Tokyo Olympic 2021: आर्थिक तंगी ने तोड़ा था पिता का सपना, अब वो सपना साकार करने में जुटे पहलवान रवि 

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 23 Jul 2021 11:36 AM IST

सार

नाहरी के मूल निवासी रवि को गांव के संत हंसराज पहलवानी के लिए लेकर गए। गांव के ही अखाड़े में उन्होंने रवि को कुश्ती के  दांव-पेंच सिखाने शुरू किए। कुछ समय बाद दस वर्ष की आयु में ही रवि को छत्रसाल स्टेडियम भेजा गया। उन्होंने वर्ष 2015 में जूनियर रेसलिंग विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता।
पहलवान रवि।
पहलवान रवि। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सोनीपत के प्रतिभाशाली दमदार पहलवान रवि दहिया अपने पिता के स्वप्न को साकार करने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं। टोक्यो ओलंपिक में फ्री-स्टाइल कुश्ती के लिए 57 किलोग्राम भारवर्ग में चुने गए रवि से देश को सफल प्रदर्शन की उम्मीद है। रवि के पिता राकेश कुमार आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण कुश्ती में आगे नहीं बढ़ सके थे, लेकिन अपने बेटे को वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए स्वर्णिम प्रदर्शन करते देखना चाहते हैं। राकेश खुद भी कुश्ती करते थे और आगे बढ़ना चाहते थे लेकिन गुजर-बसर के लिए खेती में जुट गए। अब रवि से ओलंपिक में पदक की पूरी उम्मीद है।
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नाहरी के मूल निवासी रवि को गांव के संत हंसराज पहलवानी के लिए लेकर गए। गांव के ही अखाड़े में उन्होंने रवि को कुश्ती के  दांव-पेंच सिखाने शुरू किए। कुछ समय बाद दस वर्ष की आयु में ही रवि को छत्रसाल स्टेडियम भेजा गया। उन्होंने वर्ष 2015 में जूनियर रेसलिंग विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। घुटने की चोट के कारण 2017 में सीनियर नेशनल गेम्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर भी उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। कुछ समय बाद ही फिट होकर उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया। 2018 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता और 2019 में हुई विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। 



अब रवि के पिता राकेश ने अपने छोटे पुत्र पंकज को भी कुश्ती में उतारा है। वे चाहते हैं कि रवि की भांति पंकज भी नाम कमाए। उन्होंने कहा कि दोनों बेटों को पहलवानी में आगे बढ़ाने के लिए वे खेतों में कड़ी मेहनत करते हैं। उन्होंने कहा कि रवि क्षमतावान पहलवान है, जिसने बहुत जल्द ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। ओलंपिक में चयन ही रवि की प्रतिभा का उदाहरण है। 
     

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