शराब ठेके हटाने के लिए ग्राम पंचायतों के गठन का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 11:11 PM IST
बंद पड़े शराब ठेके की फाइल फोटो।
बंद पड़े शराब ठेके की फाइल फोटो। - फोटो : Fatehabad
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गांवों में आबादी वाले क्षेत्र में खुले शराब ठेके आमजन के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के बिना शराब ठेके नहीं हटाए जा सकते। इसी का फायदा उठाकर शराब ठेकेदार कहीं भी उप ठेका खोल देते हैं। इसके बाद आसपास के लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो जाती है। इसके चलते प्रशासन के पास हर माह चार से पांच मांग पत्र शराब का ठेके हटाने के लिए आये हैं।
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जहां पर विरोध करने वाले लोग ज्यादा हों, वहां शराब ठेका हटा दिया जाता है। अन्यथा लोगों को समस्या झेलनी ही पड़ती है। इस परेशानी की वजह ये है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल फरवरी 2021 में ही खत्म हो चुका है। शराब ठेके के विरोध में यदि लोग सीधे शिकायत दें तो उस पर सुनवाई नहीं होती। संवाद

इन ठेकों को लेकर रहा ज्यादा विरोध
1 रतिया में मार्केट कमेटी कार्यालय के सामने शराब ठेके को लेकर लोगों को धरना देना पड़ा। वहां पर स्थानीय लोगों ने कई दिन तक धरना दिया।
2 बीघड़ गांव में शराब ठेके को लेकर विरोध जताया। विरोध बढ़ता देखकर प्रशासन को हरकत में आना पड़ा। एक बारगी कार्रवाई के तौर पर ठेका सील कर दिया गया है ताकि कोई विवाद खड़ा न हो।
3 पिछले सप्ताह ही एमपी रोही के ग्रामीणों ने प्रशासन को दरखास्त दी है। वे शराब ठेका हटवाना चाहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब ठेके के कारण आसपास के लोगों को शराबियों की वजह से परेशानी होती है।
4 गांव नाढ़ोड़ी में शराब ठेके खिलाफ विरोध चलता रहा। यहां पर लोगों ने खुद जाकर शराब ठेका बंद करवाया। हालांकि बात ठेकेदारों की आपसी गुटबाजी भी सामने आई।
5 रतिया में टेलीफोन एक्सचेंज के पास शराब ठेके का विरोध हुआ। यहां पर रिहायशी एरिया में शराब ठेका खोल दिया गया। इसके चलते शराबियों का जमावड़ा लगा रहता था। विरोध को देखते हुए ठेकेदार ने खुद ही ठेका हटा लिया था।
जटिल है ठेका हटाने की कानूनी प्रक्रिया
शराब ठेके से सरकार को राजस्व मिलता है। इसलिए शराब ठेका हटाने की प्रक्रिया बनाई गई है जो काफी जटिल है। संबंधित ग्राम पंचायत प्रस्ताव पारित करेगी कि उनके गांव से शराब का ठेका हटाया जाए। इसके बाद उस गांव का आपराधिक रिकॉर्ड भी देखा जाता है। यदि उस गांव में अवैध शराब बिक्री के मुकदमे दर्ज हुए हैं तो ठेका नहीं हट सकता। यदि नियम इसलिए बनाया गया है, क्योंकि शराब ठेका हटने के बाद वहां पर अवैध शराब की बिक्री रोकना मुश्किल हो जाता है।
सिर्फ एक साल के लिए मान्य होता है प्रस्ताव
नियमानुसार यदि ग्राम पंचायत शराब ठेके के खिलाफ प्रस्ताव पास कर ठेका हटवा देती है तो वह प्रस्ताव सिर्फ उस सत्र के लिए होता है। अगले सत्र के लिए नया प्रस्ताव पास करना होता। उस पर नए सिरे से विचार होगा।
इसलिए नहीं होती मांग पत्र पर सुनवाई
आमतौर पर लोग शराब ठेके हटाने की मांग करते हैं। अक्सर पाया जाता है कि शराब ठेकेदार आपस में ही एक दूसरे के खिलाफ शिकायतें करवाते रहते हैं। ठेकेदारों के बीच आपसी संघर्ष चलता रहता है। इसलिए ठेकेदार इसी तरह अपने जान पहचान वाले लोगों से शिकायतें करवा देते हैं। इसलिए आठ-दस लोगों की शिकायत पर सुनवाई नहीं होती।
कोट
शराब ठेके कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी होते हैं और सरकार को राजस्व मिलता है। ठेकेदार फीस अदा करते हैं। इसलिए चंद लोगों की शिकायत पर शराब ठेका नहीं हटाया जा सकता। ठेका हटाने के लिए काफी सारे मापदंड बने हुए हैं। उन मापदंडों के आधार पर ही कोई ठेका हटाया जा सकता है। इसमें कोई अधिकारी मर्जी नहीं चला सकता।
-वीके शास्त्री, उपायुक्त, आबकारी एवं कराधान विभाग।

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