साइफन खुलती तो 40 एकड़ भूमि में खड़ी धान की फसल हो जाती बर्बाद

Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 24 Oct 2021 11:42 PM IST
किनाना गांव में जींद-रोहतक मार्ग पर जाम लगाते बुआना के ग्रामीण।
किनाना गांव में जींद-रोहतक मार्ग पर जाम लगाते बुआना के ग्रामीण। - फोटो : Jind
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जींद/ जुलाना। बुआना व बराड़ खेड़ा गांवों के बीच में लगी साइफन खुलवाने को लेकर अधिकारियों पर हमला पहले से ही खेतों में भरे पानी से परेशान किसानों के गुस्से का नतीजा है। बराड़ खेड़ा गांव की 400 एकड़ फसल में पानी भरा है। वहीं, बुआना में भी 300 से अधिक एकड़ में जलभराव है।
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किसान जलभराव से पहले ही परेशान हैं। जब प्रशासनिक अमला बराड़ खेड़ा की तरफ से साइफन खुलवाने गया तो पहले से ही परेशान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। वहीं, बुआना के लोगों ने साइफन को बंद रखने की मांग को लेकर किनाना में जाम लगा दिया।

हुआ यूं कि गांव बुआना निवासी अमित ने 40 एकड़ जमीन 18 लाख रुपये में ठेके पर ली हुई है। उसकी जमीन बराड़ खेड़ा गांव के खेतों से लगती है। अमित की धान की फसल में फिलहाल दो-तीन फुट पानी भरा है। प्रशासनिक अमला यहां लगे साइफन को खुलवाने के लिए गया था। अमित के पिता जयभगवान उस समय मौके पर मौजूद थे। जयभगवान ने कहा कि यदि यह साइफन खुल गई तो उसकी पहले ही खराब फसल और बर्बाद हो जाएगी। इसलिए उसने साइफन खोलने का विरोध किया। जब प्रशासनिक अधिकारी नहीं माने तो जयभगवान ने अपने पायजामे के साथ पास खड़े पेड़ से फंदा लगाने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार दीपक, सिंचाई विभाग के एसडीओ जितेंद्र, जुलाना थाना प्रभारी समरजीत ने जयभगवान को पेड़ से उतार दिया। इस कारण विवाद बढ़ गया और प्रशासनिक अधिकारियों व ग्रामीणों के बीच खींचतान बढ़ गई। इसी बीच किसी ने प्रशासनिक टीम पर पत्थरबाजी कर दी। देखते ही देखते मामला बिगड़ गया। इस हमले में नायब तहसीलदार दीपक, सिंचाई विभाग के एसडीओ जितेंद्र, जुलाना थाना प्रभारी समरजीत घायल हो गए। ग्रामीणों ने तहसीलदार की गाड़ी के शीशे भी तोड़ दिए।
1995 में भी जलनिकासी को लेकर हुआ था विवाद
बराड़ खेड़ा और बुआना गांव के बीच मौजूद माइनर के नीचे से बारिश के पानी की निकासी को लेकर साइफन दबाया हुआ है। 1995 में भी बुआना गांव के लोगों ने साइफन से पानी नहीं निकलने दिया था। उसी समय से दोनों गांवों के बीच विवाद चल रहा है। बुआना के लोगों का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर पानी की निकासी अपने खेतों में नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासनिक किसी के दबाव में जबरदस्ती साइफन खोलना चाहता है। यदि यह साइफन खुला तो बुआना के खेतों के साथ-साथ गांव में भी पानी घुस जाएगा।
नायब तहसीलदार एवं ड्यूटी मजिस्ट्रेट दीपक ने बताया कि खेतों से बारिश के पानी की निकासी के लिए प्रशासनिक अमला बराड़ खेड़ा व बुआना गांव के बीच माइनर पर रविवार दोपहर बाद पहुंचा। प्रशासन ने साइफन खुलवाने का प्रयास किया तो ग्रामीणों ने प्रशासनिक अमले पर पथराव कर दिया। इसमें मेरे समेत कई अन्य कर्मचारियों को चोटें आई हैं।
जुलाना थाना प्रभारी समरजीत सिंह ने बताया कि बुआना गांव के एक ग्रामीण ने पेड़ पर लटक कर फंदा लगाने का प्रयास किया। पुलिस और ग्रामीणों ने उसे पेड़ से नीचे उतार लिया। ग्रामीणों ने साइफन को लेकर विरोध किया और ईंट और डंडों से प्रशासनिक अमले पर हमला कर दिया। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

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