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पर्यावरण: देश में बढ़ते तापमान के कारण हर साल आ रहे हैं तूफान, आधा डिग्री बढ़ोतरी भी है खतरनाक

राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 11 Jun 2021 05:42 PM IST

सार

सीएसई की स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2021 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 से वर्ष 2020 तक का वक्त सबसे गर्म दशक रहा है। वर्ष 1901 से 1910 तक सालाना औसत तापमान 25.26 डिग्री सेल्सियस रहा...
चिलचिलाती गर्मी
चिलचिलाती गर्मी - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार

विश्व में बढ़ते तापमान का असर अब भारत के मौसम पर दिखाई देने लगा है। देश में एक सौ बीस वर्षों में औसत वार्षिक तापमान आधा डिग्री से ज्यादा बढ़ा है। इसी बढ़ते हुए तापमान असर है कि ताउते जैसे तूफान हर वर्ष तेजी से ताकतवर हो रहे है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा जारी स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2021 रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2010 से वर्ष 2020 तक का वक्त सबसे गर्म दशक रहा है। वर्ष 1901 से 1910 तक सालाना औसत तापमान 25.26 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि वर्ष 2011 से 2020 में यह 25.84 डिग्री हो गया। इसमें करीब 0.58 डिग्री की वृद्धि हुई है।
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भारत में सभी तरह के मौसम में तापमान पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ा हुआ नजर आ रहा है। सभी महीनों में पहले से ज्यादा गर्म हो रहे है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन दिनों बहुत तेजी से ग्लेशियर पिघल रहे है। वहीं बर्फ की परतें भी पहले की तुलना में मोटी नहीं जम रही हैं।


पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, आज तापमान में आधा डिग्री बढ़ोतरी भी बेहद ज्यादा है और जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। आज देश के विभिन्न हिस्सों में ये बढ़ोतरी अलग-अलग हो रही है। कुछ क्षेत्रों में तापमान डेढ़ डिग्री से ज्यादा है तो कहीं कम। जहां जहां तापमान में बढ़ोतरी  हुई है वहां असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। पहले सर्दियों का तापमान 20.37 होता था जो 20.95 डिग्री सेल्सियस हो गया हैं। मानसून के दौरान 0.49 और मानसून के बाद 0.67 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी  दर्ज हुई है।

मई 2021 में ज्यादा निकला बायोमेडिकल अपशिष्ट पदार्थ

वहीं, भारत में कोविड 19 के मरीजों का इलाज करने वाले अस्पतालों से पिछले माह हर दिन में दो लाख किलोग्राम से ज्यादा बायोमेडिकल कचरा बाहर निलका है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) द्वारा जारी स्टेट आफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2021 रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि मई 2021 में रोज दो लाख तीन हजार किलोग्राम कोविड-19 बायोमेडिकल अपशिष्ट उत्पन्न हुआ था और यह भारत के गैर-कोविड बायामेडिकल कचरे का लगभग 33 फीसद था।

मई में रोज उत्पन्न होने वाले कोविड 19 का बायोमेडिकल कचरा अप्रैल की तुलना में 46 फीसदी ज्यादा था। केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक ने मई में उत्पन्न कोविड-19 बायोमेडिकल कचरे का 50 फीसदी योगदान दिया। ये सभी राज्य विशेष रूप से कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से बुरी तरह प्रभावित हुए थे।

इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दूरदराज के गांवों और देहाती इलाकों में डॉक्टरों के अलावा चिकित्सक सुविधाओं की बेहद कमी है। 76 फीसदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की जरुरत है। इसके अलावा 56 फीसदी से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में रेडियोग्राफरों और 35 फीसदी से अधिक गांवों में लैब तकनीशियनों की आवश्यकता है।
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