1964 में हुई थी अनुच्छेद 370 को हटाने की कोशिश, जानिए क्या हुआ था उस वक्त

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 10 Aug 2019 02:48 PM IST
अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग 1964 में भी उठी थी
अनुच्छेद 370 को हटाने की मांग 1964 में भी उठी थी - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने की कोशिश साल 1964 में भी की गई थी। उस दौरान लोकसभा में एक बिल लाया गया था जिसमें अनुच्छेद 370 को हटाने का अनुरोध किया गया था।  इस बिल का कांग्रेस के कई सदस्यों ने समर्थन किया था जिन्होंने विपक्ष के सदस्यों से निवेदन किया था कि राज्य के भविष्य को लेकर जारी अनिश्चितता को समाप्त करने का समय आ गया है और इसके लिए अनुच्छेद 370 को रद्द करना चाहिए।
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12 सितंबर 1964 को लोकसभा में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए एक प्राइवेट मेंबर बिल लाया गया था। जिसपर चर्चा के दौरान भारत के साथ कश्मीर के पूर्ण एकीकरण की मांग की गई थी। प्रकाशवीर शास्त्री उत्तर प्रदेश के बिजनौर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।


उन्होंने अनुच्छेद 370 पर संविधान संशोधन बिल पेश किया था। उनके भाषण के पहले शब्द थे, जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति से संबधित भारतीय संविधान की धारा 370 हटा दी जाए।' प्रकाशवीर सहित कुल 12 सदस्यों ने बहस में हिस्सा लिया जिसमें जम्मू-कश्मीर से भी 3 सदस्य शामिल थे।


 
जिन नेताओं ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने की मांग का समर्थन किया था उनमें राम मनोहर लोहिया, कांग्रेस की सरोजिनी महीषी और कश्मीरी नेता अब्दुल घनी गोनी और एनएच समनानी भी शामिल थे। अनुच्छेद 370 हटाने की दलील में लोहिया ने कहा था कि प्रधानमंत्री को कश्मीर के भविष्य के बारे में जनता के मन में अनिश्चितता नहीं पैदा करनी चाहिए।

उन्होंने कहा था, 'यह एक ऐसे तूफान को जन्म देगा जिसका सामने करने की आपकी हिम्मत नहीं होगी।' जनसंघ के एचसी कचवाई ने 21 नवंबर 1964 को विशेष राज्य के दर्जे की निंदा करते हुए कश्मीर के भविष्य पर जारी अनिश्चितता को दूर करने और अनुच्छेद को तुरंत निरस्त करने का अनुरोध किया था।

जम्मू-कश्मीर में अमुच्छेद 370 हटने के बाद के हालात
जम्मू-कश्मीर में अमुच्छेद 370 हटने के बाद के हालात - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस के एसएस मोर ने संविधान में संशोधन विधेयक पर सर्वसम्मति से समर्थन किए जाने का अनुरोध करते हुए कहा था कि यहां ऐसा कोई कारण नहीं है जिसकी वजह से कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए जो देश में इसके पूर्ण एकीकरण के रास्ते में आ रहा है।

उन्होंने कहा, 'जैसे महाराष्ट्र है, वैसे ही जम्मू है। हमारे इन फैसलों के बावजूद सवाल यह है कि आजतक क्यों है दफा 370? किसलिए हैं अनुच्छेद 370?......हमने कभी नहीं चाहा कि हम अनुच्छेद 370 को कायम रखना चाहते हैं।'

नवंबर में विधेयक पर लोकसभा में काफी बहस हुई लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। वहीं छह अगस्त 2019 को लोकसभा ने अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया। इसके पक्ष में 351 और विपक्ष में 72 वोट पड़े।
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