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...का करूं बेटा, सरकारी अस्पताल में इलाज न मिलै, प्राइवेट वाले लूट रहे

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 18 May 2021 01:40 AM IST
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अनूप पाराशर
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पलवल। ...का करूं बेटा, सरकारी अस्पताल में इलाज ना मिल रौ और प्राइवेट वाले लूट रहे हैं। ऐसे मे तो इन पेड़ कै नीचै ही ग्लूकोज चढ़वानौ पड़ेगो। यू गांव कौ बेचारौ डॉक्टर इलाज तौ कर रौ है। जब का है यू भी इलाज ना करैगो तौ मेरी तरह के तौ मर ही जाएंगे। फिर इन नीम के पेड़ तै आक्सीजन भी अच्छी मिलै है। यह कहना था पलवल के एक गांव में झोलाछाप डॉक्टर से नीम के पेड़ के नीचे उपचार ले रहे एक बुजुर्ग का। उक्त बुजुर्ग को बुखार की समस्या थी। ज्यादा मरीज आने पर उस झोलाछाप डॉक्टर ने बाहर नीम के पेड़ के नीचे मरीजों को चारपाई (खाट) पर लिटाकर टहनी से ग्लूकोज वाली बोतलों को पट्टी से बांधकर लटका दिया और मरीजों को ड्रिप चढ़ानी शुरू कर दी। ऐसा वहां तथा जिले के गांवों में केवल आज नहीं हो रहा है, बल्कि आए दिन ऐसे नजारे देखे जा सकते हैं। कहीं पेड़ों से ग्लूकोज की बोतलों को लटकाकर तो कहीं गाड़ियों में लिटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही है। यह सब सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे की असलियत है।
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग लोगों को शहर व गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे कर रहे हैं, लेकिन आज भी जिले में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व उप स्वास्थ्य केंद्रों में ग्रामीणों को इलाज नहीं मिल रहा है। कारण डॉक्टरों व स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव। जिले में बनाए हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में न तो मरीजों को देखने वाले डॉक्टर हैं न ही आक्सीजन वाले बिस्तर हैं। न ही अन्य सुविधाएं हैं। इसके चलते ग्रामीणों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता हैै, लेकिन अब कोरोना संक्रमण के चलते मरीजों को निजी अस्पतालों में मोटा बिल भरना पड़ रहा है। ऐसे में जो लोग निजी अस्पतालों का खर्चा नहीं उठा पा रहे हैं, वे गांवों में ही स्थित झोलाछाप डॉक्टरों से अपना इलाज करा रहे हैं। ये झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की न सिर्फ जान बचा रहे हैं, बल्कि उन्हें समय पर उपचार दे रहे हैं। हालांकि इनके पास न तो उपकरण है और न ही डिग्री है। इसके चलते मरीजों की जान को जोखिम भी रहता है।

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आक्सीजन जांचने को आक्सोमीटर और बेड भी नहीं
गांवों में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा एक-एक कमरे में बनाए हुए क्लीनिक व दवाखानों में डॉक्टरों के पास मरीजों का आक्सीजन लेवल जांचने के लिए न तो आक्सोमीटर है और न ही मरीजों को लिटाने के लिए बेड हैं। इतना ही नहीं ग्लूकोज की बोतल टांगने के लिए अस्पतालों में रहने वाले स्टैंड भी नहीं हैं। इस कारण ये झोलाछाप मरीजों को बाहर पेड़ों के नीचे चारपाई या बेंचों पर ही लिटा लेते हैं और वहीं कहीं न कहीं रस्सी बांधकर ग्लूकोज की बोतल टांग कर ड्रिप चढ़ाना शुरू कर देते हैं। आधे से ज्यादा झोलाछाप को तो सीटी स्कैन, एक्सरे व रक्त संबंधित जांचों की रिपोर्ट तक पढ़नी नहीं आती है, वे बस मरीज से उसकी बीमारी पूछकर ही इलाज शुरू कर देते हैं।
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ले रहे हैं झोलाछाप भी 2-2 हजार रुपये
कोरोना संक्रमण बीमारी से पीड़ित मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पताल ही मोटा बिल वसूल नहीं कर रहे हैँ, बल्कि गांवों में झोलाछाप डॉक्टर भी आजकल मरीजों से मोटा बिल वसूल रहे हैं। 50 से 100 रुपये तक दवा व अपनी फीस के रूप में बिल वसूलने वाले ये झोलाछाप आजकल बुखार के मरीज से भी 2-2 हजार रुपये वसूल रहे हैं। जिले के एक गांव में झोलाछाप पर अपना इनाज करा रहे एक मरीज ने बताया कि पहले यह डॉक्टर 70 रुपये में बुखार की दवा देता था, लेकिन अब उसे बुखार व खांसी होने पर ग्लूकोज चढ़ाने व दवाइयां देने पर 2 हजार रुपये फीस ली है।
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कहीं डाक्टर नहीं हैं तो कहीं दवाई नहीं
जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बिल्कुल नहीं है। गांवों में बनाए हुए प्राथमिक व स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं न के बराबर हैं। कहीं डॉक्टर नहीं है तो कहीं दवाइयां तक नहीं है। बैसलात में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन को बने हुए आज 3 साल हो गए हैं, लेकिन आजतक शुरू नहीं हुआ है। अब सरकारी अस्पतालों में इलाज मिलता नहीं और निजी वाले मोटा रुपया मांगते हैं, ऐसे में लोग इन झोलापछाप डॉक्टरों पर ही उपचार कराने को मजबूर हैं। सरकार इस तरफ ध्यान दें।
-राहुल दीक्षित, गांव बाता
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उप स्वास्थ्य केंद्र में नहीं है डाक्टर
हमारे गांव असावटा में पहले उप स्वास्थ्य केंद्र था, लेकिन वहां कभी भी न तो डॉक्टर बैठा और नही स्वास्थ्य सुविधाएं मिली। जिस कारण केंद्र बंद रहते-रहते जर्जर हो गया। अब फिर से सरकार ने नए उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा कर दी है। सरकार केवल पैसा बरबाद करने में लगी है। इससे बेहतर है कि पहले डॉक्टरों, स्टाफ व दवाइयों का गांवों में इंतजाम करें। जहां पहले से ही अच्छे भवन हैं, पहले वहां इलाज शुरू करे, ताकि लोगों को झोलाछाप से इलाज न कराना पड़े और अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े। पलवल जिले में सरकार व स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में फेल है।
-भगत पोसवान, पूर्व प्रवक्ता, भाजपा
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जल्द करेंगे झोलाछाप पर कार्रवाई
गांवों में स्वास्थ्य उपचार देने के नाम पर लोगों की जान से खेलने वाले झोलाछापों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। लोगों को समझना चाहिए तथा झोलाछाप से दवाइयां व उपचार नहीं लेना चाहिए। जिले में नागरिक अस्पतालों में बेहतर व प्रशिक्षित डॉक्टर हैं। हमारा प्रयास है कि लोगों को हर संभव इलाज मिले। मैं इस बारे में जांच कराऊंगा कि कहां-कहां झोलाछाप पेड़ों के नीचे लोगों को ड्रिप चढ़ा रहे हैं। इस तरह से लोगों की जान जोखिम में नहीं डालने दी जाएगी। पलवल जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं पर्याप्त हैं।
-डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, सिविल सर्जन पलवल

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