ब्लैक फंगस: इलाज के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन, 7 चिकित्सक किए गए शामिल

Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 25 May 2021 02:06 AM IST
Black fungus: expert committee constituted for treatment, 7 physicians included
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चंडीगढ़। पंजाब में ब्लैक फंगस पर अंकुश लगाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सरकार ने इस बीमारी के इलाज के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इसमें राज्य के सात विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया गया है। समिति का संयोजक स्वाइन फ्लू के राज्य कार्यक्रम अधिकारी डा. गगनदीप सिंह ग्रोवर को बनाया गया है।
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पंजाब के विभिन्न हिस्सों से म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस इंफेक्शन) के 111 मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि इनमें से 25 मामले सरकारी अस्पतालों में और शेष 86 प्राइवेट अस्पतालों में सामने आए हैं। सिद्धू ने बताया कि इस बीमारी के इलाज के लिए एंटी-फंगल दवाओं की आवश्यकता होती है, इन दवाओं की आपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित की जा रही है। दो प्रमुख इंजेक्शन उपलब्ध हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कोई भी इन दवाओं को सीधे खुले बाजार से नहीं खरीद सकता है क्योंकि उनका वितरण भारत सरकार के एकमात्र अधिकार क्षेत्र में है।

ये सात विशेषज्ञ करेंगे इलाज
- डॉ. आरपीएस सिबिया, प्रोफेसर और हेड, मेडिसिन विभाग, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, पटियाला।
- डॉ संजीव भगत, प्रो. और हेड, ईएनटी विभाग, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, पटियाला।
- डॉ अवतार सिंह धांजू, एसोसिएट प्रोफेसर और हेड, मेडिसिन विभाग, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अमृतसर।
- डॉ एके मंडल, निदेशक पल्मोनोलॉजी, स्लीप एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन, फोर्टिस अस्पताल, मोहाली।
- डॉ मनीष मुंजाल, प्रो और प्रमुख, ईएनटी विभाग, दयानंद मेडिकल कॉलेज, लुधियाना।
- डॉ मैरी जॉन, प्रोफेसर और प्रमुख, मेडिसिन विभाग, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, लुधियाना।
- डॉ गगनदीप सिंह ग्रोवर, राज्य कार्यक्रम अधिकारी, स्वाइन फ्लू समिति।
इलाज के लिए ई-मेल या फोन करें
ब्लैक फंगस के इलाज करने वाले अस्पताल को इस बीमारी के इलाज के लिए सलाह की आवश्यकता है, तो वह विशेषज्ञ समिति से ई-मेल mucorpunjab@gmail.com या मोबाइल नंबर 8872090028 पर संपर्क कर सकता है। मोबाइल नंबर पर डॉ गगनदीप ग्रोवर उपस्थित रहेंगे। किसी भी अस्पताल को इंजेक्शन की आवश्यकता होती है, तो वह भी इस समिति से संपर्क कर सकता है।
इन रोगियों में होता है फंगस
ब्लैक फंगस के मामले मुख्य रूप से उन रोगियों में मिल रहे हैं, जो हाल ही में संक्रमण से ठीक हुए हैं। या फिर जो एचआईवी या कैंसर से पीड़ित हैं। स्टेरॉयड, इम्यूनो-मॉड्यूलेटर तकनीक के जरिए संक्रमण से ठीक हुए रोगियों में भी ब्लैक फंगस होने की संभावनाएं रहती हैं। अनियंत्रित मधुमेह और लंबे समय तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले लोग भी इस बीमारी के चपेट में आते हैं।
ये होते हैं लक्षण:
ब्लैक फंगस के लक्षणों में चेहरे का दर्द या सूजन, भरी हुई नाक या भूरे रंग का नाक बहना, दांत दर्द, ढीले दांत, लालिमा, दर्द या आंख की सूजन, बुखार, सांस की तकलीफ, सिरदर्द शामिल हो सकते हैं। आंखों से धुंधला दिखना भी इसके लक्षणों में शामिल है। यदि ये कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति में दिखाई देते हैं तो तत्काल उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इसकी जानकारी देनी चाहिए।

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