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कोरोना वैक्सीन: देश में एकल खुराक वाले टीके की जांच तकनीक पर काम शुरू

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 21 Jun 2021 09:53 AM IST

सार

  • वैज्ञानिकों ने जॉनसन एंड जॉनसन से मांगी मिश्रण की जानकारी।
  • भारत में बायोलॉजिकल ई कंपनी करेगी एकल खुराक का उत्पादन।
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Johnson and Johnson vaccine
Johnson and Johnson vaccine - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

देश में एकल खुराक वाली वैक्सीन को लेकर काम तेज से शुरु हो चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी मिली है कि इस वैक्सीन की जांच के लिए एक नई तकनीक की आवश्यकता है जिसे लेकर वैज्ञानिकों ने अपना काम शुरू कर दिया। 
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वैज्ञानिकों ने जॉनसन एंड जॉनसन से मांगी मिश्रण की जानकारी 
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसके लिए जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी यौगिक अभिकर्मक मांगे हैं। ताकि भारत में वैक्सीन का बैच आने के बाद सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की सत्यता का पता लगाया जा सके। भारत के औषधि महानियंत्रक कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत में एकल खुराक वैक्सीन का उत्पादन बायोलॉजिकल ई कंपनी के जरिए किया जा सकता है।


अगर कंपनी में समय पर मिश्रण सहित अन्य जरूरी मांगों को पूरा कर दिया तो संभावना है कि इस साल जॉनसन एंड जॉनसन का वैक्सीन मिल सके। दरअसल हिमाचल प्रदेश के कसौली में केंद्र सरकार की प्रयोगशाला है जिसे सीडीएल नाम से जानते हैं।

भारत में बायोलॉजिकल ई कंपनी करेगी एकल खुराक का उत्पादन
यहां वैक्सीन के बैच की जांच होने और अनुमति मिलने के बाद ही इसे अन्य हिस्सों में टीकाकरण के लिए भेजा जा सकता है। बीते दिनों बायोलॉजिकल की ई कंपनी का एक प्रतिनिधिमंडल वहां पहुंचा था और सीडीएल से उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी भी हासिल की थी।

फाइजर-मॉडर्ना पर फैसला अभी नहीं, जायडस का आवेदन जल्द 
अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर और मॉडर्ना की शर्तों पर अभी तक सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि एक राहत की खबर यह है कि जायडस कैडिला अगले एक सप्ताह में डीएनए आधारित वैक्सीन के लिए आवेदन कर सकती है। टीकाकरण से जुड़ी विशेषज्ञ समिति के एक वरिष्ठ सदस्य ने शनिवार को बताया कि जायडस कैडिला कंपनी ने परीक्षण के परिणामों की समीक्षा पूरी कर ली है।

कंपनी ने एक सप्ताह में आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मांगने के लिए आवेदन देने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि फाइजर और मॉडर्ना कंपनी चाहती है कि भारत में उनकी वैक्सीन आने से पहले सरकार कानूनी कागजात पर रजामंदी दे कि अगर किसी को किसी वैक्सीन से कोई दुष्प्रभाव होता है तो उसकी जिम्मेदारी कंपनियों की नहीं होगी। इस शर्त को तत्काल स्वीकार कर लेना संभव नहीं है।

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