महामारी: श्मशानों में बढ़ते प्रदूषण से चिंता, हाईकोर्ट ने कहा-अंत्येष्टि के आधुनिक तरीकों पर करें गौर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 13 May 2021 04:17 PM IST

सार

कोरोना महामारी के कारण श्मशानों में रात-दिन चिताएं जलाई जा रही हैं। इससे प्रदूषण बढ़ रहा है। इसे लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। 
 
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि कोविड-19 की मौजूदा स्थिति और मौतों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए निकाय प्राधिकारियों को प्रदूषण कम करने के लिए श्मशानों में अंत्येष्टि की आधुनिक तकनीकों की संभावना तलाशनी चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्त और न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ पुणे निवासी विक्रांत लाटकर की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इस याचिका में श्मशानों के पास के इलाकों में वायु प्रदूषण पर चिंता जताई गई थी।


लाटकर के अधिवक्ता असीम सरोदे ने बृहस्पतिवार को अदालत को बताया कि वर्तमान में पुणे में कुछ श्मशानों में प्रतिदिन 80 से अधिक शवों का दाह संस्कार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे आसपास के क्षेत्र में बहुत अधिक प्रदूषण होता है।

याचिका में कहा गया है कि कई श्मशानों की चिमनी का निर्माण मानक डिजाइन के अनुसार नहीं किया गया है, जिसके कारण निकलने वाला धुआं ऊपर की ओर नहीं जाता है। पीठ ने पुणे नगर निगम की ओर से पेश अधिवक्ता अभिजीत कुलकर्णी को याचिका के जवाब में एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, 'श्मशानों में नियुक्ति स्टॉफ को प्रभावी ढंग से काम करना चाहिए, विशेष तौर पर अभी। वास्तव में, सभी निकाय प्राधिकारियों को इसके लिए अब आधुनिक तकनीकों पर गौर करना चाहिए कि प्रदूषण को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।' अदालत ने मामले की अगले सप्ताह सुनवाई तय की है। 

बुधवार को 46 हजार नए केस मिले
बता दें, बुधवार को महाराष्ट्र ने कोविड-19 के 46,781 नए मामले सामने आए थे जिससे राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 52,26,710 हो गई, जबकि 816 और मरीजों की मौत होने से मृतक संख्या बढ़कर 78,007 हो गई।

मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट में कितनी प्राथमिकियां दर्ज हुईं?
हाईकोर्ट ने एक अन्य याचिका की सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह मरीजों के रिश्तेदारों द्वारा डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ की पिटाई के सिलसिले में अभी तक दर्ज की गई प्राथमिकियों की जानकारी उसे दे। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी की पीठ डॉक्टर राजीव जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा के मामलों में कमी लाने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया था। जनहित याचिका के अनुसार, महाराष्ट्र में ऐसी हिंसक घटनाओं की संख्या सबसे ज्यादा है।

डॉक्टर जोशी ने अपनी याचिका में दावा किया कि ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण के लिए महाराष्ट्र सरकार 2010 के अधिनियम सहित अन्य मौजूदा कानूनों/प्रावधानों को लागू करने में असफल रही है। पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि वर्तमान स्थिति में जबकि मेडिकल स्टाफ चौबीस घंटे काम कर रहा है, सरकार को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में वह दूसरी पीठ द्वारा पहले दिए गए आदेश का पालन करे।

गौरतलब है कि 2016 में बंबई उच्च न्यायालय की मौजूदा मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लुर ने इस मुद्दे पर निर्देश दिया था। अदालत ने 2016 के आदेश का हवाला देते हुए कहा, देखते हैं कि उन निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं। हमें बताएं कि राज्य में डॉक्टरों की पिटाई को लेकर राज्य में कितने मामले दर्ज किए गए हैं। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई अगले सप्ताह जारी रहेगी।

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