किसान आंदोलन: रास्ता खुलवाने की सरकारी कवायदों के बीच बोले किसान-हमने नहीं, दिल्ली पुलिस ने बंद किया है हाईवे  

संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 17 Sep 2021 10:47 AM IST

सार

किसानों का कहना है कि किसान अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। मजबूरी में बॉर्डर पर आना पड़ा है क्योंकि सरकार ने किसानों को दिल्ली में जाने से रोक दिया गया। यदि किसानों को दिल्ली में जाने दिया जाता तो वे बॉर्डर बंद करके बैठते ही नहीं। 
कुंडली बॉर्डर पर डटे किसान।
कुंडली बॉर्डर पर डटे किसान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिए हैं कि किसानों से कुंडली-सिंघु बार्डर खुलवाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से हरियाणा सरकार और प्रशासन के बीच बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। सरकार ने किसानों से बैठक करने के लिए एक कमेटी का भी गठन कर दिया गया है, जिसमें सोनीपत के डीसी को भी शामिल किया गया है, लेकिन कुंडली बॉर्डर पर बैठे किसान सरकार और पुलिस को ही रास्ता बंद किए जाने का जिम्मेदार बता रहे हैं। 
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धरने पर बैठे गुरदासपुर, पंजाब के किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि जिस रास्ते को खोलने की बात कही जा रही है, वह किसानों ने बंद नहीं किया है। सिंघु बॉर्डर को दिल्ली पुलिस ने बंद किया है, तो उसे ही खोलना चाहिए। किसानों के बीच से होकर गाड़ियां पहुंच रही हैं, लेकिन सड़क की हालत खराब होने के कारण जाम लग रहा है। किसानों को कारण बताना गलत है। 


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लुधियाना, पंजाब से आए किसान सुरजीत सिंह ने सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि सरकार यदि 3 कानूनों को वापस ले लेती है तो किसानों के साथ राहगीरों को भी राहत मिल सकेगी। सरकार नहीं चाहती कि मामले का समाधान हो। यह कहां का कानून है कि किसान 10 माह से सर्दी, गर्मी, धूप, बारिश व आंधी के बीच यहां खुले आसमान के नीचे पड़े हैं, उनकी कोई सुध नहीं ले रहा। किसान सतनाम सिंह ने कहा कि किसान अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। मजबूरी में बॉर्डर पर आना पड़ा है क्योंकि सरकार ने किसानों को दिल्ली में जाने से रोक दिया गया। यदि किसानों को दिल्ली में जाने दिया जाता तो वे बॉर्डर बंद करके बैठते ही नहीं। सरकार को अब समझदारी दिखानी चाहिए और देश के किसानों की गुहार को सुन लेना चाहिए। रास्ता खुलवाना है तो पहले दिल्ली की ओर से रास्ता खुलवाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश हैं, उनके अनुसार बंद बॉर्डर को खुलवाया जाना है। यह मार्ग किसानों ने बंद नहीं किया है बल्कि दिल्ली की ओर से बंद किया गया है। सरकार को दिल्ली की ओर से पहले मार्ग खुलवाना चाहिए। किसान राहगीरों के लिए अड़चन नहीं बन रहे, बल्कि सरकार खुद किसानों व लोगों के लिए अड़चन खड़ी कर रही हैं। किसान मोर्चा की बैठक के बाद किसान फैसला लेंगे। बैठक से पहले रास्ता खोलने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। - अभिमन्यु कोहाड़, सदस्य, संयुक्त किसान मोर्चा।

राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच ने सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप
राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच ने सिंघु बॉर्डर पर एक तरफ का रास्ता खुलवाने के प्रयासों के चलते अपनी कोर कमेटी के सदस्यों की मीटिंग की। मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक जनहित याचिका पर आए फैसले एवं प्रदेश सरकार द्वारा सिंघु बॉर्डर को एक तरफ से खोलने की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। मंच के अध्यक्ष हेमंत नांदल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा करीब 10 महीने से प्रभावित लोगों की अनदेखी की गई है। राष्ट्रवादी परिवर्तन मंच द्वारा करीब 4 महीने से सिंघु बॉर्डर को एक तरफ से खोलने के लिए एक मुहिम चलाई जा रही है। दूसरी तरफ प्रदेश सरकार द्वारा पिछले करीब 10 महीनों में न तो स्थानीय लोगों को सहायता उपलब्ध करवाई गई और न ही लोगों की समस्याओं को लेकर उनसे कोई वार्ता की गई ।

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