Hindi News ›   India News ›   AI 1956 enroute to Delhi from Dushanbe carrying 78 passengers, including 25 Indian nationals, bringing three copies of guru granth sahib with them

अफगानिस्तान: श्री गुरुग्रंथ साहिब की तीन प्रतियां काबुल से भारत पहुंचीं, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुद किया रिसीव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 24 Aug 2021 10:15 AM IST

सार

काबुल में फंसे भारतीय नागरिकों के साथ कुछ अफगान सिख और हिंदू परिवार भी दुशांबे के रास्ते भारत पहुंच चुके हैं। सिख समुदाय के कुछ लोग काबुल गुरुद्वारे से अपने साथ पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की तीन प्रतियां भी साथ लेकर आए हैं।
हरदीप सिंह पुरी ने गुरुग्रंथ साहिब को ग्रहण किया
हरदीप सिंह पुरी ने गुरुग्रंथ साहिब को ग्रहण किया - फोटो : ANI
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विस्तार

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में फंसे भारतीयों को वापस लाने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में मंगलवार को दुशांबे से एयर इंडिया का विमान (AI 1956) 78 लोगों के साथ दिल्ली पहुंच गया। इनमें 25 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इसके अलावा इनके साथ अफगान सिख और हिंदू परिवार भी आए हैं। वहीं सिख समुदाय के कुछ लोग काबुल गुरुद्वारे से अपने साथ पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब की तीन प्रतियां सिर पर रखकर लाए थे, जिसे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन और भाजपा नेता आरपी सिंह ने रिसीव किया और अपने सिर पर रखकर दिल्ली एयरपोर्ट से बाहर लेकर आए।



वहीं इससे पहले सिख समुदाय के लोगों का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वे फ्लाइट के अंदर ही 'जो बोले सो निहाल और वाहे गुरुजी का खालसा-वाहे गुरुजी की फतह' बोलते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने शेयर किया था। जानकारी के अनुसार तालिबान के खौफ के बीच सोमवार को ही 78 लोगों को काबुल से दुशांबे पहुंचाया गया था और आज सभी लोग दिल्ली पहुंच गए हैं।




अफगानिस्तान में संकट की स्थिति
बता दें कि तालिबान के खौफ से उद्योग धंधे और बैंक बंद पड़े हैं। रोजगार खत्म हो रहे हैं। दैनिक उपभोग से जुड़ी वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों से लोग भूखे रहने को मजबूर हैं। लोग देश छोड़कर भाग रहे हैं। कई लोग कहीं नहीं जा सकते। ऐसे लोगों को दो वक्त की रोटी और दवा जुटाना मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि तालिबान को आए हुए सप्ताहभर हुआ है, लेकिन इतने दिनों में ही हालात बद से बदतर हो गए हैं।

परिवार की सुरक्षा और भरण पोषण की चिंता
एक अन्य पूर्व पुलिसकर्मी बताते हैं कि वो जान बचाने के लिए छिपे हैं। 20 हजार रुपये महीने के वेतन की नौकरी भी जा चुकी है। अब परिवार की सुरक्षा और भरण पोषण की चिंता है लेकिन विकल्प नहीं है। मेरे चार बच्चे कई दिन से भूखे हैं।

लोगों का कहना है कि अचानक खाद्य पदार्थों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। आटा, तेल, चावल जैसे खाद्य पदार्थों के साथ दैनिक उपभोग की चीजों की कीमतों में 10 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बैंक बंद होने से लोग जमा पैसा ही नहीं निकाल पा रहे हैं।

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