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हिमाचल कैबिनेट के बड़े फैसले: 26 मई तक बढ़ा कोरोना कर्फ्यू, सप्ताह में दो दिन खुलेंगी ये दुकानें

हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में शनिवार को अहम निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश में लागू कोरोना कर्फ्यू को 26 मई सुबह 7 बजे तक बढ़ाया गया है। इससे पहले कोरोना कर्फ्यू 17 मई सुबह 6 बजे तक लगाया गया था। कैबिनेट ने फैसला लिया कि सप्ताह में अब तीन घंटे के लिए दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को हार्डवेयर की दुकानें खुली रहेंगी।

अन्य दुकानें पहले की तरह दिन में तीन घंटे के लिए खुली रहेंगी। कैबिनेट ने फैसला लिया कि शहरी क्षेत्रों में जहां पर वन निगम के डिपो हैं, वहां अंतिम संस्कार के लिए प्रदेश सरकार मुफ्त लकड़ी देगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां लकड़ी काटने के अधिकार हैं, उनके अनुसार लकड़ी काटी जा सकेगी। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने प्रेस वार्ता में बताया कि प्रदेश में अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए बेड, ऑक्सीजन और दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि घरों में ऑक्सीजन सिलिंडर को रिफिल करने की स्थिति नहीं है। कैबिनेट ने परौर, सोलन, मंडी और शिमला में बेड कैपेसिटी बढ़ाने की समीक्षा की। नए मेकशिफ्ट अस्पतालों की स्थापना के बारे में भी चर्चा की गई।

अभी ऑक्सीजन की केवल अस्पतालों के लिए ही आपूर्ति की जा रही है। मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश में कोरोना की स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने विस्तार से प्रस्तुति दी।स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में कोरोना के सक्रिय मामलों, वैक्सीनेशन की स्थिति के बारे में बताया। हिमाचल में आक्सीजन का कोटा बढ़ा दिया गया है। प्रदेश में फिलहाल 5 हजार आक्सीजन सिलिंडर की आवश्यकता है।

हिमाचल में पहले 15 मीट्रिक टन, अब 30 मीट्रिक टन कोटा रहेगा। आने वाले समय में 50 से 55 मीट्रिक टन की आवश्यकता रहेगी। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते मेडिकल कालेजों में बेड बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। आक्सीजन की क्षमता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को सर्वे करने के निर्देश भी दिए गए।

महामारी के चलते मंत्रिमंडल ने प्रदेश के लोगों से शादियों को स्थगित करने की अपील की है। अगर स्थगित करने की स्थिति नहीं है तो घर पर 20 लोगों के साथ ही विवाह समारोह होंगे। शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि जो इसकी अनुपालना नहीं करेंगे उन पर डिजास्टर मैनेजमेंट में सख्त कार्रवाई होगी।
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हिमाचल कैबिनेट बैठक हिमाचल कैबिनेट बैठक

एचपीयू शिमला ने कोरोना कर्फ्यू में रखे इंटरव्यू, हिदायत- न आने का बहाना नहीं चलेगा

राज्य में कोरोना कर्फ्यू के बीच हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने सहायक आचार्य और शिक्षकों के पद भरने के लिए रखे इंटरव्यू में शामिल होने को प्रदेश और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को कॉल लेटर जारी कर दिए। साथ में यह भी हिदायत दे दी गई कि इंटरव्यू में न आ पाने का कोई बहाना नहीं चलेगा। गौर हो कि प्रदेश में 17 मई तक कोरोना कर्फ्यू लगा है, जो आगे भी बढ़ सकता है। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी पूर्ण लॉकडाउन है। इसके बावजूद 25 से 28 मई तक की तिथि साक्षात्कार के लिए रख दी गई, जिससे विवि की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। 

इक्डोल कॉमर्स विभाग में सहायक आचार्य के अलावा रेगुलर विभागों में फिजिक्स और अर्थशास्त्र विभाग में शिक्षकों के पद भरने को साक्षात्कार के लिए कॉल लेटर जारी किए हैं। कॉल लेटर में लिखा है कि साक्षात्कार में हाजिर न होने के लिए कोई बहाना/तर्क जैसे बस खराब होना, रेल सुविधा न होना या बीमार होने तक का तर्क विवि को स्वीकार्य नहीं होगा। इक्डोल कॉमर्स विभाग के सहायक आचार्य के पद हेतु 28 मई को 11 बजे तय साक्षात्कार के लिए 6 मई को सहायक कुलसचिव भर्ती शाखा की ओर से कॉल लेटर जारी हुआ है।
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हिमाचल: फिंगर प्रिंट नहीं, राशन कार्ड नंबर से मिलेगा डिपो में राशन

हिमाचल के राशन कार्ड उपभोक्ताओं को अब डिपो में बायोमीट्रिक मशीनों में अंगुली लगाकर (फिंगर प्रिंट) राशन नहीं मिलेगा। कोरोना संक्रमण और राशन की गड़बड़ी रोकने के लिए खाद्य आपूर्ति विभाग ने आवंटन का नया तोड़ निकाला है। उपभोक्ताओं के राशनकार्ड पर जो नंबर होगा, उसे बायोमीट्रिक मशीन में अपलोड किया जाएगा। नंबर अपलोड होने पर उपभोक्ता के मोबाइल पर ओटीपी नंबर आएगा। उपभोक्ता यह ओटीपी डिपो होल्डर को बताएंगे। इस नंबर को मशीन में अपलोड किया जाएगा।

उसके बाद लोगों को राशन आवंटित किया जाएगा। खाद्य आपूर्ति विभाग में इसका ट्रायल चल रहा है।
खाद्य आपूर्ति विभाग के निदेशक आरके गौतम ने बताया कि एक सप्ताह के बाद इस व्यवस्था को शुरू किया जाना है। इस व्यवस्था से हेराफेरी की गुंजाइश नहीं रहेगी। बड़ी बात यह भी है कि व्यक्ति किसी को भी डिपो में सामान लाने भेज सकेंगे। उपभोक्ता को सिर्फ ओटीपी नंबर बताना है। ओटीपी इसलिए, ताकि उपभोक्ता की जानकारी में रहे कि उन्हें कोटा जारी किया जा रहा है। 
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आखिरी स्टेज में अस्पताल पहुंचने पर गई 10 फीसदी कोरोना मरीजों की मौत

हिमाचल प्रदेश में अन्य बीमारी से ग्रस्त 75 फीसदी लोगों की कोरोना से मौत हो रही है। ये लोग पहले से किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त थे। इनमें कैंसर, ब्लड प्रेशर, शुगर, एड्स और हार्ट जैसी बीमारियां शामिल हैं। दस फीसदी ऐसे लोग हैं, जो सर्दी, बुखार समझकर घरों में ही रहे। आखिरी स्टेज में जब ऑक्सीजन लेबल कम हुआ तो अस्पताल आकर उनकी मौत हो गई। कई लोगों की रेफर करते हुए मौत हुई है।

प्रदेश में अब तक कोरोना से करीब 22 सौ लोगों की मौत हो चुकी है। एक महीने पहले यह आंकड़ा करीब 800 था। सरकार की ओर से नियमों में ढील देना, रैलियां, सभाएं, शादी, समारोह के चलते लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं। हालांकि, सरकार का मानना है कि लापरवाही बरतने से मामले बढ़े हैं।

फिर से नियम सख्त किए जाने, लोगों की टेस्टिंग बढ़ाए जाने से घरों में पॉजिटिव लोग बाहर आए हैं। इस महीने के अंत तक स्थिति नियंत्रण में आने की संभावना है। स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने बताया कि अन्य बीमारी से ग्रस्त लोगों के कोरोना की चपेट में आने से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। लापरवाही बरते जाने से भी लोगों की कोरोना से मौत हो रही है। 

कांगड़ा, शिमला जिला में सबसे ज्यादा मौतें 
हिमाचल के दो जिले कांगड़ा और शिमला में इस बीमारी से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। जिला कांगड़ा में 600 से ज्यादा, जिला शिमला में 440 मौतें हुई हैं।
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पुलिस मुख्यालय को सिर्फ महिला अधिकारी को आईसीसी का अध्यक्ष बनाने के निर्देश

कोरोना वायरस-सांकेतिक
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पर एक महिला पुलिस कर्मी की ओर से यौन उत्पीड़न के सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद राज्य महिला आयोग भी हरकत में आ गया है। आयोग ने मामले में आरोपी पुरुष अधिकारी के यौन उत्पीड़न मामलों की जांच करने वाली कमेटी के चेयरमैन बनाए जाने पर हैरानी जताई है।

आयोग की अध्यक्ष डेजी ठाकुर ने छुट्टी के दिन फोन पर आला अधिकारियों से मामले में जानकारी ली और पुलिस मुख्यालय से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सभी कार्यालयों में गठित कमेटी का अध्यक्ष किसी महिला अधिकारी को ही बनाया जाए। अगर उस कार्यालय में महिला अधिकारी नहीं है तो किसी अन्य कार्यालय या विभाग की महिला अधिकारी को अध्यक्ष बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस मामले में एफआईआर दर्ज हो गई है।

एसपी स्तर की एक अधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी अलग से जांच कर रही है। ऐसे में उसकी जांच के बाद आयोग आगे की कार्यवाही तय करेगा। बता दें, एक महिला पुलिस कर्मी ने राजधानी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीर ठाकुर के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और प्रवीर को पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। 

दूसरे दिन भी पुलिस मुख्यालय मौन, आईसीसी ने शुरू की जांच
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मुख्यालय दूसरे दिन भी मौन रहा। मुख्यालय की ओर से कोई जानकारी नहीं दी जा रही है कि आखिर मामले की जांच किसे दी गई है। दरअसल, एसपी शिमला ने शिकायतकर्ता, आरोपी अधिकारी और गवाहों के शिमला जिले में ही तैनात होने का हवाला देते हुए पारदर्शी जांच के लिए मामला सीआईडी को सौंपने की सिफारिश की है।

पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। माना जा रहा है कि चूंकि सीआईडी के पास पहले ही कई गंभीर मामलों की जांच लंबित है। ऐसे में इस मामले को एक जांच कमेटी गठित कर दिया जा सकता है, जिसकी अध्यक्षता किसी महिला पुलिस अधिकारी को सौंपी जा सकती है। फिलहाल, इस मामले में शनिवार को वर्क फ्रॉम होम वाले दिन निर्णय हो सकता है। बता दें मामले में यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए विभाग के स्तर पर गठित इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (आईसीसी) ने जांच शुरू कर दी है।
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विश्लेषण: तिब्बत के नए पीएम पेंपा सेरिंग के सामने तीन बड़ी चुनौतियां

पिछले 60 साल से किसी दूसरे देश में लोकतांत्रिक रूप से चल रही निर्वासित तिब्बत सरकार के नए प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग के सामने तीन बड़ी चुनौतियां होंगी। इनमें चीन सरकार के साथ रुकी हुई बातचीत का सिलसिला शुरू कर तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा की मध्य मार्ग नीति को आगे बढ़ाना और नई बाइडन सरकार सहित यूएन से तिब्बत मुद्दे को जोरशोर से उठाना मुख्य होगा। तिब्बत मुद्दे को लेकर भारत सरकार के नेतृत्व से और गहरा संवाद बनाकर राजनीतिक और कूटनीतिक विश्वास हासिल करना भी सेरिंग के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।

लद्दाख की गलवां घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसा के बाद कई तिब्बती स्वयंसेवी संस्थाएं और युवा तिब्बत की आजादी का मुद्दा लगातार उठा रहे हैं। दलाईलामा की तिब्बत की स्वायत्ता की मांग के बीच अब तिब्बत की आजादी की हवा में सामंजस्य बैठाना भी पेंपा सेरिंग के समक्ष बड़ी चुनौती है। हालांकि, अमेरिका ने पिछले वर्ष अपनी संसद में तिब्बतियन नीति एवं समर्थन अधिनियम 2020 पास कर चीन को बड़ा झटका देकर तिब्बती मुद्दे को बड़ी संजीवनी दी थी। 

चीन सरकार के साथ शुरू करेंगे बातचीत : सेरिंग
निर्वासित तिब्बत सरकार के नए प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि वह धर्मगुरु दलाईलामा की मध्य मार्ग नीति को आगे बढ़ाएंगे। चीन सरकार के साथ रुकी हुई बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाने और धर्मगुरु दलाईलामा की तिब्बत जाने की इच्छा पूरी करने का प्रयास करेंगे। अमेरिका के साथ संवाद और ज्यादा गहरा किया जाएगा। भारतीय लोगों की भावनाएं चीन के विरोध में हैं। वह चाहते हैं कि भारत तिब्बत पर अपनी स्थिति और ज्यादा मजबूत करे। तिब्बत मुद्दे पर भारत के नेताओं के साथ मिलकर व उनकी सलाह लेकर एकजुट होकर काम करेंगे।  

तिब्बत के प्रति रुख में आई है कमी : नायर
तिब्बत मुद्दे पर कई शोध पत्र लिख चुके केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश में पत्रकारिता विभाग के डीन प्रदीप नायर कहते हैं कि अमेरिका के अलावा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रुख में तिब्बत मुद्दे के प्रति कमी आई है। इस पर ध्यान देना होगा। भारत सरकार का उत्साह भी कुछ समय से तिब्बत के प्रति कम हुआ है। नए नेतृत्व को भारत सरकार से राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन लेना होगा। यूएन में तिब्बत मुद्दे को किस तरह उठाया जाता है, यह नए नेतृत्व के समक्ष बड़ी चुनौती है। 

भारत उठाए तिब्बतियों की आवाज : आशिमा
तिब्बत मुद्दे पर स्वतंत्र लेख लिखने वाली अंतर्राष्ट्रीय लेखिका आशिमा कौल कहती हैं कि निर्वासित तिब्बत सरकार के लोकतांत्रिक चुनाव चीन सरकार के मुंह पर तमाचा हैं। लोकतंत्र की इस आवाज से चीन को डरना चाहिए। भारत को तिब्बत के भीतर और निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
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हिमाचल कैबिनेट बैठक: कोरोना कर्फ्यू बढ़ाने पर फैसला आज

कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था देखेंगे विधायक

हिमाचल प्रदेश में कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था स्थानीय विधायक देखेंगे। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधायकों से आग्रह किया कि वे स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर कोरोना से मरने वालों के पारिवारिक सदस्यों के साथ उचित संपर्क बनाएं, ताकि मृतकों का अंतिम संस्कार केंद्र के दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल के तहत हो सके।

इस संबंध में 12 मई, 2021 को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कांगड़ा जिले के रानीताल में कोरोना से मां की मौत होने के बाद एक युवक द्वारा शव कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक अंतिम संस्कार के लिए ले जाने वाला वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है।

मुख्यमंत्री ने विधायकों से मृतक व्यक्ति के परिवार से संपर्क बनाने का आग्रह किया, ताकि मुश्किल घड़ी में उनका मनोबल बढ़े। सीएम ने कहा कि उपायुक्त सुनिश्चित करें कि शोक संतप्त परिजनों को मृतक के अंतिम संस्कार में जिला प्रशासन का पूरा सहयोग और सहायता मिले।

शहरी क्षेत्रों में संबंधित नगर आयुक्त, शहरी स्थानीय निकायों के कार्यकारी अधिकारी और सचिव नोडल अधिकारी होंगे। ये अधिकारी अस्पतालों से समन्वय बनाकर काम करें। ग्रामीण क्षेत्रों में खंड विकास अधिकारी नोडल अफसर होंगे। मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए पीपीई किट, डेड बॉडी बैग, डिस्इंफेक्टेंस, सैनिटाइजर, वेस्ट डिस्पोजेबल बैग आदि संसाधन प्रदान करने चाहिएं।

इसके लिए अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को उपरोक्त सामग्री दी जाएगी। खंड विकास अधिकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, पंचायतों, पंचायत सचिवों और पटवारियों के साथ समन्वय बनाएं। मृतक के परिजनों को संकट में सहायता के लिए शहरी निकायों के अधिकारियों, कार्यकारी अधिकारियों, सचिवों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित पंचायत सचिवों और पटवारियों से संपर्क करना चाहिए।
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