भाला पकड़ने के साथ ही देखा ओलंपिक का सपना आज पूरा करेंगे नीरज चोपड़ा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 01:42 AM IST
पानीपत। नीरज चौपड़ा के साथ जितेंद्र जागलान। फाइल फोटो।
पानीपत। नीरज चौपड़ा के साथ जितेंद्र जागलान। फाइल फोटो। - फोटो : Panipat
विज्ञापन
ख़बर सुनें
नीरज गिरी
विज्ञापन

पानीपत। शिवाजी स्टेडियम में भाला पकड़ने के साथ ही ओलंपिक में खेलने का सपना नीरज आज पूरा करेंगे। यह कहना था एथलीट नीरज चोपड़ा के पहले कोच जितेंद्र जागलान का। उन्होंने अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में बताया कि जब नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक में खेलने की ठानी थी, तब उन्होंने कहा था कि आज तक भारत का एथलेटिक्स में कोई ओलंपिक मेडल नहीं है, तुम्हें ओलंपिक मेडल लेकर आना है।
कोच जितेंद्र ने बताया कि शिवाजी स्टेडियम में जब पहली बार नीरज चोपड़ा को उसके चाचा सुरेंद्र चोपड़ा लेकर आए तो लगभग छह महीने तक वजन कम करने से लेकर फिट होने तक नीरज से सभी खेल खिलवाए गए। नीरज दौड़ने में काफी धीमा निकला, लंबी छलांग, ऊंची छलांग समेत अन्य खेल करवाने के बाद जब उसके हाथ में पहली बार बांस का भाला दिया तो कुछ गजब हुआ। नीरज ने पहली ही बार में 25 मीटर से दूर भाला फेंक दिया। तभी समझ में आ गया था कि नीरज इसी खेल के लिए बना है। कोच जितेंद्र ने बताया कि नीरज के चाचा भीम और सुरेंद्र ने हमेशा नीरज के खेल को बढ़ावा दिया।

ओलंपिक में खेलने का सपना हमेशा बरकरार रहा। यह सिर्फ सपना ही नहीं नीरज चोपड़ा के लिए एक जुनून था, जो 10 साल बाद भी बरकरार है। कोच ने बताया कि नीरज ने चाहे कितनी चैंपियनशिप जीतीं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा ओलंपिक ही रहा। 10 साल के उतार-चढ़ाव के बाद लोगों का उद्देश्य बदल जाता है, लेकिन नीरज का उद्देश्य 10 साल बाद भी बरकरार रहा, यही एक अच्छे खिलाड़ी की पहचान है। संवाद
पानीपत के बाद जयबीर के साथ यमुनानगर किया था अभ्यास शुरू
पानीपत के शिवाजी स्टेडियम का मैदान समतल न होने और घास में सही से अभ्यास न होने पर नीरज के साथ ट्रेनिंग करने वाले जयबीर ढौंचक उर्फ मोनू उनको अपने साथ यमुनानगर स्टेडियम में ले जाने लगे थे। जहां उनको अच्छे मैदान की सुविधा मिली। साथी जयबीर के साथ नीरज ने भाला फेंकने की तकनीक पर काम किया। मोनू इस समय पटियाला में नेशनल खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।
उछलकर भाला फेंकना भी जल्दी सीख गया था नीरज
उछलकर भाला फेंकने की तकनीक भी नीरज ने शिवाजी स्टेडियम में रहकर ही सीखी थी। जहां शुरुआत में उनको फिट रखने के साथ उनके शरीर को लचीला भी बनाया गया। जिससे वह उछलकर हाथों के साथ पैरों का भी सही प्रयोग करके ज्यादा दूर भाला फेंक पाते थे। नीरज की खास बात है कि वह कभी हारने के बारे में नहीं सोचता था और हमेशा सकारात्मक रहता था। अनुशासन और लगन के कारण वह मेरा पसंदीदा छात्र भी है।
बुधवार को टोक्यो ओलंपिक में नीरज करेंगे प्रदर्शन
टोक्यो ओलंपिक में बुधवार को 5:35 बजे भाला फेेंक प्रतियोगिता है। जहां नीरज अपने सर्वश्रेष्ठ ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में 88.07 मीटर के कीर्तिमान को तोड़ने की कोशिश कर देश के लिए गोल्ड मेडल लाने का प्रयास करेंगे। नीरज के ओलंपिक में भाग लेने पर उनके गांव खंडरा में खुशी का माहौल और पूरा परिवार एक साथ उनका खेल देखेगा। सिर्फ पानीपत या हरियाणा को नहीं बल्कि पूरे देश को नीरज चोपड़ा ने स्वर्ण पदक की आस है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00