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आईएस-अलकायदा की दहशत: 31 अगस्त के बाद अफगानिस्तान में क्या होगा, कोई नहीं जानता

एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sat, 28 Aug 2021 05:34 AM IST

सार

  • रक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक, अफगानिस्तान में नागरिक संघर्ष के भी आसार
  • खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्ला सालेह पंजशीर घाटी में तालिबान के खिलाफ खड़े हो गए हैं
तालिबान  (फाइल)
तालिबान (फाइल) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

रक्षा विशेषज्ञों ने तालिबानी शासन में इस्लामिक स्टेट (आईएस) और अलकायदा जैसे संगठनों के फिर से संगठित होने की आशंका जताई है। सामरिक विश्लेषक पीके सहगल का कहना है, इसमें शक नहीं है कि आईएस अफगानिस्तान में खुद को बड़े पैमाने पर मजबूत करेगा। अमेरिका को डर है कि ये संगठन न सिर्फ अफगान बल्कि दूसरे देशों में शांति और स्थिरता के लिए भी खतरा बनेगा।

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रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अनिल गौड़ के मुताबिक, अफगानिस्तान में नागरिक संघर्ष के भी आसार हैं। खुद को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्ला सालेह पंजशीर घाटी में तालिबान के खिलाफ खड़े हो गए हैं। 31 अगस्त के बाद कोई नहीं बता सकता कि अफगानिस्तान में क्या होगा। गौड़ का कहना है, भारत ने वहां प्रोजेक्टों पर तीन अरब डॉलर खर्चे हैं, जिन्हें पाकिस्तान ने तालिबान से नष्ट करने को कहा था। हालांकि, तालिबान ने उन्हें अफगानों की संपत्ति बताते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया। 


यूएनएससी में भारत ने कहा, आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ खड़े होना बेहद जरूरी
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हुए आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहा है कि ये हमले आतंकवाद और आतंकवादियों को पनाहगाह मुहैया कराने वालों के खिलाफ विश्व के एकजुट होकर खड़े होने की जरूरत को प्रबल करते हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि एवं सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने काबुल आतंकी हमले के पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।

तालिबानी जीत पर खुशी महंगी पड़ेगी पाकिस्तान को: मारवी
पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और कॉलमकार मारवी सिरमद ने चेतावनी दी है कि तालिबानी जीत का महिमामंडन खुद पाकिस्तान के लिए आपदा की वजह बन सकता है। मारवी ने एक साप्ताहिक में प्रकाशित अपनी टिप्पणी में तंज किया, पड़ोस में गंदगी जमाकर यह नहीं सोच सकते कि आपको उसकी बदबू परेशान नहीं करेगी। तालिबान की जीत में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे पाकिस्तान खुश हो। यह भावी संकट है। उन्होंने पाकिस्तान के हाल पर भी लिखा कि रूढ़िवाद और चरमपंथी विचारधारा ने पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को खतरे में डाल दिया है।

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