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आंख खुली तो डूबे थे खेत-गांव, खौफजदा थे लोग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Sep 2022 02:00 AM IST
जठलाना क्षेत्र में खेतों में जमा बाढ़ के पानी में डूबी ट्यूबवेल की मोटर को निकालते किसान।
जठलाना क्षेत्र में खेतों में जमा बाढ़ के पानी में डूबी ट्यूबवेल की मोटर को निकालते किसान। - फोटो : Yamuna Nagar
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यमुनानगर। यमुना नदी में आए उफान से जिले के दर्जनभर गांवों में बाढ़ आ गई। यमुना से सटे गांवों के खेतों में कटाव होने लगा। खेतों में खड़ी फसलें यमुना के पानी के साथ बह गई। मंडी गांव के राजकीय स्कूल में तो कई फीट पानी जमा हो गया। गांव की मुख्य सड़क से कई फीट तक पानी बहता रहा। पानी का बहाव इतना तेज था कि किसी ने भी सड़क के आसपास जाने की जहमत नहीं उठाई। पानी आने से स्कूल में रखा सामान खराब हो गया। बाढ़ का पानी घुसने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा। हालांकि जिले में रविवार शाम बारिश रुकने से आमजन के साथ-साथ किसानों ने भी राहत की सांस ली। सोमवार को मौसम पूरी तरह से साफ रहा। तेज धूप निकली। जिले का अधिकतम तापमान 30.1 व न्यूनतम 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल मौसम साफ रहेगा।

यमुना नदी के कैचमेंट एरिया व पहाड़ों में हो रही भारी बारिश के कारण रविवार आधी रात से ही यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने लगा था। सुबह आठ बजे बैराज पर दो लाख 96,912 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। जिससे यमुना नदी में उफान आ गया। शाम 7 बजे बैराज पर यमुना का जलस्तर घटकर 1,47000 क्यूसेक रह गया था। बैराज से छोड़ा गया पानी यमुना नदी से सटे गांव लापरा, मंडी, कैत, महमूदपुर, ईशरपुर, ओदरी, छोटा लापरा, बाकरपुर, कमालपुर, लालछप्पर, बाल छप्पर, संधाला, संधाली, गुमथला, जठलाना, लाल छप्पर, उन्हेड़ी के खेतों में घुस गया। बाकरपुर में अनुसूचित जाति की धर्मशाला तक पानी आ गया था।

सुबह लोग उठे तो खेतों और आबादी में था पानी
रात को लोग रोजमर्रा की तरह घरों में सोये थे। सुबह उठे तो अपने चारों तरफ पानी देखकर हैरान रह गए। लापरा गांव के कई घरों में पानी घुस गया। जिससे घरों में रखा सामान खराब हो गया। हजारों एकड़ फसल पानी में डूबने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि सोमवार दोपहर दो बजे यमुना में जलस्तर दो लाख क्यूसेक ही रह गया था। पानी कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली। धान के खेत तो पानी में दिखाई ही नहीं दिए। किसानों की फसल से लेकर ट्यूबवेल तक पानी में समा गए। गांव लापरा निवासी राकेश, जयपाल व मनोज ने बताया कि यमुना नदी का पानी घुसने से गांव में काफी नुकसान हुआ है। सारी फसलें पानी में डूब गईं।
पानी छोड़ने से पहले चेतावनी दी गई : धर्मपाल
सिंचाई विभाग के एसडीओ धर्मपाल ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज पर जलस्तर बढ़ते ही जिला प्रशासन को सूचना दे दी थी। बैराज से पानी छोड़ने से पहले तीन बार हूटर बजाया जाता है ताकि जो लोग यमुना नदी के आसपास होते हैं उन्हें निकलने का मौका मिल जाए। 70 हजार क्यूसेक पानी आने पर मिनी फ्लड माना जाता है। इसलिए बैराज के सारे गेट खोल देते हैं। ढाई लाख क्यूसेक पानी पर हाई फ्लड माना जाता है।

गांव मंडी के राजकीय स्कूल में जमा बाढ़ का पानी।

गांव मंडी के राजकीय स्कूल में जमा बाढ़ का पानी।- फोटो : Yamuna Nagar

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