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कोविड-19 : क्या चुपचाप बढ़ता रहा कोरोना और गफलत में रही सरकार, गांव-गांव में मिल रहे संक्रमित

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 17 Apr 2021 09:46 PM IST

सार

आखिर केंद्र सरकार या फिर राज्य सरकारें लॉकडाउन जैसा कदम क्यों नहीं उठा रही हैं। मैक्स, वैशाली के डॉ. अश्विन चौबे को भी दो दिन का कर्फ्यू भी नाइट कर्फ्यू की तरह साइकोलॉजिकल पिल्स ही नजर आ रहा है। डॉ. चौबे का कहना है कि सोमवार से फिर लोग सड़कों पर आएंगे और संक्रमण को रफ्तार मिल जाएगी।
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कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी।
कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

आज 11 राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बैठक की। सभी स्वास्थ्य मंत्रियों की अपनी पीड़ा है। शनिवार रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 की ताजा स्थिति, वैक्सीन आदि के मामले पर समीक्षा बैठक बुलाई। इस बीच सवाल उठ रहा है कि सप्ताहांत में दो दिन (शनिवार, रविवार) के कर्फ्यू से क्या फायदा होगा।
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आखिर केंद्र सरकार या फिर राज्य सरकारें लॉकडाउन जैसा कदम क्यों नहीं उठा रही हैं। मैक्स, वैशाली के डॉ. अश्विन चौबे को भी दो दिन का कर्फ्यू भी नाइट कर्फ्यू की तरह साइकोलॉजिकल पिल्स ही नजर आ रहा है। डॉ. चौबे का कहना है कि सोमवार से फिर लोग सड़कों पर आएंगे और संक्रमण को रफ्तार मिल जाएगी। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि संक्रमण की चेन तोड़ने में बड़ी सफलता मिल पाएगी।


सवाल यह है कि जब समय था तो सरकार क्या कर रही थी?
आईपी एक्सटेंशन स्थित सिल्वर लाइन हॉस्पिटल के एमडी डॉ. विनोद बिहारी पिछले 24 घंटे से ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए परेशान हैं। पिछले 36 साल से उन्हें ऑक्सीजन की सप्लाई देने वाले सदस्य ने फिलहाल हाथ खड़े कर रखे हैं। डॉ. विनोद का कहना है कि दिल्ली में न तो कोरोना के इलाज के लिए दवा मिल रही है, न ऑक्सीजन उपलब्ध है। जितना मरीज बेहाल है, उससे कम डॉक्टर या अस्पताल का प्रबंधक भी बेहाल नहीं है।

उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि जब अक्तूबर 2020 के बाद कोरोना के मामले कम होने शुरू हुए थे तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारें क्या कर रही थीं? रामलाल कुंदन लाल अस्पताल के एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि टीकाकरण की प्रक्रिया भी बहुत देर से शुरू हुई है। सूत्र का कहना है कि केंद्र सरकार के रणनीतिकारों ने भी मान लिया था कि कोरोना से भारत जंग जीत चुका है। अब इस दिशाहीन सोच का नतीजा सामने है।

वायरस जनित संक्रमण ऐसे कैसे समाप्त हो जाएगा?
रवि शर्मा आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। इसके साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। रवि शर्मा कहते हैं कि कोरोना वायरस जनित संक्रमण है। आखिर इतनी जल्दी समाप्त कैसे हो जाएगा? वह कहते हैं कि जिस तरह से केंद्र सरकार, कोविड टास्क फोर्स और राज्य सरकारों के रणनीतिकारों ने ढिलाई बरती है, उसे माफ नहीं किया जा सकता।

शर्मा का कहना है कि अप्रैल 2021 के पहले सप्ताह तक हम महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ने पर राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल खड़ा करके मजाक उड़ाने में व्यस्त थे। जबकि जनवरी में भारत में कोरोना के चार लाख से अधिक सक्रिय मामले आए थे।

फरवरी में यह संख्या तीन लाख के पार थी, लेकिन मार्च में 10 लाख को पार कर गई। हमने ध्यान नहीं दिया। अब स्थिति भयावह हो रही है तो हाथ-पांव फूल रहे हैं। रवि शर्मा के अनुसार हमारे रणनीतिकारों ने इसे गंभीरता से लिया ही नहीं। अब वह सारा दोष पब्लिक की लापरवाही पर मढ़ देना चाहते हैं।

क्या वैक्सीन प्रोग्राम के साथ भी मजाक हुआ?
देश के कोरोना टीकाकरण अभियान से जुड़े सूत्र की भी सुनिए। वह कहते हैं कि टीकाकरण अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर और रणनीतिकारों के स्तर पर बहुत हल्के में लिया गया। देश के टीकाकरण पर लगातार नजर बनाए रखने वाले लव सिन्हा भी इससे इत्तेफाक रखते हैं।

लव सिन्हा कहते हैं कि नवंबर महीने से ही देश में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) का कोविशील्ड टीका अभियान चल सकता था, लेकिन इसे दो ढाई महीने बाद शुरू कराया गया। वह बताते हैं कि कोविशील्ड वैक्सीन की एक्सपायरी साढ़े चार महीने के करीब की होती है।

कंपनी ने करोड़ों खुराक का उत्पादन कर लिया था, लेकिन केंद्र सरकार की हरी झंडी, मूल्य निर्धारण में लेट लतीफी तथा टीकाकरण कार्यक्रम पर मंडरा रहे असमंजस के बादल के कारण एसआईआई को टीका उत्पादन बंद करना पड़ा। लव सिन्हा तो टीकाकरण अभियान के शुरुआती तरीके पर भी सवाल उठाते हैं।

वह कहते हैं कि यह अभियान इतना ठंडा था कि लोग टीका लगवाने में रुचि ही नहीं ले रहे थे। अब जब संक्रमण बढ़ रहा है तो लोग तेजी से टीका लगवा रहे हैं। दूसरी तरफ वैक्सीन की उपलब्धता घट रही है। टीका निर्माता कंपनी कच्चेमाल की कमी और संसाधन की कमी से जूझ रही है। लव सिन्हा कहते हैं कि केंद्र सरकार ने अभी तक टीका उत्पादन में सकारात्मक सहयोग का कदम नहीं उठाया है।

मई से पहले नहीं आ सकते विदेशी टीके
टीका अभियान की नीति पर कोविड-19 टास्क फोर्स से जुड़े एक सदस्य का कहना है कि विदेशी टीका स्पुतनिक-वी मई 2021 से पहले उपलब्ध हो पाने की संभावना नहीं है। लव सिन्हा कहते हैं कि यह भी हमारे नीति निर्देशकों की कमजोरी है।

फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन समेत अन्य कंपनियों के टीके को केंद्र सरकार अब मंजूरी देने का कदम उठा रही है। लव कहते हैं कि जाहिर है, ये टीके भी जून-जुलाई के पहले देश में उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। तब तक तो कोरोना का संक्रमण देश में न जाने कितना बड़ा कहर बरपा चुका होगा।

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