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Winter Session: भाजपा सांसद का UCC संबंधी निजी विधेयक राज्यसभा में पेश; धनखड़ ने सदस्यों की दी सख्त हिदायत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 09 Dec 2022 06:16 PM IST
सार

शुक्रवार को राज्यसभा में गैर सरकारी कामकाज शुरू होने पर सबसे पहले भाजपा के किरोड़ीमल मीणा ने भारत में एकसमान नागरिक संहिता विधेयक, 2020 पेश किया।

राज्यसभा
राज्यसभा - फोटो : संसद टीवी

विस्तार

केंद्र सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि इस बार के संसद सत्र में वह समान नागरिक संहिता संबंधी निजी विधेयक पेश करेगी। इसी के साथ शुक्रवार को राज्यसभा में समान नागरिक संहिता के संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सदस्य द्वारा लाए गए निजी विधेयक को विपक्ष के भारी विरोध के बीच पेश किया गया। उच्च सदन ने 23 के मुकाबले 63 मतों से निजी विधेयक को पेश करने की अनुमति दी।



शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद राज्यसभा में गैर सरकारी कामकाज शुरू होने पर सबसे पहले भाजपा के किरोड़ीमल मीणा ने भारत में एकसमान नागरिक संहिता विधेयक, 2020 पेश किया। एमडीएमके के वाइको सहित विभिन्न विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक को संविधान विरूद्ध करार देते हुए सभापति जगदीप धनखड़ से इसे सदन में पेश करने की अनुमति नहीं देने का अनुरोध किया।


इन सासंदों ने विधेयक का विरोध किया
सभापति ने मीणा को इस विधेयक के बारे में बोलने का अवसर दिया। लेकिन भाजपा सदस्य ने कहा कि जब इस विधेयक को सदन में चर्चा के लिए लिया जाएगा, तब वह अपनी बात रखेंगे। इसके बाद सभापति ने विपक्षी सदस्यों को एक-एक कर अपनी बात रखने का मौका दिया। वाइको, समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव, आईयूएमएल के अब्दुल वहाब, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के इलामरम करीम, वी शिवदासन, डॉ जान ब्रिटास, ए ए रहीम, विकास रंजन भट्टाचार्य, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संतोष कुमार पी, द्रमुक के तिरुचि शिवा, कांग्रेस के एल हनुमंथैया, जे बी हीशम एवं इमरान प्रतापगढ़ी, तृणमूल के जवाहर सरकार, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की फौजिया खान ने इस विधेयक का विरोध किया।

विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक को संविधान के विरूद्ध बताते हुए कहा कि इससे देश की विविधता की संस्कृति को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि इससे देश के सामाजिक तानेबाने को क्षति पहुंचने की आशंका है। उन्होंने भाजपा सदस्य मीणा से यह विधेयक वापस लेने का अनुरोध किया। कुछ विपक्षी सदस्यों का कहना था कि इस प्रकार के कानून को देश की न्यायपालिका द्वारा खारिज कर दिया जाएगा।

सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि डॉ भीमराव आंबेडकर सहित संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता के विषय को नीति निर्देशक सिद्धान्तों में रखा था। उन्होंने कहा कि सदन के हर सदस्य को संविधान से जुड़े विषय पर विधेयक लाने का अधिकार है और उसके इस अधिकार पर प्रश्न नहीं खड़ा किया जा सकता।

बाद में इस विधेयक पर विपक्षी सदस्यों की मांग पर मत विभाजन करवाया गया। मत विभाजन में सदन ने 23 के मुकाबले 63 मतों से इस विधेयक को पेश करने की अनुमति प्रदान कर दी। मीणा द्वारा पेश निजी विधेयक में संपूर्ण भारत के लिए एकसमान नागरिक संहिता तैयार करने और इसके क्रियान्वयन के लिए एक राष्ट्रीय निरीक्षण और जांच समिति गठित करने का प्रावधान है।
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सांसद मुद्दों को उठाने से पहले निजी अध्ययनों व आंकड़ों का विश्लेषण करें
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को सदस्यों से आग्रह किया कि वे किसी भी मुद्दे को उठाने के क्रम में निजी अध्ययनों या आंकड़ों का उल्लेख करने से पहले उनका विश्लेषण करें। उन्होंने कहा कि इस तरह के अध्ययन अपर्याप्त आंकड़ों पर आधारित हो सकते हैं या दूसरों के हितों से प्रभावित हो सकते हैं।

धनखड़ ने यह टिप्पणी उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान की जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2022 में भारत की 107वीं रैंकिंग को लेकर एक पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। केसी (एम) सदस्य जोस के मणि ने कहा कि 121 देशों की सूची में भारत 107वें नंबर पर है। उन्होंने कहा कि नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देश भी सूचकांक में भारत से आगे हैं।

गोयल ने कहा कि हमने एक तरह से देश से भुखमरी को खत्म कर दिया है। हर एक राज्य ने लिखा है कि पिछले दो साल के दौरान उनके यहां भुखमरी से कोई मौत नहीं हुई। उन्होंने कहा कि भूख सूचकांक कुछ निजी व गैर सरकारी संगठनों द्वारा बनाया गया निजी सूचकांक है जो भूख से संबंधित विषय पर आधारित नहीं है।

उन्होंने इस क्रम में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) का जिक्र किया जिसके तहत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की सीमा के अलावा पांच किलोग्राम अनाज प्रदान किया। गोयल ने निष्कर्ष ऐसे आंकड़े से निकाले गए हैं जो असत्यापित हैं और ऐसे माप पर भी आधारित हैं जो भारत से संबंधित नहीं हैं। मुझे लगता है कि हमें यह समझना चाहिए कि क्या आधिकारिक और मान्य है और क्या केवल प्रचार के लिए है।

सभापति धनखड़ ने कहा कि यह गरिमामय सदन 1.3 अरब से अधिक लोगों के ज्ञान का भंडार है। इसलिए जब हम सदन में कोई मुद्दा उठाते हैं। आइए, हम अपने मूल्यों पर विश्वास करें। उन्होंने कहा कि यह मुश्किल और अनुचित होगा कि हम अपने आकलनों, उपलब्धियों का मूल्यांकन उन लोगों के लिए छोड़ दें जिनके पास या तो अपर्याप्त आंकड़े हैं या जिनके कार्य हमारे नहीं बल्कि उनके हितों से निर्धारित होते हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश को उन आकलन से आहत होने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिस पर हमें विश्वास नहीं है...। इसका मतलब यह नहीं है कि बाहर के आकलन की विश्वसनीयता नहीं है।

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