गेहूं बिजाई से पहले ही खाद के लिए मारामारी, किल्लत से ज्यादा कालाबाजारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Oct 2021 10:00 PM IST
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फतेहाबाद। जिले में गेहूं बिजाई से पहले ही खाद को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। किसान आरोप लगा रहे हैं कि जरूरतमंद किसानों को खाद नहीं मिल रही, बल्कि खाद की कालाबाजारी हो रही है। प्रशासन का दावा है कि खाद की कोई कमी नहीं है, बल्कि किसान अफरा-तफरी मचा रहे हैं। इस बीच पुष्टि ये भी हुई है कि खाद विक्रेता नियमों की अवहेलना कर रहे हैं।
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बता दें कि खाद वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। ऐसी दो फर्मों के लाइसेंस भी निलंबित किए गए हैं, जिनके यहां खामियां मिली हैं। रतिया क्षेत्र में किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी एजेंसियों के गोदामों में जाकर चेक कर रहे हैं कि वास्तव में खाद कितनी उपलब्ध है और उन्हें बताई कितनी जा रही। प्रशासन का कहना है कि अभी गेहूं की बिजाई में दस दिन और लगेंगे। हर किसान को जरूरत अनुसार खाद मिल जाएगी। कोई वंचित नहीं रहेगा। इस तरह खींचतान की स्थिति है।

दो फर्मों के लाइसेंस हो चुके निलंबित
प्रशासन ने खाद बेचने वाली दो फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की है। दोनों फर्मों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। जाखल की एक फर्म का लाइसेंस 14 दिन के लिए निलंबित किया है। वहीं रतिया की एक फर्म का लाइसेंस 10 दिन के लिए निलंबित किया है। इन पर आरोप ये है कि खाद के स्टॉक व वितरण कार्य में पारदर्शिता नहीं बरती। अन्य कई नियमों का भी उल्लंघन पाया गया है।
प्रशासन का दावा : एनपीके के 17 हजार बैग उपलब्ध
कृषि विभाग के मुताबिक एक अक्टूबर से रबी सीजन 2021 की शुरुआत हो चुकी है। आलू और सब्जियों की बिजाई हो रही है। सब्जियों के लिए एनपीके उर्वरक उत्तम स्रोत है, जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश जैसे अनिवार्य तत्व हैं। इस समय एनपीके के 16 हजार 800 बैग उपलब्ध हैं।
सरसों के लिए पर्याप्त है सुपर फास्फेट
जिले में सरसों का एरिया लगभग 37 हजार एकड़ के आसपास रहता है। इसकी बिजाई शुरू हो चुकी है। सरसों की फसल में खाद की पूर्ति के लिए सिंगल सुपर फास्फेट खाद को सर्वोत्तम माना गया है। सिंगल सुपर फास्फेट से फसल के लिए अति आवश्यक सल्फर और फास्फोरस दोनों की पूर्ति एक साथ हो जाती है। सिंगल सुपर फास्फेट में फास्फोरस की मात्रा 16 प्रतिशत और सल्फर की मात्रा 12 प्रतिशत तक होती है। इस समय जिले में सिंगल सुपर फास्फेट के 73 हजार 500 बैग उपलब्ध हैं।
नवंबर में होगी गेहूं की बिजाई, डीएपी व यूरिया उपलब्ध
धान की फसल की कटाई लगभग अभी 10 प्रतिशत ही हुई है और गेहूं के सीजन की बिजाई में अभी काफी समय शेष है। गेहूं की बिजाई के लिए जिले में डीएपी खाद और यूरिया की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। इस समय जिले में 13 हजार 719 मीट्रिक टन यूरिया यानी तीन लाख 8 हजार 680 बैग और दो हजार 329 मीट्रिक टन डीएपी खाद यानी 46 हजार 580 बैग उपलब्ध है। प्रशासन का दावा है कि अगले सप्ताह तक और भी खाद आनी है।
उधर, खाद विक्रेताओं ने की बैठक, दी चेतावनी
उधर, जिले भर के खाद, बीज व कीटनाशक विक्रेताओं की बैठक फतेहाबाद के निजी होटल में हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान कैलाश बंसल ने की। बैठक में सभी विक्रेताओं ने किसानों द्वारा दुकानदारों के गोदामों को जांचने पर रोष जताया गया। वहीं, दुकानदारों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों को असामाजिक तत्व करार दिया गया। जिला प्रधान कैलाश बंसल ने कहा कि जिस प्रकार से पिछले कुछ दिनों से प्रशासन व किसानों के नाम पर असामाजिक तत्वों द्वारा खाद विक्रेताओं से दुर्व्यवहार व ज्यादती की जा रही है, वह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। अगर यह सिलसिला जारी रहा तो मजबूरन जिलेभर के सभी विक्रेता खाद की खरीद व बिक्री पूर्ण रूप से बंद कर देंगे।
कोट
किसानों से आग्रह है कि वे पूरे सीजन की खाद एक साथ लेने की बजाय फसल की जरूरत के हिसाब से ही दुकान से खाद लेकर जाएं। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
- डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग, फतेहाबाद
सोमवार को डीसी से मिलेंगे
दुकानदारों के गोदामों में जाकर उनकी बेइज्जती की जा रही है। वहां एकत्रित भीड़ से घबराकर अधिकारी दुकानदार पर अनावश्यक रूप से कार्रवाई कर देते हैं। यह गलत हो रहा है। सोमवार को इस मामले को लेकर डीसी महावीर कौशिक से मिलेंगे।
कैलाश बंसल, जिला प्रधान, खाद विक्रेता यूनियन।
कोट
कालाबाजारी रोके प्रशासन
किसान यही कह रहे हैं कि खाद पर्याप्त है, खाद की कमी नहीं है। समस्या ये है कि खाद की कालाबाजारी हो रही है। खाद विक्रेता अधिकारियों से मिलीभगत कर महंगे भाव पर ब्लैक में खाद बेच रहे हैं। कालाबाजारी पर लगाम लगाने की जरूरत है।
- मनदीप नथवान, राज्य कन्वीनर, किसान संघर्ष समिति।
बेहतर व्यवस्था बनाए प्रशासन
खाद वितरण को लेकर प्रशासन को बेहतर व्यवस्था बनानी चाहिए। एक तरफ तो अधिकारी कह रहे हैं कि खाद की कमी नहीं है, दूसरी तरफ किसानों को मिल नहीं रही है।
श्रवण पूनिया, किसान, गांव बीघड़।

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