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2019 में ब्रिटेन को पछाड़ पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा भारत- जेटली

एजेंसी, नई दिल्ली  Updated Fri, 31 Aug 2018 05:07 AM IST
finance minister arun jaitley (File Photo)
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि भारत बढ़ते उपभोग व आर्थिक गतिविधियों में तेजी के दम पर ब्रिटेन को पछाड़कर अगले साल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।उन्होंने विश्वास जताया कि अगले 10-20 वर्षों में भारत दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शुमार होगा।
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भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के कार्यालय की इमारत के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने कहा कि इस साल अर्थव्यवस्था के आकार के आधार पर हमने फ्रांस को पछाड़ दिया। अगले साल हम ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ सकते हैं। जिसके साथ ही हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे। 


2017 के अंत में 2.597 लाख करोड़ डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ भारत ने फ्रांस को पछाड़ दिया, पिछले साल फ्रांस का जीडीपी 2.582 लाख करोड़ डॉलर का रहा था। प्रति व्यक्ति जीडीपी के आधार पर हालांकि फ्रांस से काफी पीछे है। यह भारत की तुलना में 20 गुना बड़ा है। इसका कारण यह है कि भारत 134 करोड़ की विशाल आबादी वाला देश है, जबकि फ्रांस की आबादी मात्र 6.7 करोड़ है।

साल 2017 के अंत में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था 2.94 लाख करोड़ डॉलर की रही थी। वित्त वर्ष 2017-18 में भारत की जीडीपी विकास दर 6.7 फीसदी रही, जो औद्योगिक गतिविधियों में तेजी व अच्छे मानसून के कारण चालू वित्त वर्ष में 7.4 फीसदी पर रहने की उम्मीद है। 

नोटबंदी से बढ़ी आयकर भरने वालों की संख्या: जेटली 

वित्त मंत्री अरुण जेटली मानते हैं कि 500 और 1000 रुपये के बड़े नोटों का चलन बंद किए जाने से अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी, कर संग्रह बढ़ा और कालेधन पर बड़ी मार पड़ी। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद के दो वर्षों में कर संग्रह क्रमश: 15 और 18 फीसदी बढ़ा। उनका यह बयान आरबीआई की ओर से लगभग सभी पुराने नोट वापस आने का खुलासा किए जाने के एक दिन बाद ही आया है। 
 
वित्त मंत्री ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘एक व्यापक धारणा है कि चूंकि ज्यादातर पुराने नोट वापस आ गए हैं, इसलिए नोटबंदी का उद्देश्य सफल नहीं हो पाया। तो क्या नोटबंदी का एकमात्र मकसद जमा नहीं कराए गए बड़े नोटों को अवैध ठहराना ही था, निश्चित तौर पर नहीं।

नोटबंदी का इससे बड़ा मकसद देश को कर अदायगी के प्रति जिम्मेदार समाज में बदलना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और कालेधन पर चोट करना था। नोटबंदी से पहले के दो वर्षों में कर संग्रह वृद्धि क्रमश: 6.6 फीसदी और 9 फीसदी थी।’ 

उन्होंने कहा कि मार्च 2014 में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 3.8 करोड़ थी जबकि 2017-18 में यह संख्या बढ़कर 6.86 करोड़ हो गई। नोटबंदी का ही असर था कि इसके बाद पहले वर्ष में आईटी रिटर्न 19 फीसदी और दूसरे वर्ष में 25 फीसदी बढ़ा। 
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