Omicron: इम्यूनिटी को चकमा दे गया तो मचेगी तबाही, आईसीएमआर का मॉडल रोक सकता है तीसरी लहर

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 28 Nov 2021 03:38 PM IST

सार

कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वायरस के सामने आने के साथ शुरू हुईं नए संकट की चर्चाओं के बीच आईसीएमआर के मुख्य महामारी विज्ञानी डॉ. समीरन पांडा ने कहा है कि हर जगह लापरवाहियां बहुत दिख रहीं हैं। अलर्ट रहने का वक्त है वरना परिणाम गंभीर हो सकते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार

कोरोना वायरस के बदले हुए नए स्वरूप ओमिक्रॉन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि अपने देश में तीसरी लहर का यही सबसे बड़ा कारक वायरस वैरिएंट साबित हो सकता है। शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा इसे 'वायरस ऑफ कंसर्न' घोषित करने के बाद से दुनिया भर में अलर्ट जारी हो गए हैं। अपने देश के वैज्ञानिकों ने भी इस वायरस के म्यूटेशन और इम्यूनिटी को जांचने के लिए विकसित किए गए उस मॉडल को पूरे देश में लागू कर दिया है, जो किसी भी वायरस के बदले हुए स्वरूप से आने वाली तीसरी लहर को रोकेगा।
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आईसीएमआर के मुख्य महामारी विज्ञानी समीरन पांडा के अनुसार लोगों को बहुत सतर्क रहने की आवश्यकता है। हालांकि यह नया वायरस कितना खतरनाक है इसका अभी फिलहाल अंदाजा लगाया जा रहा है।


डॉ. समीरन पांडा कहते हैं कि यह वायरस अगर शरीर में बनी इम्यूनिटी को चकमा दे गया तो निश्चित तौर पर स्थितियां बिगड़ सकती हैं। हालांकि वह कहते हैं कि हमारे देश में फिलहाल अभी इस वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में यह कितना खतरनाक है और इम्यूनिटी को किस तरह नुकसान पहुंचाता है, इसका आंकलन करना मुश्किल है। डॉ. पांडा का कहना है कि जिस तरीके से अपने देश में इस वक्त लापरवाहियां दिख रही है वह अच्छी नहीं है। क्योंकि इस वायरस के अभी और म्यूटेंट सामने आएंगे। कौन सा स्वरूप कितना खतरनाक होगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। इसलिए बेहतर है कि लोग अभी अलर्ट रहें।

आईसीएमआर ने तैयार किया है क्रोमिक मॉडल

डॉ. पांडा के अनुसार आईसीएमआर ने वायरस के ऐसे ही बदले हुए स्वरूप और उसके प्रभाव को जांचने-परखने और रोकने के लिए एक क्रोमिक मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल में रांच फैक्टर हैं। इन पांचों फैक्टर का एनालिसिस करके अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाला वायरस कितना खतरनाक है। डॉ. पांडा के मुताबिक क्रोमिक मॉडल गणितीय गणना के आधार पर तैयार किया गया मॉडल है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट इम्यूनिटी की क्षमता का आकलन करना शामिल है। आईसीएमआर ने इस मॉडल के माध्यम से देश में कोरोना वायरस की गंभीरता का आकलन करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से निर्देशित किया है। 

वह कहते हैं इस वक्त देश में ज्यादातर राज्य इसी मॉडल के आधार पर कोरोना वायरस की गंभीरता का आकलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस वक्त जो वायरस पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना है वह भी इसी गणना के आधार पर आंका जाएगा। डॉक्टर पांडा का कहना है कि इस मॉडल के आधार पर तैयार की गई ऑब्जर्वेशन को बचाव के लिए तैयार की जाने वाली योजनाओं में तब्दील किया जाएगा तो निश्चित तौर पर वायरस के खतरनाक परिणामों से बचा जा सकेगा।

दूसरी खुराक लगावाएं और लापरवाही कतई न बरतें

हालांकि इन सबके बीच डॉ. पांडा ने देश में चल रहे टीकाकरण अभियान को और तेज करने के साथ-साथ लोगों को दूसरी खुराक लगवाने के लिए भी आगे आने के लिए कहा है। वह कहते हैं कि हमारे देश में अभी भी टीकाकरण की गति बहुत धीमी है। खासतौर से दूसरी खुराक के लिए लोगों में लापरवाही बढ़ रही है। उनका कहना है जो लोग तय समय पर दूसरी खुराक नहीं लगवा रहे हैं वह एक बड़े खतरे और बड़े संकट की ओर इशारा कर रहे हैं। लोगों ने कोरोना वायरस से बचने के अनुरूप किए जाने वाले व्यवहार में भी लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। वह कहते हैं कि न लोग मास्क लगा रहे हैं और न ही शारीरिक दूरी का पालन कर रहे हैं। 

समीरन पांडा कहते हैं कि ओमिक्रॉन वायरस को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर की टीम पूरी तरीके से अलर्ट है। वह कहते हैं अभी तक अपने देश में इसका कोई भी केस सामने नहीं आया है। लेकिन विदेश से आने वालों खासतौर से दक्षिण अफ्रीका और उस महाद्वीप से आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा जीनोम सीक्वेंसिंग का काम भी तेजी से चल रहा है। फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
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