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Perarivalan Mother: फांसी से यूं ही नहीं बचा पेरारिवलन, 31 साल में मौत की सजा से ऐसे बचा लाई मां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 18 May 2022 09:53 PM IST
सार

जगह-जगह बेटे की रिहाई के लिए आंदोलन चलाने से लेकर बार-बार नेताओं से मिलने तक, अरपुथम अम्माल की इसी मेहनत को पेरारिवलन की रिहाई की वजह माना जा रहा है।

मां अरपुथम अम्मल के साथ पेरारिवलन।
मां अरपुथम अम्मल के साथ पेरारिवलन। - फोटो : PTI
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजीव गांधी की हत्या केस में दोषी पाए गए एजी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया। पेरारिवलन ने जेल से बाहर आने के बाद इस न्यायिक लड़ाई में मदद के लिए अपने वकीलों, सुप्रीम कोर्ट के जजों और कई अन्य लोगों का शुक्रिया अदा किया। साथ ही जेल से बाहर निकालने में अपनी मां अरपुथम अम्मल का विशेष जिक्र किया। पेरारिवलन ने कहा कि मेरी मां ने मेरे लिए 31 साल तक लड़ाई की और बेटे के लिए मां से ज्यादा और कोई नहीं लड़ सकता। 






तमिल में अरपुथम का मतलब होता है चमत्कार। फिलहाल तमिलनाडु और देश में एक मां की अपने बेटे के लिए 31 साल तक चली लड़ाई और मौत की सजा मिलने के बाद उसे रिहा कराने के चमत्कार पर ही बात हो रही है। जगह-जगह बेटे की रिहाई के लिए आंदोलन चलाने से लेकर बार-बार नेताओं से मिलने तक, अरपुथम अम्माल की इसी मेहनत को पेरारिवलन की रिहाई की वजह माना जा रहा है। लेकिन पेरारिवलन का कहना है कि वे मां के जीवन से इतने वर्षों का जीवन छीने जाने के लिए खुद को अपराधबोध से ग्रस्त महसूस करते रहे हैं। 

बेटे को बचाने के लिए तीन दशकों तक कैसे लड़ीं अरपुथम?
पिछले तीन दशकों में अरपुथम ने तमिलनाडु में कई बड़े नेताओं से मुलाकात की। इनमें तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जे जयललिता से लेकर ई पलानिस्वामी, मौजूदा सीएम एमके स्टालिन और कई क्षेत्रीय पार्टियों के प्रमुख शामिल रहे। इसके अलावा अरपुथम ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलकर अपने बेटे की रिहाई की मांग की। 

यहां तक कि सोशल मीडिया पर अरपुथम ने कई बार पेरारिवलन की रिहाई के लिए ट्रेंड्स वायरल कराए। उनके अलावा वीसीके पार्टी के प्रमुख थोल थिरुमावलावन ने भी राष्ट्रपति से पेरारिवलन की रिहाई की मांग की। एक समय #ReleasePerarivalan और #StandWithArputhanAmmal भी ट्विटर पर लंबे समय तक ट्रेंड हुआ। अरपुथम की ट्विटर प्रोफाइल पर लिखा था- "एक मासूम लड़के की मां, जिसे वर्षों पहले उससे छीन लिया गया। वह तब 19 साल का था। मैंने उसके पीछे दौड़ना शुरू कर दिया था और अब भी दौड़ रहा हूं।"

कोर्ट में कैसे चली अरपुथम की लड़ाई?
अरपुथम ने 1998 में टाडा कोर्ट की तरफ से पेरारिवलन को मौत की सजा मिलने के बाद लड़ाई शुरू की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में टाडा कोर्ट का फैसला बरकरार रखा। साल 2001 में मौत की सजा पाए पेरारिवलन और दो अन्य दोषियों ने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दाखिल की, जिसे 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने रद्द कर दिया। 

पेरारिवलन को 9 सितंबर 2011 को फांसी दी जानी थी। हालांकि, तभी मद्रास हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी। अरपुथम की तरफ से बेटे को बचाने की कोशिश रंग लाने लगीं और तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर मौत की सजा को बदलने की मांग उठा दी। 

फरवरी 2013 में जस्टिस केटी थॉमस, जिन्होंने 1999 में पेरारिवलन की मौत की सजा बरकरार रखने का फैसला दिया था, उन्होंने भी 23 साल बाद सजा दिए जाने को असंवैधानिक करार दिया। इसके बाद 1991 में पेरारिवलन का बयान दर्ज करने वाले सीबीआई अफसर ने भी कबूल किया कि उन्होंने पेरारिवलन के कथन के साथ छेड़छाड़ की थी। आखिरकार 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन और अन्य आरोपियों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। 

2017 में तमिलनाडु सरकार ने पेरारिवलन को पेरोल पर जेल से बाहर किया। यह 1991 के बाद जेल से उसके पहली बार बाहर आने का मामला था। मई 2021 में भी उसे पैरोल पर छोड़ा गया और सरकार ने उसकी पैरोल की अवधि बढ़ाना जारी रखा। इसी साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने पहले उसे जमानत दी और आज 31 साल बाद कोर्ट ने उसे जेल से रिहा कर दिया। 

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