कोरोना की दूसरी लहर में गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर 5.7 फीसदी दर्ज हुई

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 18 Jun 2021 06:44 PM IST

सार

  • आईसीएमआर ने गर्भवती महिलाओं के लिए रजिस्ट्री शुरू होने की घोषणा की
  • दूसरी लहर के दौरान गर्भवती महिलाओं में कोरोना की मृत्यु दर 5.7 फीसदी दर्ज की गई है जोकि पहली लहर के दौरान केवल 0.7 फीसदी थी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने करीब दोगुनी संख्या में गर्भवती महिलाओं को अपनी चपेट में लिया है। बुधवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने आधिकारिक रुप से गर्भवती महिलाओं के लिए रजिस्ट्री शुरू करने की घोषणा की है जिसके बारे में अमर उजाला ने 16 जून के अंक में सबसे पहले जानकारी दी है।
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आईसीएमआर के अनुसार एक अप्रैल 2020 से 31 जनवरी 2021 तक पहली और एक फरवरी से 14 मई 2021 तक दूसरी लहर के दौरान गर्भवती महिलाओं के संक्रमित होने का अध्ययन किया है। इसमें पता चला है कि पहली लहर के दौरान 1143 में से 162 (14.2 फीसदी) महिलाएं कोरोना संक्रमित हुई हैं। जबकि दूसरी लहर में 387 में से 111 कोरोना संक्रमित पाई गईं।


इतना ही नहीं अध्ययन में यह भी पता चला है कि दूसरी लहर के दौरान गर्भवती महिलाओं में कोरोना की मृत्यु दर 5.7 फीसदी दर्ज की गई है जोकि पहली लहर के दौरान केवल 0.7 फीसदी थी। चूंकि गर्भवती महिलाओं या फिर नवजात शिशुओं के संक्रमित होने को लेकर चिकित्सीय दस्तावेज काफी सीमित हैं। इसीलिए आईसीएमआर ने एक राष्ट्रीय स्तर पर रजिस्ट्री कार्यक्रम शुरू किया है। यहां देश भर के अस्पताल ऐसे मामलों की जानकारी देंगे जिनके आधार पर वैज्ञानिक आगे का अध्ययन पूरा कर सकेंगे।

आईसीएमआर ने बताया कि पहली लहर के दौरान 1,143 में आठ गर्भवती महिलाओं की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हुई थी, लेकिन दूसरी लहर में 387 में से 22 गर्भवती महिलाओं ने दम तोड़ा है। हालांकि जमीनी स्तर पर इससे भी अधिक गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की मौत होने की आशंका भी है जिसके बारे में जानकारी एकत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं में टीकाकरण को लेकर अभी तक अनुमति नहीं दी गई है लेकिन इस पर विचार चल रहा है।



दो फीसदी माताओं की संक्रमण से मौत
आईसीएमआर ने बताया कि अध्ययन के दौरान यह भी पता चला है कि जन्म देने के बाद दो फीसदी माताओं की मौत हो गई। पहली और दूसरी लहर के दौरान 1,530 में से 30 माताओं की संक्रमण के चलते मौत हुई है। इनमें 28 मौतें फेफड़ों में संक्रमण का स्तर बढ़ने और श्वसन तंत्र फेल होने की वजह से हुई हैं।

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