जम्मू-कश्मीर: दो बाहरी लोगों ने जमीन खरीदी तो नहीं बिगड़ी 'डेमोग्राफी', गुपकार का दुष्प्रचार फेल होने से खुश है भाजपा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 11 Aug 2021 04:13 PM IST

सार

सुरक्षा मामलों के जानकार कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) ने कहा, जब 'भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून' में संशोधन किया गया तो जम्मू कश्मीर के कई राजनीतिक दलों ने उसका विरोध किया था। इनमें कई राजनीतिक दल तो ऐसे थे, जो बाद में 'गुपकार' समझौते में शामिल हो गए...
पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन की बैठक में शामिल नेता
पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन की बैठक में शामिल नेता - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार

जम्मू-कश्मीर में 'अनुच्छेद 370' खत्म होने के बाद केंद्र सरकार ने वहां पर 'भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून' में बड़ा संशोधन किया था। उसके तहत, देश का कोई भी नागरिक अब जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है। उसे घर बनाने और कारोबार शुरू करने की इजाजत दे दी गई थी। तब विपक्ष और जम्मू-कश्मीर के कई राजनीतिक दलों (गुपकार समझौते में शामिल) ने केंद्र सरकार को यह कहकर घेरने का प्रयास किया था कि बाहर के लोगों को जम्मू-कश्मीर में बसाने की साजिश रची जा रही है। केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर की 'डेमोग्राफी' को बिगाड़ना चाहती है।
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मंगलवार को संसद में जब केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह खुलासा किया कि वहां पर तो केवल दो ही लोगों ने जम्मू में जमीन खरीदी है, भाजपा खुश हो गई। 'डेमोग्राफी' के साथ खिलवाड़, यह राजनीतिक दुष्प्रचार पूरी तरह फेल हो गया। हालांकि अब जम्मू-कश्मीर की नई औद्योगिक नीति पर काम शुरू हो गया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में प्रदेश के बाहर से भारी संख्या में निवेशक वहां पहुंचेंगे।


जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक एवं सुरक्षा मामलों के जानकार कैप्टन अनिल गौर (रिटायर्ड) ने कहा, जब 'भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून' में संशोधन किया गया तो जम्मू कश्मीर के कई राजनीतिक दलों ने उसका विरोध किया था। इनमें कई राजनीतिक दल तो ऐसे थे, जो बाद में 'गुपकार' समझौते में शामिल हो गए। इनके अलावा घाटी के अलगाववादी संगठनों ने भी केंद्र सरकार के इस बदलाव का पुरजोर विरोध किया था। इन संगठनों का आरोप था कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जानबूझकर कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव करना चाहती है। इसका जमकर दुष्प्रचार किया गया। ऐसा कहीं नहीं लिखा है जो जमीन खरीदेगा, उसे वहीं रहना पड़ेगा। किसी की मर्जी है, वह कहीं भी रहे। 'भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून' के जरिए अगर कोई यहां जमीन खरीदता है तो उसका मकसद 'कारोबार' ही रहेगा।
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