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जिले में 11 हजार 856 एकड़ में छोड़ी धान की खेती, लक्ष्य से 50 फीसदी कम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 10:45 PM IST
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गांव भिरडाना के पास खड़ी नरमे की फसल। संवाद
गांव भिरडाना के पास खड़ी नरमे की फसल। संवाद - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। मेरा पानी-मेरी विरासत योजना अभी तक जिले में 11856 एकड़ जमीन का पंजीकरण हुआ है। यानी इतने रकबे में किसानों ने धान की खेती छोड़ दूसरी फसल बोई है। यह लक्ष्य से 50 फीसदी कम जरूर है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले स्थिति बेहतर हुई है। बीते वर्ष यह आंकड़ा 9078 एकड़ था। इस लिहाज से इस बार 2778 एकड़ ज्यादा में किसानों ने धान की खेती छोड़ी है।
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मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत वर्ष 2020 के आंकड़ों को देखते हुए जिले की स्थिति बेहतर हुई है। धान का रकबा निरंतर घट रहा है। मगर सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य को देखते हुए अभी 50 फीसदी कम है। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जिले में 24 हजार एकड़ धान का रकबा कम करना है, लेकिन अभी तक 11856 एकड़ में धान का रकबा घटा है। धान रोपाई का सीजन लगभग बीत चुका है। ऐसे में उपरोक्त आंकड़ा ज्यादा बढ़ने की संभावना नहीं है। योजना का लाभ लेने के लिए पंजीकरण की तारीख पहले 15 जुलाई रखी गई थी। बाद में बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई। यानी सिर्फ तीन दिन शेष हैं। लाभ पात्रों की संख्या देखें तो अब तक 4598 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। संवाद

क्या है मेरा पानी मेरी विरासत योजना
इस योजना का लक्ष्य भू-जल स्तर को उठाना है। धान की फसल के लिए सबसे ज्यादा भू जल दोहन होता है। इसलिए सरकार ने योजना बनाई है कि किसानों को धान की खेती छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। योजना के मुताबिक जो किसान धान बोते हैं, वे अगर धान छोड़कर अन्य खेती करते हैं तो उन्हें सरकार की तरफ से 7 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि मिलती है।
आंकड़ों में हालात
धान क्षेत्र में भू-जल स्तर 600 फुट
2019 में जिले में धान 1 लाख 28 हजार एकड़
2020 में धान का रकबा 1 लाख 19 हजार एकड़
2021 को लेकर लक्ष्य 1 लाख 04 हजार एकड़
ऐसे तय होगी प्रोत्साहन राशि की पात्रता
इस योजना का दुरुपयोग न हो, इसलिए विभाग ने पात्रता सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था बनाई है। इसके लिए बीते वर्षों की गिरदावरी से मिलान किया जाता है। जो किसान लंबे समय से धान बो रहे हैं, उन्हें चिन्हित किया जाता है। फिर चेक किया जाता है कि इस साल उन्होंने धान लगाया है या नहीं। यदि नहीं लगाया तो उसकी रिपोर्ट भेजी जाती है। उसी आधार पर प्रोत्साहन राशि मिलती है।
जमीन खाली छोड़ने पर भी प्रोत्साहन
योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों में धान की फसल से हटाकर दूसरी फसलों के प्रति रुचि पैदा करना है। इसलिए जो किसान धान की पैदावार लेते हैं। कारणवंश उनकी जमीन खाली भी रह जाती है, तो भी 7 हजार रुपये मिलेंगे। अभी तक प्रावधान ये है कि यह राशि प्रति एकड़ के हिसाब से हर साल मिलेगी। बशर्ते हर साल नया पंजीकरण करवाना होगा।
31 जुलाई अंतिम तारीख : डीडीए
मेरा पानी मेरी विरासत योजना किसानों को काफी रास आ रही है। धान छोड़कर दूसरी खेती करने वाले किसानों को दोहरा फायदा होगा। एक तो सिंचाई का खर्चा कम होगा, वहीं सरकार से 7 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन मिलेगा। पंजीकरण के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई रखी है।
-राजेश सिहाग, उप निदेशक, कृषि विभाग
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