मुहिम: आठ अगस्त से चलेगा भारत जोड़ो आंदोलन, 222 अंग्रेजी कानून खत्म कराना है मकसद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Sat, 07 Aug 2021 07:50 PM IST

सार

भारत जोड़ो अभियान के संयोजक अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि देश से जब तक 222 अंग्रेजी कानून खत्म नहीं होंगे, तब तक जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, अलगाववाद और राजनीति का अपराधीकरण कम नहीं होगा। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

देश को आजाद हुए 75 साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन अब भी अंग्रेजों के जमाने के 222 कानून भारत में लागू हैं। इन कानूनों को खत्म करने के मकसद से एक अभियान शुरू किया जा रहा है, जिसका नाम भारत जोड़ो आंदोलन रखा गया है। यह मुहिम भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ यानी आठ अगस्त से शुरू की जाएगी और 222 अंग्रेजी कानूनों को खत्म कराने तक लागू रहेगी। 
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यह है मुहिम का मकसद
भारत जोड़ो अभियान के संयोजक अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि देश से जब तक 222 अंग्रेजी कानून खत्म नहीं होंगे, तब तक जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, अलगाववाद, कट्टरवाद, मजहबी उन्माद, माओवाद, नक्सलवा, तुष्टीकरण और राजनीति का अपराधीकरण कम नहीं होगा। न ही चोरी, लूट, झपटमारी, घूसखोरी, जमाखोरी, मिलावटखोरी, कालाबाजारी, कमीशनखोरी मुनाफाखोरी, मानव तस्करी, नशा तस्करी, चंदन तस्करी, हवाला कारोबार, कालाधन और बेनामी संपत्ति के मामले घटेंगे। 


कार्यक्रम में शामिल होंगे ये लोग
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और पीआईएल मैन के नाम से प्रसिद्ध अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि इस मुहिम में हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज न्यायाधीश वीके शुक्ला और जस्टिस सखाराम यादव, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डॉक्टर आनंद कुमार और विक्रम सिंह, वरिष्ठ नौकरशाह आरवीएस मणि, संजय दीक्षित, मेजर जनरल एसपी सिन्हा, लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, सामाजिक कार्यकर्ता भाई प्रीत सिंह, अनिल चौधरी, आध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, महंत सुरेंद्र नाथ, स्वामी यतींद्रानंद गिरी और महाभारत में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले गजेंद्र चौहान शामिल होंगे। 

इन कानूनों को हटाना है मकसद
इस मुहिम का मकसद 1860 में बने इंडियन पीनल कोड, 1861 में बने पुलिस एक्ट, 1863 में बने रिलिजियस एंडोमेंट एक्ट और 1872 में बने एविडेंस एक्ट समेत सभी 222 अंग्रेजी कानूनों को खत्म कराना है। इसके अलावा भारत में समान शिक्षा, समान चिकित्सा, समान कर संहिता, समान दंड संहिता, समान श्रम संहिता, समान पुलिस संहिता, समान न्यायिक संहिता आदि लागू कराना है। 

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