CDS Bipin Rawat: सीडीएस की भूमिका क्या थी, उनकी यात्रा में क्या प्रोटोकॉल फॉलो किया जाता था?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली, Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Wed, 08 Dec 2021 05:02 PM IST

सार

सीडीएस पद पर जनरल रावत की नियुक्ति की खबर आते ही ट्विटर पर शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई थी। सीडीएस को किसी कमांड के लिए कोई भूमिका नहीं निभानी थी। वे रक्षा संपदा परिषद और रक्षा प्लानिंग कमेटी के सदस्य थे।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भारतीय वायु सेना का एमआई-17V5 हेलीकॉप्टर बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर में क्रैश होने से सीडीएस बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत सभी 14 लोगों की मौत हो गई। वायु सेना ने सभी के मौत की पुष्टि की है। वायु सेना ने हादसे का कारण जानने के लिए जांच के आदेश दिए हैं। इस हादसे को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रावत की बेटी से मुलाकात की थी। रक्षा मंत्री इस बारे में गुरुवार को  संसद में बयान देंगे। 
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विपिन रावत ने एक जनवरी 2020 को सीडीएस का पदभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल तीन साल का था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को को लाल किले की प्राचीर से देश की तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तरीके से तालमेल बिठाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीए के पद के गठन की घोषणा की थी।  


इस पद की क्यों जरूरत पड़ी 
1999 में हुए करगिल युद्ध के बाद जब 2001 में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स  ने जब इसकी समीक्षा की तो तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल की कमी देखी गई। इस समिति की अध्यक्षता तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी कर रहे थे। उसी वक्त सीडीएस का पद बनाने का सुझाव दिया गया लेकिन राजनीतिक असमहति के कारण ऐसा नहीं हो पाया।
 

पिछले साल हुई कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान सीडीएस जनरल बिपिन रावत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे। (बाएं से दाएं)
पिछले साल हुई कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान सीडीएस जनरल बिपिन रावत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे। (बाएं से दाएं) - फोटो : Social Media
क्या थी बिपिन रावत की शक्तियां और उनकी भूमिका

रावत बतौर सीडीएस रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के बीच समन्वयक की भूमिका निभा रहे थेष

सैन्य मामलों के नव निर्मित विभाग डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (डीएमए) के प्रमुख थे। 

वे रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे थे। 

उनका किसी सैन्य कमांड पर कोई नियंत्रण नहीं था और वे सीधे किसी सेना को कोई आदेश नहीं दे सकते थे।

सीडीएस की भूमिका सशस्त्र सेनाओं के ऑपरेशंस में आपसी समन्वय और उसके लिए वित्त प्रबंधन की थी।

सीडीएस ही तीनों सेनाओं के प्रमुखों की कमेटी के स्थायी अध्यक्ष होते हैं। तीनों सेनाओं के संयुक्त संगठनों के प्रशासक वे ही थे। 

सेनाओं के लिए हथियारों की खरीद, प्रशिक्षण और स्टॉफ की नियुक्ति की प्रक्रिया में तालमेल बिठाते थे। सैन्य कमानों के पुनर्गठन और थिएटर कमानों के गठन में भी उनकी भूमिका थे।

 

जनरल बिपिन रावत 2015 में नगालैंड में हुए एक हेलिकॉप्टर क्रैश में बाल-बाल बच गए थे।
जनरल बिपिन रावत 2015 में नगालैंड में हुए एक हेलिकॉप्टर क्रैश में बाल-बाल बच गए थे। - फोटो : Amar Ujala
उनकी यात्रा में किस तरह के प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है

भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारियों के मुताबिक वे भारतीय सेना के सबसे बड़े सुरक्षा अधिकारी थे। उनके लिए बहुत सख्त प्रोटोकॉल का पालन किया जाता था। 

वे कहीं भी जाते थे तो इसकी सूचना पहले रक्षा मंत्रालय को दी जाती है। 

सीडीएस की यात्रा के मामले में भी पीएमओ को भी सूचना दी जा सकती है। 

जब कोई भी वीवीआईपी जैसे पीएम, रक्षा मंत्री या सीडीएस हेलिकॉप्टर से यात्रा करते हैं तो वायुसेना सुरक्षा के मापदंडों का कड़ाई से पालन किया जाता है।

चॉपर से आधिकारिक यात्रा पर जाते पर उनके साथ दो पायलट और स्टाफ ऑफिसर्स होते हैं। कई विशेष प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। 

सबसे अनुभवी पायलटों को इन हेलीकॉप्टर को उडाने का मौका दिया जाता है। क्रू के चयन का भी ध्यान रखा जाता है।  

हेलीकॉप्टर पर बैठने से पहले सुरक्षाकर्मी उनके साथ रहते हैं और हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद (जहां वे पहुंचते हैं) वहां के सुरक्षाकर्मी साथ होते हैं। 

 
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