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E-Vaccine: बॉयोलॉजिकल ई वैक्सीन को बच्चों पर परीक्षण करने की नहीं मिली अनुमति

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 31 Jul 2021 06:03 AM IST

सार

कंपनी को उम्मीद है कि यह परीक्षण पूरा होने के बाद 21 सितंबर तक उसे आपात इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है। इसलिए कंपनी ने 30 करोड़ खुराकें उपलब्ध कराने की जानकारी भी सरकार को दी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार

बच्चों पर कोरोना वैक्सीन के परीक्षण के लिए सरकार ने फार्मा कंपनी बॉयोलॉजिक ई का आवेदन रद्द कर दिया है। कंपनी ने हाल ही में स्वदेशी वैक्सीन का परीक्षण 18 साल से कम आयु वालों पर भी करने के लिए अनुमति मांगी थी लेकिन बीते बृहस्पतिवार को हुई विशेषज्ञ कार्य समिति (एसईसी) की बैठक में इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। कंपनी ने आवेदन के साथ पहले और दूसरे परीक्षण परिणाम भी साझा किए थे।
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समिति के सदस्य ने बताया कि समीक्षा के दौरान परीक्षण परिणाम पूरे नहीं मिले हैं जिसके आधार पर वैक्सीन की सुरक्षा और प्रतिरक्षा क्षमता के बारे में अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। इसलिए फिलहाल इस वैक्सीन पर बच्चों में परीक्षण की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कंपनी से और दस्तावेज जमा करने के लिए कहा है।


दरअसल बायोलॉजिकल ई कंपनी ने कॉर्बेवैक्स वैक्सीन बनाई है जिस पर फिलहाल तीसरे चरण का परीक्षण चल रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि यह परीक्षण पूरा होने के बाद 21 सितंबर तक उसे आपात इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है। इसलिए कंपनी ने 30 करोड़ खुराकें उपलब्ध कराने की जानकारी भी सरकार को दी है। 

इसी कंपनी को पिछले महीने सरकार ने 1500 करोड़ रुपये का एडवांस भुगतान भी किया है। अभी तक यह परीक्षण 18 साल या उससे अधिक आयु वालों पर चल रहा है लेकिन कंपनी का मानना है कि पहले दो परीक्षण परिणाम संतोषजनक मिलने के आधार पर बच्चों में भी इसका परीक्षण किया जा सकता है ताकि जब वैक्सीन को मान्यता मिले तो इसे हर वर्ग के लिए उपलब्ध कराया जा सके। फिलहाल तीसरे चरण के तहत देश के 15 अस्पतालों में 1,268 लोगों पर परीक्षण चल रहा है।

जॉनसन एंड जॉनसन के आवेदन पर फैसला नहीं
समिति से मिली जानकारी के अनुसार जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने एकल खुराक वाली वैक्सीन का भारत में परीक्षण करने की अनुमति मांगी है जिस पर फैसला नहीं हो पाया है। अगली बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी। फिलहाल कंपनी से समिति ने दूसरे देशों में हुए परीक्षण से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। समिति के अनुसार अन्य परीक्षणों के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि वैक्सीन सुरक्षित है अथवा नहीं।

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