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#विसराः भिवानी जिले से 450 सैंपल भेजे गए मधुबन लैब, अब भी कई केसों की रिपोर्ट का इंतजार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिवानी Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 03 Dec 2019 10:24 AM IST
सांकेतिक तस्वीर
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संदिग्ध मौतों के मामलों में अहम साबित होने वाली विसरा जांच अनेक केसों में लैब में ही पड़ी है। जांच अधिकारियों को सालभर से भी ज्यादा समय के बावजूद रिपोर्ट आने का इंतजार है। इस साल अब तक करीब 450 केसों में विसरा जांच के लिए लैब भेजा गया। कुछ विशेष केसों को छोड़ दे तो अधिकतर केसों की रिपोर्ट का अभी भी इंतजार है। वर्ष 2018 की भी थाना अनुसार 20 से 25 फीसदी रिपोर्ट लंबित है। पुलिस विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बड़े आपराधिक मामलों की रिपोर्ट पहले मंगवा ली जाती है। सिर्फ इत्तेफाकिया मौत के मामलों की ही रिपोर्ट लंबित है।
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संदिग्ध मौत के मामलों में पुलिस को विसरा रिपोर्ट की जरूरत पड़ती है और विसरा जांच के लिए करनाल लैब में भेजा जाता है। लैब में प्रदेशभर से ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी विसरा जांच के लिए आता है। ऐसे में यहां वर्क लोड अधिक रहता है। इसी कारण विसरा रिपोर्ट लंबित है। नियमानुसार तीन सप्ताह में रिपोर्ट देनी होती है मगर वर्क लोड के कारण रिपोर्ट आने में कई बार छह माह से एक साल तक लग जाता है। हालांकि जिला पुलिस ऐसे मामले जिनमें किसी पर आरोप लगे हो और केस दर्ज हुआ हो, ऐसे मामलों की रिपोर्ट जरूरी बताकर पहले मंगवा ली जाती है।


पुलिस विसरा रिपोर्ट के बिना भी जांच चार्जशीट दाखिल कर सकती है और चार्जशीट में विसरा रिपोर्ट आना बाकी लिख दिया जाता है। लेकिन विसरा रिपोर्ट आने के बाद ही चार्ज पर बहस होती है। विसरा रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि मौत जहर से हुई है या नहीं। सीआरपीसी की धारा-293 के तहत एक्सपर्ट व्यू एडमिशिबल एविडेंस होता है यानी विसरा रिपोर्ट एक्सपर्ट व्यू होती है और यह मान्य साक्ष्य है।

कब होती है विसरा जांच
- कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर मौत संदिग्ध परिस्थिति में हो और अंदेशा हो कि जहर से मौत हुई है तो विसरा की जांच की जाती है।
- अगर गाड़ी से कुचल कर किसी की मौत हो जाए या किसी की गोली मारकर हत्या कर दी जाए तो शव का पोस्टमार्टम होता है। ऐसे मामले में आमतौर पर विसरा जांच की जरूरत नहीं होती, लेकिन डेड बॉडी देखने के बाद अगर मौत संदिग्ध लगे यानी जहर देने की आशंका हो तो विसरा की जांच की जाती है।
- डेड बॉडी अगर नीली पड़ी हुई हो, जीभ, आंख, नाखून आदि नीला पड़ा हुआ हो या मुंह से झाग आदि निकलने के निशान हो तो जहर की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में
पोस्टमार्टम के बाद डेड बॉडी से विसरा प्रिजर्व किया जाता है।
- विसरा प्रिजर्व करने के दौरान डेड बॉडी से लीवर, स्प्लीन और किडनी का पार्ट रखा जाता है। साथ ही शरीर में मौजूद फ्लूड आदि को प्रिजर्व किया जाता है।
- नहर में मिलने वाले संदिग्ध मौत वाले लोगों के विसरा जांच के लिए लैब में भेजे जाते हैं, ताकि मौत के कारणों का पता लग सकें।

अब व्यवस्थाओं में पहले से ज्यादा सुधार हुआ है और अब रिपोर्ट ज्यादा लंबित नहीं रहती। जिन केसों में किसी पर आरोप लगते है यानी गंभीर अपराध के मामलों में विसरा रिपोर्ट पहले मंगवा ली जाती है। सिर्फ इत्तफाकिया मौत के मामलों में ही, जिनमें परिजन कार्रवाई भी नहीं चाहते मगर विसरा जांच के लिए भेजा जाता है, ऐसे केसों की ही रिपोर्ट में ही थोड़ा देरी होती है। ऐसे मामले भी अब कम है।
- विरेंद्र सिंह, डीएसपी

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