कोविन-एप प्रमुख बोले : 'डिजिटल डिवाइड' की बात मंजूर, पर टीकाकरण से ग्रामीण वंचित, यह कहना गलत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 28 May 2021 09:16 PM IST

सार

कोरोना की दूसरी लहर ने इस बार गांवों में कहर ढाया है। ऐसे में टीकाकरण व इलाज आदि को लेकर गांवों व शहरों के बीच 'डिजिटल विभाजन' का मुद्दा गर्मा गया है। इसे लेकर सबके अपने-अपने तर्क हैं। 
 
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Cowin App Self Registration - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश के अधिकांश गांवों में बुनियादी ढांचे और इंटरनेट तकनीक की कमी है, स्मार्ट फोन के मामले में गांव के लोग शहरी लोगों की तुलना में कमजोर हैं। ऐसे में कोरोना टीकाकरण के लिए कोविन एप पर पंजीयन कराना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। इस मामले में सरकार व विपक्ष के अपने-अपने तर्क हैं। इस बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ और कोविन एप के प्रमुख आरएस शर्मा ने माना है कि देश में डिजिटल विभाजन है, लेकिन उनका कहना है कि यह कहना गलत है कि गांव टीकाकरण से वंचित हैं। 
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बकौल आरएस शर्मा सिर्फ शहरी अभिजात्य वर्ग को ही कोविड-19 वैक्सीन की 20 करोड़ से अधिक खुराक नहीं लगी हैं। उनका कहना है कि कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला कलेक्टरों और अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई है। ये अधिकारी कोविन-एप को लेकर ग्रामीण आबादी के बीच जागरूकता पैदा कर रहे हैं। ग्रामीणों को टीकाकरण में सहायता की जा रही है। 


जिलेवार आंकड़े देखें तो तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी
कोविन-एप के प्रमुख ने कहा कि आप भारत में ग्रामीण जिलों को हमारी कोविन वेबसाइट पर देख सकते हैं। प्रत्येक जिलेवार दिन-वार टीकाकरण के आंकडे देखें। यह कहना सही नहीं है कि  ग्रामीण लोगों को छोड़ दिया गया है। हमारे पास डेटा है, हमारे पोर्टल को देखें, टीकाकरण केंद्रों को देखें। हम आवासों के पता एकत्रित नहीं करते हैं, लेकिन स्पष्ट रूप से बहुत दूरदराज के इलाकों में हमने देखा है कि 2000 लोगों ने टीकाकरण कराया है, यह एक सबूत है।

शर्मा ने आगे कहा कि भारत में बड़ी संख्या में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन हैं। ग्रामीण भारत के टीकाकरण से वंचित रहने के आरोप को लेकर उन्होंने कहा कि आप जिस भारत की बात कर रहे हैं वह 10 साल पहले का है। आज का भारत नहीं है। 

120 करोड़ मोबाइल व 60 करोड़ स्मार्ट फोन
हमारे पास 120 करोड़ मोबाइल कनेक्शन, 60 करोड़ स्मार्ट फोन, 70 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन हैं। अधिकांश दूरसंचार प्रदाता फोर जी डेटा प्रदान कर रहे हैं। भारतीय मोबाइल पर वीडियो देखते हैं, यूपीआई पर लेनदेन होता है, भारत व्हाट्सएप और फेसबुक का सबसे बड़ा ग्राहक है। यह कहना अपमानजनक है कि प्रौद्योगिकी की कमी है। 45 वर्ष से अधिक आयु के 57 प्रतिशत टीकाकरण वाले लोगों ने टीकाकरण के लिए एप पर अपना पंजीकरण कराया। 

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