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पंचकूला दमकल विभाग की आठ गाड़ियों में से चार कंडम

अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 16 Jul 2016 01:23 AM IST
दमकल विभाग की कंडम गाड़ियां।
दमकल विभाग की कंडम गाड़ियां। - फोटो : अमर उजाला
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शहर में अग्निकांड हुआ तो दमकल विभाग बचा नहीं पाएगा। वजह विभाग खुद स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। आधे-अधूरे साजो-सामान और मैनपावर की वजह से दमकल विभाग फिलहाल खुद ही राहत मिलने की आस लगाए बैठा है। विभाग के पास आठ गाड़ियां हैं। इनमें से चार कंडम हैं। यह गाड़ियां घटनास्थल पर जाती जरूर हैं लेकिन उनमें पानी नहीं होता। क्योंकि करीब 22 साल पुरानी इन गाड़ियां से पानी घटनास्थल तक पहुंचने से पहले लीकेज की वजह से बह जाता है। ऐसे में आबादी व क्षेत्र के हिसाब से चार गाड़ियों के सहारे ही पंचकूला जिले में आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए स्टाफ दिन-रात ड्यूटी बजा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर  से नगर निगम को बार बार सूचित किया गया है, लेकिन निगम का इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।   


तीन शिफ्ट की ड्यूटी, स्टाफ भी पूरा नहीं 
दमकल विभाग के मुलाजिम तीन शिफ्ट में अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। लेकिन पूरे जिले में मात्र 66 मुलाजिम कार्यरत हैं। इसमें फायर आफिसर, लीड फायरमैन, फायरमैन, ड्राइवर भी शामिल हैं। लेकिन जितनी यहां पर गाडियां है उनके लिए कम से कम 198 का स्टाफ होना चाहिए। क्योंकि प्रत्येक गाड़ी पर कम से कम छह  सदस्य होते है ऐसे में तीन शिफ्टों के लिए 198 कर्मचारी तो हर हाल में  चाहिए। लेकिन लंबे अर्से से स्टाफ की कमी यहां खूब खल रही है। इसको दूर करने के लिए कोई सार्थक कदम तक नहीं उठ रहे।  सर्विस स्टेशन पर कुल मिलाकर 8 गाड़ियां हैं, जिनमें से 4 गाड़ियां को तो  कंडम घोषित किया जा चुका है। जो गाड़ियां कंडम हैं वे 15 से 20 वर्ष से  अधिक पुरानी हैं। यही नहीं उनकी हालत भी खस्ता है। इनमें दो गाड़ियां के टैंक खराब हो चुके हैं। इसके अलावा एक गाड़ी का एक्सीडेंट हुआ था, लेकिन उसे आजतक सही नहीं करवाया गया।  


15 साल की मंजूरी 
दमकल  विभाग की गाड़ियां की मंजूरी मात्र पंद्रह साल की होती है। ऐसा विभाग के  मुलाजिमों का कहना है। यहां 1994 में गाडिय़ां खरीदी गईं थी। उसके मुताबिक  पंचकूला दमकल
विभाग के 22 साल पुरानी गाड़ियां से काम चला रहा है। 

रेस्क्यू गाड़ी तक नहीं 
बाढ़ ग्रस्त इलाका में जाने के लिए दमकल विभाग के पास रेस्क्यू गाड़ी तक नहीं है। रेस्क्यू आपरेशन सेल के पास न तो लाइफ जैकेट है और न ही कटर, जेनरेटर,  बोट व फर्स्ट एड
सामान। वाटर मिस्ट में केवल एक रस्सी है व छोटा-मोटा सामान उसके सहारे ही काम चलाया जा रहा है। लेकिन यह रस्सी भी अब लंबी चलने वाली  नहीं दिख रही।
 
हाईड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं मिला 
पंचकूला  को हाईड्रोलिक प्लेटफार्म की मंजूरी मिलने के बाद भी हाईड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं मिल पाया। यहां पर मकान 18 मंजिल तक हैं, लेकिन दमकल विभाग  के पास अग्निकांड से
निपटने के लिए साधन मात्र 4 मंजिल तक हैं।  इस वजह से  जिले की 6 लाख लोगों की आबादी हाई रिस्क पर है। उन लोगों की जान को सबसे अधिक खतरा है जो 18 मंजिल तक की
मल्टी स्टोरी इमारतों में रह रहे हैं। पंचकूला को कब तक हाईड्रोलिक प्लेटफार्म मिलेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं  है।



कोट्स
जितनी भी दमकल विभाग की गाड़ियां कंडम हैं उसका प्रपोजल बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। सरकार का भी आदेश है कि कंडम वाहनों को बदला जाए। बजट आते ही गाड़ियां बदली
जाएंगी। 
- ललित सिवाच, कमिश्नर नगर निगम पंचकूला।

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