आजादी का अमृत महोत्सव : नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जन्मस्थली में सहेजी गई विरासत, पढ़ें विशेष रिपोर्ट

nitin yadav नितिन यादव
Updated Sun, 24 Oct 2021 06:32 AM IST

सार

आजादी के अमृत महोत्सव के समय हम पीछे मुड़कर देखें कि देश को बनाने में जिन्होंने अपना जीवन दे दिया उनकी विरासत को हमने कितना सहेजा है? उनकी स्मृतियों से हम कितनी शक्ति लेते हैं? इस महत्वपूर्ण अभियान के तहत अमर उजाला ने अपने प्रतिनिधियों को देशभर में भेजा। पिछली कड़ियों में आपने पटेल और नेहरू के जन्मस्थान से रिपोर्ट पढ़ी, इस बार नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जन्मस्थली...
नेताजी सुभाषचंद्र बोस
नेताजी सुभाषचंद्र बोस - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

नेताजी ने आजादी की लड़ाई को नए आयाम पर पहुंचाया और विदेशी सरजमीं पर दुनिया की दूसरी ताकतों के साथ मिलकर अंग्रेजों को चुनौती दी... महानदी के किनारे पर बसे कटक में जब आप उड़िया बाजार की ओर चलते हैं तो यह सोचना भर ही रोमांचक है कि आजादी की लड़ाई के महान योद्धा की जन्मभूमि से आप रूबरू होंगे...
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जेल से लेकर रेडियो रुम तक
आजादी की लड़ाई में उनके हर जेल प्रवास की पूरी कहानी संग्रहालय में दर्शाई गई है। एक ब्लॉक को जेल की तरह बनाया भी गया है। बताया गया है कि 17 जनवरी 1941 की सुबह लगभग डेढ़ बजे सुभाष चंद्र बोस मुस्लिम वेशभूषा में घर से निकल गए थे। अंग्रेजों को भनक तक नहीं लगी थी। उनके भतीजे ने उन्हें गाड़ी से छोड़ा और वह लंबी यात्रा करते हुए काबुल तक पहुंच गए। वह अपने साथ बस भगवद् गीता और मां काली की एक तस्वीर ले गए थे।


आजाद हिंद फौज की सरकार के गठन के साथ ही आजाद हिंद बैंक की भी स्थापना की गई थी। उस दौर में 50 लाख की पूंजी के साथ इसे खोला गया। बैंक के सुचारू संचालन के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। मदद करने वाले लोगों को सेवक-ए-हिंद कहा जाता था।

नवंबर 1943 में नेताजी ने आजाद हिंद की औपनिवेशिक सरकार के लिए राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान तय करने के लिए एक उपसमिति का गठन किया। इस समिति ने तय किया कि बिना चक्र के तिरंगा ही राष्ट्रीय ध्वज के तौर पर मान्य होगा। एक मुस्लिम युवा हुसैन की लिखी पंक्तियों को राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया। पंक्तियों से नेताजी इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने हुसैन को दस हजार डॉलर इनाम दिया।

दुनिया की पहली महिला रेजिमेंट
आजाद हिंद फौज की महिला रेजिमेंट के तौर पर झांसी की रानी रेजिमेंट का गठन किया गया था। यह दुनिया की पहली महिला रेजिमेंट थी। संग्रहालय में नेताजी के साथ रेजिमेंट की यूनिफॉर्म भी यहां पर सहेज कर रखी गई है। रेजिमेंट के प्रशिक्षण और उससे जुड़े अन्य कर्ताधर्ताओं के बारे में भी इस संग्रहालय में फोटो के माध्यम से बताया गया है।
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