर्बन एस्टेट, सेक्टर-10 के निवासी ही संस्था के सदस्य हो सकते हैं। इसमें इस क्षेत्र से बाहर वालों को कार्यकारिणी की सलाह से विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया जा सकता है। लेकिन विश्लेषण के दौरान पाया गया कि हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-10 से भी सदस्य बना दिए गए। इस विषय पर संज्ञान लेते हुए रजिस्ट्रार ने संस्था को नियमानुसार कार्य करने को कहा। फाउंडर सदस्य नीरू वढेरा ने कहा कि अप्रैल 30, 2015 में उनके द्वारा 4 सदस्य मकान नं. 860, 858, 864 व 866 हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-10 से लिए थे जोकि मंदिर से दो कदम की दूरी पर थे लेकिन तब इनकी सदस्यता मान्य नहीं की गई। कारण यह दिया गया कि ये सब अर्बन एस्टेट,के नहीं बल्कि हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-10 के निवासी हैं और अब नियमों को ताक पर रखकर हाउसिंग बोर्ड से सदस्य बना दिए गए जोकि वैध नहीं हैं। नीरु वढेरा व अन्य सदस्यों ने रजिस्ट्रार के इस फैसले का स्वागत किया।

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जिन्होंने रुपये जमा नहीं करवाए थे उन सभी को नोटिस भेजे गए थे। इनमें से जिन्होंने रुपये जमा करवा दिए हैं उन्हें जोड़ लिया गया है। जिन्होंने नहीं जमा करवाए उन्हें दोबारा नोटिस भेज देंगे। वैसे यह प्रताड़ना वाली बात है। बेवजह तंग किया जा रहा है। क्योंकि 2017 का रिकॉर्ड नीरू वढेरा के पास ही है।
प्रभुदयाल, वर्तमान प्रधान।

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