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मंत्रणा: ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आज, एस जयशंकर करेंगे अध्यक्षता

एजेंसी, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Jun 2021 04:16 AM IST

सार

ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की आज ऑनलाइन बैठक, विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे अध्यक्षता
 
विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो)
विदेश मंत्री एस जयशंकर (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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विस्तार

विकासशील देशों के सशक्त संगठन ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की मंगलवार को बैठक आयोजित होने जा रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। ऑनलाइन आयोजित होने वाली इस बैठक में सदस्य देश कोरोना महामारी और चुनौतीपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों, सतत विकास और आतंकवाद का मुकाबला करने पर चर्चा करेंगे।

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विदेश मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में ब्राजील के विदेश मंत्री कार्लोस अल्बर्टो फ्रेंको, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, चीनी विदेश मंत्री वांग यी और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री ग्रेस नलेदी मंडिसा पेंडोर के भाग लेने की उम्मीद है।


विदेश मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, कोरोना महामारी के मौजूदा दौर में विदेश मंत्री बहुपक्षीय प्रणाली को समयानुकूल बनाने और उसे सुदृढ़ करने पर विचार विमर्श करेंगे। साथ ही मौजूदा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने पर भी चर्चा होगी।

इस बैठक में सदस्य देशों के बीच सहयोग और खास तौर पर नागरिकों के बीच आपसी सहयोग और संपर्क बढ़ाने के तरीकों पर विचार किया जाएगा। ब्रिक्स सदस्य देशों की कुल जीडीपी 16.6 खरब अमेरिकी डॉलर है। ब्रिक्स में पांच बड़े विकासशील देश सदस्य हैं और यह दुनिया की कुल आबादी के 41 फीसदी (360 करोड़) हिस्सा का प्रतिनिधित्व करता है।

बता दें कि एस जयशंकर पिछले सप्ताह अपने अमेरिकी दौरे के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से शुक्रवार को मुलाकात की थी। इसके बाद जयशंकर ने कहा था कि भारत-अमेरिका के बीच टीकों की साझेदारी पर भी चर्चा की, जिसका मकसद टीकों की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। 

एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने इसका जिक्र नहीं किया कि क्या खासतौर से चीन पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि हमने पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर चर्चा की। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की गई। बता दें कि भारत, अमेरिका और दुनिया के कई अन्य देश चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी की पृष्ठभूमि में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त और स्वतंत्र बनाने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। चीन की सेना की नजर भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र पर है।

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