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अपने हक बचाने के लिए गुर्जर समुदाय ने शुरू की भूख हड़ताल

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Sep 2022 12:36 AM IST
नाहन में एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठे गुर्जर समुदाय के पदाधिकारी व अन्य लोग। संवाद
नाहन में एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठे गुर्जर समुदाय के पदाधिकारी व अन्य लोग। संवाद - फोटो : NAHAN
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नाहन (सिरमौर)। गिरिपार के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने के फैसले के बाद जयराम सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस फैसले के विरोध में जहां दलित समुदाय के विभिन्न संगठनों से जुड़े हजारों लोग पहले से ही सरकार के खिलाफ लामबंद हैं, वहीं अब गुर्जर समुदाय के हजारों लोगों ने भी विधानसभा चुनाव से पहले अपने हकों के संरक्षण को लेकर विरोध जताना शुरू कर दिया है।

सोमवार को गिरिपार इलाके के हाटी समुदाय को जनजातीय दर्जा देने, आरक्षण कोटा न बढ़ाने और अधिकारों से छेड़छाड़ के विरोध में गुर्जर कल्याण परिषद जिला सिरमौर के बैनर तले समुदाय के लोग जिला मुख्यालय नाहन में भूख हड़ताल पर बैठ गए।

उपायुक्त कार्यालय परिसर में सरकार को चेताने और अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल पर बैठे समुदाय के लोगों ने दोटूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो वह किसी भी हद तक आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
सिरमौर गुर्जर समाज कल्याण परिषद के अध्यक्ष हंसराज भाटिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने हाटी को जनजातीय दर्जा देकर गुर्जर समाज के अधिकारों का हनन किया है। प्रदेश सरकार भलीभांति जानती है कि गुर्जर एक जाति समुदाय है, जिसे एसटी का दर्जा प्राप्त है और 7.5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है। इस आरक्षण में गिरिपार की अन्य जातियों को भी शामिल कर दिया गया है। जबकि हाटी कोई विशेष जाति नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने गुर्जरों के अधिकारों और अनुसूचित जनजाति आरक्षण कोटे से छेड़छाड़ की है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर पुनर्विचार किया जाए। वरना गुर्जर समाज अपने अधिकारों के लिए जिला व प्रदेश स्तर पर संघर्ष करेगा।
समुदाय ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि हाटी को एसटी में शामिल करने की अपेक्षा अन्य राज्यों की तर्ज पर उन्हें विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) का दर्जा व आरक्षण दिया जाए। अनुसूचित जनजाति (एसटी) में हिमाचल की जो जनजातियां पहले से ही सम्मिलित हैं (जिन्हें 7.5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है) उन्हें यथावत रखा जाए। यदि सरकार चाहती है कि हाटी को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाना चाहिए तो एसटी कोटे को जनसंख्या बढ़ने से 7.5 प्रतिशत से दोगुना किया जाए। इस मौके पर समुदाय के जुड़े दर्जनों लोग मौजूद रहे जो शाम पांच बजे के बाद सभी लोग भूख हड़ताल खत्म कर लौट गए।

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