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कोरोना से बेबस दुकानदार, व्यापार न होने से लाचार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Jun 2021 12:45 AM IST
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कोरोना ने शहर के दुकानदारों की कमर तोड़ने का काम किया है। अधिकतर दुकानदारों का काम चौपट हो चुका है। कहीं 50 प्रतिशत तो कहीं 80 प्रतिशत तक मंदा है। कोरोना की पहली मार से दुकानदार बड़ी मुश्किल ही उबर पाए थे कि कोरोना की दूसरी लहर ने उनके व्यापार को निचोड़ दिया है। अब दुकानदार आर्थिक संकट और मंदे व्यापार के बीच बिलकुल उलझ चुके हैं। कई दुकानदारों ने तो मजबूरी में अपनी दुकानें बंद कर दूसरा रोजगार तक तलाशना शुरू कर दिया है। वहीं, कुछ दुकानदार आज भी इस इंतजार में हैं कि सरकार की तरफ से कोई योजना दुकानदार और व्यापारी वर्ग के लिए लागू होगी जो उन्हें राहत दे सकती है।
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कोरोना काल की वजह से लॉकडाउन के बाद भले ही अनलॉक में शहर के बाजारों को खोलने की अनुमति मिली हो, लेकिन दुकानदारों के दिलों में अभी भी दर्द बरकार है। गर्मी के सीजन के कपड़े, जूते, चप्पल तक लोग सीजन से पहले ही ऑनलाइन मंगवा चुके हैं। दूसरी तरफ त्योहार या शादियों का सीजन भी नहीं है। इससे दुकानदारी न चलने की वजह से आमदनी न होने और ऊपर से दुकानदारों के खर्चे बढ़ने से दुकानदार परेशान हैं। अमर उजाला टीम ने अपने खुले बाजार लेकिन दर्द बरकार के अभियान के चलते एनएफएल के पास विकास नगर वार्ड नंबर 16 के दुकानदारों से बातचीत कर उनके हालात जानें।

सीजन नहीं तो दुकानदारी नहीं : अमित
कोरोना काल के बाद लॉकडाउन होने से दुकान बंद होने की कगार पर है। अब न तो शादियों का सीजन है और न ही त्योहारों का। ऐसे में बाजार में बहुत कम ग्राहक ही आते हैं। इसलिए दुकानदारों को खाली ही बैठे रहना पड़ता है। दुकानों का किराया तक नहीं निकल पा रहा है।
किराएदार दुकानदार ज्यादा परेशान : संजीव
मार्केट में 50 से 60 प्रतिशत तक दुकानदार किराए की दुकानों पर बैठे हैं। कोरोना काल और लॉकडाउन में दुकानें तो बिल्कुल बंद रही। वहीं, किराए तो ऐसे ही भरना पड़ता रहा। जिन दुकानदारों के पास खुद की दुकानें थी, वे कम प्रभावित हुए हैं।
दुकान खर्च तक नहीं निकल रहा : विकास
मार्केट में पहले की मुताबिक काम बहुत कम है। इससे दुकानदार खाली ही बैठे रहते हैं। गर्मी के मौसम में पहले रात को 8 बजे के बाद दुकानदारी होती थी, लेकिन अब दुकानें बंद हो रही हैं। खाने-पीने की चीजों के कच्चे मैटेरियल के रेट से ज्यादा हो गए हैं।
कमाई है नहीं खर्च कहां से उठाएंगे : राजपाल
इस समय हालात बेहद खस्ता हैं। दुकानदार न चल पाने से आमदनी नहीं हो रही और खर्चे बरकरार हैं। इससे दुकानदारों की मुसीबत ज्यादा बढ़ गई है। दुकानदारों का किराया, लेबर यहां तक का खर्चा उठाने में परेशानी आ रही है।
दुकान के खर्च नहीं निकल रहे, घर खर्च की दूर बात : अंकित
फिलहाल की दुकानदारी में तो दुकानों के खर्च तक नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसे में घर खर्च की बात तो की नहीं जा सकती। जिस खरीदार से माल खरीदना होता है और जो माल बेचना होता है सब उधारी में हो रहा है। नकद का काम तो बिल्कुल कम होता जा रहा है।
सरकार को करनी चाहिए मदद : संजय
दुकानदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। व्यापार, दुुकान के काम धंधे बंद होते नजर आ रहे हैं। सरकार को दुकानदारों की मदद करनी चाहिए ताकि जो आर्थिक संकट पड़ा है उसकी भरपाई हो सके। कम से कम कोई तो योजना दुकानदारों के लिए भी होनी चाहिए।

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