किसान आंदोलन स्थगित: 11 दिसंबर को करेंगे वापसी, 15 जनवरी को समीक्षा बैठक करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 09 Dec 2021 02:49 PM IST

सार

दिल्ली के बॉर्डरों पर चल रहा किसान आंदोलन अब स्थगित कर दिया गया है। इसकी एसकेएम की ओर से औपचारिक घोषणा कर दी गई है। दिल्ली सीमाओं पर शुरू हुए आंदोलन के 378वें दिन पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने बैठक कर कहा है कि 11 तारीख को उनकी आंदोलन से वापसी हो जाएगी। किसानों को सरकार से अधिकृत पत्र मिल गया है। 
किसान आंदोलन के बारे में जानकारी देते गुरनाम चढ़ूनी।
किसान आंदोलन के बारे में जानकारी देते गुरनाम चढ़ूनी। - फोटो : ANI
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विस्तार

सोनीपत में पिछले एक साल से चल रहा किसान आंदोलन स्थगित कर दिया गया है। गुरुवार को आधिकारिक पत्र मिलने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई। इसके बाद गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि 11 दिसंबर को किसानों की वापसी हो जाएगी। 11 को ही विजय दिवस मनाया जाएगा। 13 दिसंबर को किसान श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने जाएंगे। 15 जनवरी को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की समीक्षा बैठक होगी। चढ़ूनी ने एलान किया कि अब किसी भी पार्टी या उद्योग का बहिष्कार नहीं किया जाएगा। किसान आंदोलन में बंद पड़े टोल भी खोल दिए जाएंगे। दिल्ली की सीमाओं पर नेशनल हाईवे और अन्य स्थानों पर चल रहे विभिन्न मोर्चों को हटाने की औपचारिक घोषणा कर दी। साथ ही एसकेएम ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। हमने लड़ाई जीत ली है और किसानों के अधिकारों के लिए एमएसपी पर कानूनी अधिकार को सुरक्षित करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा ।
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वहीं इससे पहले पंजाब की 32 जत्थेबंदियों ने बैठक कर कहा है कि 11 तारीख को उनकी आंदोलन से वापसी हो जाएगी। 15 तक सभी टोल से धरना हटा लिया जाएगा। एसकेएम ने कहा कि संघर्ष की शानदार और ऐतिहासिक जीत वह लखीमपुर खीरी सहित आंदोलन में शहीद हुए करीब 715 किसानों को समर्पित करता है। एसकेएम ने सभी विरोध कर रहे किसानों, नागरिकों व अपने समर्थकों को अभूतपूर्व संघर्ष और आंदोलन की शानदार जीत के लिए आभार जताया। एसकेएम ने कहा कि किसानों ने शपथ ली है कि उनकी एकता, शांति और धैर्य जीत की कुंजी रही है और इसे किसी भी परिस्थिति में खत्म नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही भविष्य में भी सतर्क रहने और वादा सुनिश्चित कराने का सामूहिक निर्णय लिया है।

सीडीएस रावत के निधन के चलते किसानों ने आज नहीं मनाया जश्न, अब 11 को होगा

एसकेएम ने कहा कि देश सीडीएस बिपिन रावत और उनके सहकर्मियों के निधन पर शोक मना रहा है। ऐसे में किसानों की जीत के संबंध में आज सभी समारोह को स्थगित करने का फैसला किया है। जश्न की रैलियां अब 11 दिसंबर को निकाली जाएंगी। उस दिन किसान विजय रैलियां निकाल कर मोर्चा स्थलों को एक साथ छोड़ देंगे। 15 दिसंबर को सभी टोल प्लाजा भी खाली कर दिए जाएंगे। 

अब 15 जनवरी को होगी एसकेएम की अगली बैठक 

एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि एसकेएम की अगली बैठक अब 15 जनवरी, 2022 को दिल्ली में होगी। बैठक में सरकार द्वारा विरोध कर रहे किसानों से की गई प्रतिबद्धताओं की समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा भविष्य की कार्रवाई का खाका तैयार किया जाएगा। समिति सदस्य किसानों की हितों की लड़ाई जारी रखेंगे। 

स्थानीय लोगों से असुविधाओं के लिए मांगी माफी

एसकेएम ने लंबे आंदोलन के दौरान धैर्य और समर्थन के लिए मोर्चा स्थलों के आस-पास के निवासियों का आभार जताया और उनके कारण हुई असुविधाओं के लिए माफी मांगी। इसके अलावा आंदोलन में किसानों के साथ संघर्ष करने वाले श्रम संगठनों, महिला संगठनों और युवा व छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, चिकित्सकों, मानवाधिकार संगठनों, राजमार्ग के ढाबा मालिकों, स्वयंसेवकों, एनआरआई शुभचिंतकों व अन्य वर्गों का भी विशेष धन्यवाद करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से वह जीत प्राप्त कर सके हैं। 

मोर्चा की अहम बैठक के बीच किसानों ने सामान समेटना किया शुरू

किसानों व सरकार के बीच सहमति बनने के बाद कुंडली बॉर्डर पर आज संयुक्त किसान मोर्चा की अहम बैठक चल रही है, जिसमें आंदोलन वापसी का निर्णय लिया जा सकता है। वहीं, बॉर्डर पर सालभर से धरनारत किसानों ने अपना सामान, तंबू व झोंपड़ियां समेटने शुरू कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि वे मोर्चा के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। आदेश मिलते ही यहां से खुशी-खुशी अपने घरों को रवाना होंगे। इससे पहले कुंडली बॉर्डर पर सबसे पहले मोर्चा द्वारा गठित 5 सदस्यीय कमेटी की बैठक हुई। फिर मोर्चा की 9 सदस्यीय कमेटी ने बैठक की और अब संयुक्त किसान मोर्चा के सभी सदस्यों की बैठक शुरू हो चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि आज मोर्चा आंदोलन वापसी या स्थगित किए जाने का निर्णय ले सकता है। 

वापसी की प्रक्रिया में लगेगा समय

किसान मोर्चों से किसानों की वापसी की प्रक्रिया दो-तीन दिन चलने की उम्मीद है। सामान पूरी तरह से समेटने में 24 से 36 घंटे का समय लग सकता है। कई जगह पर पक्के निर्माण भी किसानों ने बना लिए थे, जिन्हें खुद ही गिरा कर जाने का वायदा किसानों ने किया था।

सरकार व किसानों के बीच सकारात्मक दिख रहा माहौल

आखिरकार सरकार के साथ सभी मांगों पर किसानों की सहमति बन ही गई। 5 सदस्यीय कमेटी के गठन के बाद इसका रास्ता बन गया था। सरकार ने लगातार कमेटी से संपर्क बनाए रखा और सभी मांगों के हर बिंदु पर मंथन हुआ। सरकार ने सकारात्मक रवैया दिखाया तो किसानों के तेवर भी नरम पड़ गए। एमएसपी पर कमेटी को लेकर मोर्चा की शर्त को मान लिया गया तो वहीं हरियाणा, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश सरकार ने केस वापस लेने पर सहमति जता दी है। वहीं, सरकार की मांग पर किसानों ने लखीमपुर मामले में केंद्रीय मंत्री की बर्खास्तगी से संबंधित मांग को प्रस्ताव से हटा लिया था।

 सरकार का आधिकारिक पत्र, जिसपर बनी सहमति  

  • 1. एमएसपी पर प्रधानमंत्री ने स्वयं और बाद में कृषि मंत्री ने एक कमेटी बनाने की घोषणा की है। जिस कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह स्पष्ट किया जाता है कि किसान प्रतिनिधियों में एसकेएम के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे और इसमें जरूरी होगा कि सभी किसानों को एमएसपी मिलना किस तरह सुनिश्चित किया जाए। सरकार वार्ता के दौरान पहले भी आश्वासन दे चुकी है कि वर्तमान में जिस राज्य में जिस फसल की एमएसपी पर जितनी सरकारी खरीद हो रही है, उसे घटाया नहीं जाएगा।
  • 2. किसान आंदोलन के समय के केसों पर यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरकार ने तत्काल केस वापस लेने के लिये पूर्णतया सहमति दी है।
  • 2-ए. किसान आंदोलन के दौरान भारत सरकार के संबंधित विभाग और एजेंसियों तथा दिल्ली सहित सभी संघ शासित क्षेत्र में आंदोलनकारियों और समर्थकों पर बनाए गए सभी केस भी तत्काल प्रभाव से वापस लेने की सहमति है। भारत सरकार अन्य राज्यों से अपील करेगी कि इस किसान आंदोलन से संबंधित केसों को अन्य राज्य भी वापस लेने की कार्रवाई करें।
  • 3. मुआवजे पर हरियाणा और यूपी सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
  • उपरोक्त दोनों विषयों के संबंध में पंजाब सरकार ने भी सार्वजनिक घोषणा की है।
  • 4. बिजली बिल में किसान पर असर डालने वाले प्रावधानों पर पहले सभी स्टेकहोल्डर्स/संयुक्त किसान मोर्चा से चर्चा होगी। उससे पहले इसे संसद में पेश नहीं किया जाएगा।
  • 5. पराली के मुद्दे पर भारत सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी धारा में क्रिमिनल लाइबिलिटी से किसानों को मुक्ति दी है।

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