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Congress Mission 2024: कांग्रेस हर लोकसभा-विधानसभा क्षेत्र में तैनात करेगी स्थायी नेता, इनकी मदद से संगठनात्मक ढांचे को देगी मजबूती

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 18 May 2022 01:31 AM IST
सार

कांग्रेस पार्टी इन पूर्णकालिक पदाधिकारियों की मदद से संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देगी। राज्यों के प्रभारी महासचिवों और सचिवों के कामकाज की लगातार समीक्षा होगी। पूरे देश में संगठन के सभी खाली पद तीन से छह महीने में भरे जाएंगे।

कांग्रेस महासचिव अजय माकन।
कांग्रेस महासचिव अजय माकन। - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)
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विस्तार

कांग्रेस पूरे देश में हर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र की नब्ज टटोलने के लिए एक पूर्णकालिक नेता की स्थायी तैनाती करेगी। यह नेता संबंधित क्षेत्र के सामाजिक, भौगोलिक, राजनीतिक ताने-बाने के साथ धार्मिक, जातीय समीकरणों और स्थानीय मुद्दों की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को देगा। हालांकि इनकी टिकट तय करने में कोई भूमिका नहीं होगी। इन पदों पर करीब साढ़े छह हजार लोगों की तैनाती होगी।



पार्टी इन पूर्णकालिक पदाधिकारियों की मदद से संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देगी। राज्यों के प्रभारी महासचिवों और सचिवों के कामकाज की लगातार समीक्षा होगी। पूरे देश में संगठन के सभी खाली पद तीन से छह महीने में भरे जाएंगे। उदयपुर शिविर के फैसले जमीन पर उतारने के लिए महासचिवों और प्रभारियों की बैठकें शुरू हो गई हैं।


मंगलवार की बैठक के बाद महासचिव अजय माकन ने कहा, शिविर के छोटे से छोटे फैसले को भी लागू किया जाएगा। विचारधारा पर प्रतिबद्ध पार्टी के लिए राजनीतिक नफा-नुकसान कसौटी नहीं है। अमीर-गरीब खाई, धार्मिक भेदभाव से भारत टूटता है। इसीलिए ‘भारत जोड़ो’ नारे को अपनाया गया है। किसी भी पद पर अब पांच साल से ज्यादा कोई नहीं रह सकेगा। एआईसीसी का सेशन साल में एक बार जरूर होगा।

रिटायरमेंट उम्र पर नहीं हो सका फैसला
कांग्रेस ने संगठन के 50 फीसदी पद युवाओं को सौंपने का फैसला तो कर लिया, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के घर बैठने यानी रिटायरमेंट उम्र पर कोई फैसला नहीं ले सकी। 50 साल तक के लोगों को 50 फीसदी पद देने के बाद बुजुर्ग नेताओं की आयु सीमा तय हो जाती तो जल्द ही कई बड़े नेता नेपथ्य में चले जाते। अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी 76 तो राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 79 वर्ष के हैं। मधुसूदन मिस्त्री, गुलाम नबी आजाद, दिग्विजय सिंह, अंबिका सोनी, पी. चिदंबरम जैसे नेता सक्रिय राजनीति में हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कमलनाथ अब भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। हालांकि युवाओं की 50 फीसदी हिस्सेदारी केवल संगठन में है। यानी अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद को खतरा नहीं है।

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