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Bhiwani News: शहर में फिर बढ़ा बंदरों का उत्पात, लोगों का घरों से निकलना हुआ दुश्वार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Dec 2022 04:30 AM IST
मॉडल संस्कृति स्कूल के पास बैठे बंदर। संवाद
मॉडल संस्कृति स्कूल के पास बैठे बंदर। संवाद - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। शहर की हर कॉलोनी और गली में बंदरों का उत्पात बना है। ये उत्पाती बंदर न केवल घरों की रसोई तक पहुंच रखने की ताक में रहते हैं, मौका मिलते ही बच्चों और महिलाओं पर भी झपट पड़ते हैं। यही वजह है कि हर माह बंदरों के काटने की वजह से करीब 20 से अधिक लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिसकी वजह से रेबीज के टीकों की मांग भी बढ़ गई है। वहीं नगर परिषद प्रशासन भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है। पिछले दो साल से बंदर पकड़ने का कोई अभियान नहीं चला है। जबकि बंदरों की तादाद शहर में बढ़कर पहले से डेढ़ गुना हो गई है।

शहरी दायरे की कॉलोनियों में बंदरों का उत्पात बढ़ गया है। शहर में करीब चार हजार से अधिक बंदरों की संख्या हो गई है। बंदरों के भय से महिलाएं और बच्चे अपने घरों की छतों पर भी जाने से डरते हैं। करीब दो साल पहले नगर परिषद ने शहर में बंदर पकड़ने का ठेका दिया था। लेकिन ठेकेदार ने मुश्किल से 800 बंदर ही पकड़े थे कि अभियान बीच में ही बंद करा दिया। जबकि पकड़े गए बंदरों के मेडिकल को लेकर भी दिक्कत बनी रही। ये अभियान बीच में ही फुस हुआ तो बंदरों का उत्पात भी बढ़ने लगा। शहर का कोई भी इलाका या मोहल्ला नहीं है, जहां बंदरों की टोलियां सुबह और शाम गश्त नहीं लगाती। कई बार तो छतों से नीचे उतर बंदर गली के अंदर खेल रहे बच्चों को भी काट खाने को दौड़ पड़ते हैं, जिसकी वजह से बच्चे भी काफी बार चोटिल हो चुके हैं।

कलेसर के जंगलों में छोड़ना भी चुनौती
बंदर पकड़ने के बाद इन्हें कलेसर के जंगलों में छोड़ा जाना अनिवार्य है। लेकिन नगर परिषद को शहर से बंदर पकड़ने के लिए ठेकेदार ही नहीं मिल रहे हैं। लोकल ठेकेदार भी बंदरों को पकड़ने के बाद कलेसर के जंगलों में छोड़ने जाते हैं तो वहां भी नियमों की कई चुनौतियां उनके सामने खड़ी हैं। यही वजह है कि शहर में बंदरों को पकड़कर उन्हें कलेसर ले जाने के लिए कोई भी ठेकेदार तैयार नहीं हो रहा है।
पार्कों में भी बंदरों का खतरा
शहर कई पार्कों में बंदर आमतौर पर नजर आते हैं। इसकी वजह से लोगों ने पार्कों में जाना तक छोड़ दिया है। ये बंदर पार्क की हरियाली व फूल और पौधों को भी नष्ट कर रहे हैं, जिसकी वजह से पार्कों के माली व रखरखाव करने वाले भी काफी परेशान हैं और नगर परिषद से बंदरों का प्रबंध करने की मांग उठा चुके हैं।
ये बोले शहरवासी
हमारे इलाके में बंदरों का आतंक है। मैं दो बार अपने घर की छत पर बंदरों की चपेट में आने से मुश्किल से बची हूं। बच्चे भी छत पर बंदरों के भय से नहीं जाते हैं। बंदर छत पर सुखाए गए कपड़े भी उठा ले जाते हैं। खाने की चीजों के चक्कर में घर के अंदर भी घुस जाते हैं। इनसे जल्द से जल्द निजात दिलाई जाए।
-सुनीता, हनुमान गेट क्षेत्रवासी।
घरों की दीवारों पर बंदरों की टोलियां दिनभर बैठी रहती हैं। इसकी वजह से मोहल्ले की कई महिलाओं को बंदरों के हमले से चोटिल होकर अस्पताल जाना पड़ा। हमारे इलाके में बंदरों की समस्या काफी लंबे अर्से से बनी है, जिससे निजात दिलाने के लिए काफी बार नगर परिषद से भी मांग कर चुके हैं। लेकिन न बंदरों का आना कम हुआ है न इन्हें पकड़ने कोई आया है।
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- ललित, हनुमान गेट क्षेत्रवासी
ये मामला हमारे संज्ञान में हैं। शहर में बंदरों की वजह से काफी परेशानी हो रही है। बंदरों को पकड़ने का एस्टीमेट तैयार कराकर मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा जाएगा।
-अशोक कुमार दांगी, सचिव नगर परिषद, भिवानी।
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