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साल दर साल बढ़ रहा धान का रकबा, नहीं छूट रहा धान का मोह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 12:00 AM IST
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रवींद्र नैन
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पानीपत। पानी का अधिक दोहन करने वाली धान की फसल से अभी किसानों ने तौबा नहीं की है। पानीपत सहित प्रदेश में धान का रकबा साल दर साल बढ़ता जा रहा है। साल 1995 में पानीपत में 43 हजार हेक्टेयर में धान का रकबा था जो अब 75-80 हजार हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। धान के बढ़ते रकबे के साथ ही भूजल स्तर भी नीचे जा रहा है। दूसरी ओर कृषि विभाग पानी बचाने की दिशा में किसानों को फसल विविधिकरण प्रक्रिया अपनाने और धान की सीधी बिजाई करने के लिए प्रेरित कर रहा है। किसानों से संवाद भी किया जा रहा है। मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत फसल विविधिकरण तकनीक अपनाने पर किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ और धान की सीधी बिजाई करने पर 5 हजार रुपये प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाएगा। धान की सीधी बिजाई के लिए पानीपत को दो हजार एकड़ का लक्ष्य दिया गया है।
करीब 1.02 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि वाले पानीपत में लगभग 98 हजार हेक्टेयर भूमि में कृषि की जाती है। इसमें से 75-80 हजार हेक्टेयर में सिर्फ धान की रोपाई की जाती है। हालांकि पिछले पांच वर्ष में जिले में धान का रकबा करीब 5 हजार हेक्टेयर कम हुआ है। इसका स्थान गन्ने और सब्जियों की फसल ने लिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार धान की फसल में अन्य फसलों बाजरा, ज्वार, कपास, मूंग, मूंगफली, हरड़ आदि की अपेक्षा पानी का दोहन 5 से 10 गुणा अधिक होता है। इससे भूजल स्तर काफी नीचे गिर रहा है। संवाद

पानीपत जिले में कृषि भूमि का रकबा
फसल रकबा हेक्टेयर में
धान 75 हजार
गन्ना 8 हजार
ज्वार 6 हजार
मक्का-बाजरा 1 हजार
सब्जियां आदि 6 हजार
कुल 98 हजार
दो दशक में 13.84 मीटर नीचे जा चुका है भूजल स्तर
पानीपत में ही बीते 22 सालों में भूजल स्तर 13.84 मीटर नीचे जा चुका है। पहले जहां पानी 8.53 मीटर पर मिलता था, अब 22.97 मीटर पर मिल रहा है। बीते दो सालों में ही भूजल स्तर करीब 1.80 मीटर नीचे गिर चुका है। जिले के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर 200 फीट से भी नीचे चला गया है।
रोपाई विधि में प्रति हेक्टेयर खर्च होता है करीब 15 लाख लीटर पानी
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि धान की रोपाई विधि में प्रति हेक्टेयर करीब 15 लाख लीटर अर्थात प्रति एकड़ करीब 6 लाख लीटर पानी खर्च होता है। धान की सीधी बिजाई करने से 35 से 40 प्रतिशत पानी का खर्च कम हो जाता है।
फसल विविधिकरण के लिए लक्ष्य
फसल रकबा
मक्का 500 एकड़
कपास 100 एकड़
दालें 40 एकड़
चारा 2000 एकड़
जिले के किसानों द्वारा धान की फसल पर भी ज्यादा फोकस किया जा रहा है। धान की फसल के कारण भूजल का भी काफी दोहन किया जा रहा है जो चिंता का विषय है। भूजल के घटते स्तर को देखते हुए किसानों को फसल विविधिकरण प्रक्रिया अपनाने अथवा धान की सीधी बिजाई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-डॉ. वीरेंद्र देव आर्य, उपनिदेशक, कृषि विभाग, पानीपत।

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