सीआरपीएफ के 3.25 लाख कर्मी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुख्यालय को दें सकेंगे शिकायतें और सुझाव

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 04 Jun 2020 11:55 AM IST

सार

सोशल डिस्टेंसिंग का सुरक्षा चक्र न टूटे और बलकर्मी संक्रमण से बचे रहें, इसके लिए उन्हें खुद मुख्यालय न आने की सलाह दी गई है। वे शुक्रवार को वीडियो कॉफ्रेंसिंग से अपनी शिकायत या सुझाव दे सकते हैं...
CRPF DG AP Maheshwari
CRPF DG AP Maheshwari - फोटो : CRPF (File)
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विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के सवा तीन लाख अधिकारी और जवान महानिदेशक यानी डीजी के साथ 'मन की बात' करते रहेंगे। कोरोना वायरस के चलते लागू हुई सोशल डिस्टेंसिंग एवं दूसरी बाधाओं के कारण अब मन की बात भले ही बल मुख्यालय में डीजी या आईजी के समकक्ष बैठकर न हो, लेकिन वह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी बात कह सकते हैं।
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किसी अधिकारी या जवान की जो भी शिकायत है, कोई सुझाव है, वह प्रत्येक शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बता सकता है। जैसे ही कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा समाप्त होगा, दोबारा से जवान और अफसर दिल्ली स्थित बल मुख्यालय आकर डीजी या आईजी के सामने अपनी शिकायत रख सकते हैं।


हालांकि इस बीच अनेक जवान और अधिकारी सीधे डीजी डॉ. एपी महेश्वरी के व्हाट्सएप पर भी अपनी बात लिखकर भेज देते हैं। ऐसे मामलों में डीजी तुरंत उनकी शिकायत दूर करने का प्रयास करते हैं।

2012 में टूट गई थी यह परंपरा

सीआरपीएफ के पूर्व डीजी एवं गृह मंत्रालय में मौजूदा वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार ने अपने कार्यकाल के दौरान यह परंपरा शुरू की थी।

वे सप्ताह में एक दिन गुरुवार को बल मुख्यालय परिसर में सभी अधिकारियों, जवानों और पूर्व कर्मियों से मिलते थे।

ये सभी लोग बल परिसर के पार्क में आ जाते थे और डीजी वहीं आकर उनकी शिकायतों का निवारण करते थे। 2012 में उनकी सेवानिवृति के बाद यह परंपरा टूट गई।

डॉ. एपी महेश्वरी ने सभी के लिए खोल दिए हेडक्वार्टर के द्वार

इस साल सीआरपीएफ की कमान संभालने वाले डॉ. एपी महेश्वरी ने यह परंपरा दोबारा से शुरू की है। डॉ. महेश्वरी बताते हैं कि फोर्स में हर स्तर पर सभी की बात सुननी चाहिए।

इतनी बड़ी फोर्स है, ऐसे में किसी को भी शिकायत हो सकती है।

फरवरी से हमने यह व्यवस्था लागू की थी कि सप्ताह में सोमवार से लेकर शुक्रवार तक कोई भी जवान और अफसर डीजी या आईजी से मिल सकता है। इ

सके लिए उसे अपने कमांडेंट या प्राधिकृत अधिकारी को आवेदन देना होगा।

वहां से मंजूरी मिलने के बाद वह बल मुख्यालय आ सकता है। यहां उसे पर्स विभाग में आवेदन जमा कराना होगा। यह काम दोपहर एक बजे से पहले हो जाना चाहिए।

अगर कोई कर्मी एक बजे के बाद वहां पहुंचता है तो उस दिन उसकी मुलाकात संभव नहीं होगी।

इसके लिए उसे अगले दिन का इंतजार करना होगा। प्रतिदिन मुलाकात का समय दोपहर साढ़े 12 बजे से लेकर डेढ़ बजे तक रखा गया है।

डॉ. महेश्वरी कहते हैं कि सीआरपीएफ एक बड़ा परिवार है। यहां सबके बीच तालमेल बहुत जरूरी है।

जवानों को वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है। जवानों और अफसरों को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो, इसलिए सप्ताह में पांच दिन उनसे बात करने का प्लान तैयार किया गया था।

जब उन्हें कोई शिकायत नहीं होगी, तो वे अपनी ड्यूटी बेहतर तरीके से करेंगे।

कोरोना के चलते अब व्यवस्था में थोड़ा बदलाव

महानिदेशक डॉ. एपी महेश्वरी ने बताया कि अब कोरोना संक्रमण की वजह से व्यवस्था में थोड़ा बदलाव किया गया है।

पहले कोई भी कर्मचारी सीधे मुख्यालय आकर अफसर के सामने अपनी बात रख सकता था।

अब सोशल डिस्टेंसिंग का सुरक्षा चक्र न टूटे और बलकर्मी संक्रमण से बचे रहें, इसके लिए उन्हें खुद मुख्यालय न आने की सलाह दी गई है।

वे शुक्रवार को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए अपनी शिकायत या सुझाव दे सकते हैं।

जैसे ही संक्रमण का खतरा समाप्त होगा, वे बल मुख्यालय में अधिकारी के सामने उपस्थित होकर अपनी बात रख सकेंगे।

सीआरपीएफ में किए थे ये बदलाव

डॉ. एपी महेश्वरी ने बल की कमान संभालने के कुछ दिन बाद ही आदेश दिए थे कि देश के लिए अपना बलिदान देने वाले अफसरों और जवानों की पत्नियों को विधवा नहीं कहा जाएगा।

बल मुख्यालय की ओर से होने वाले सभी तरह के पत्राचार में अब विधवा शब्द की जगह पर 'वीर नारी' लिखा रहेगा।

इससे पहले उन्होंने सीआरपीएफ के बल 'मोटो' 'सीआरपीएफ सदा अजय, भारत माता की जय' में भी बदलाव किया था।

डीजी डॉ. एपी महेश्वरी ने कहा था कि 'मोटो' में 'अजय' के स्थान पर 'अजेय' लिखा जाए।' अजेय' का मतलब होता है कि जिसे जीता न जा सके। कोई उस पर विजय प्राप्त नहीं कर सकता।

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