इनसाइड स्टोरी: सिद्धू को पंजाब की कमान देने पर कैसे राजी हो गए कैप्टन अमरिंदर, पीके के दखल के बाद निकला सुलह का फॉर्मूला

अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली, Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Wed, 21 Jul 2021 05:27 PM IST

सार

सोनिया गांधी से कैप्टन अमरिंदर सिंह की मुलाकात के बाद निकला था फॉर्मूला, नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब के लिए बेहद उपयोगी समझ रही है पार्टी।

कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू
कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच शुरू हुआ विवाद अब शांत होता नजर आ रहा है। एक बड़े बदलाव पर एकमत होते हुए पार्टी नेताओं ने पंजाब की कमान नवजोत सिंह सिद्धू को देने का फैसला कर लिया है। वहीं उनके नेतृत्व में एक अनुसूचित जाति और एक सवर्ण हिंदू को कार्यकारी अध्यक्ष का पद देकर अकाली दल और मायावती के गठजोड़ की हवा निकालने की तैयारी हो गई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सोनिया से मुलाकात के बाद इस फॉर्मूले को निकाला गया जिससे कैप्टन अमरिंदर सिंह भी सहमत बताए जाते हैं। वहीं, पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ को जल्दी ही केंद्रीय टीम में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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पीके ने दोनों धुरधंर नेताओं की जरूरत बताया था 
पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुलह का यह फॉर्मूला सोनिया गांधी की प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद लिया गया है। प्रशांत किशोर ने पंजाब की जमीनी स्थिति की जानकारी पार्टी आलाकमान को देते हुए बताया था कि विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए पार्टी को दोनों ही धुरंधर नेताओं की सख्त जरूरत है। इन दोनों के बीच सत्ता का संतुलन बनाकर दोनों नेताओं के अनुभव का लाभ पार्टी उठा सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब की कमान देने का फैसला किया गया।





कैप्टन तक यह संदेश लेकर गए किशोर
वहीं, प्रशांत किशोर के माध्यम से सोनिया गांधी के इस निर्णय की जानकारी कैप्टन अमरिंदर सिंह तक पहुंचा दी गई जो इसके पहले से ही कैप्टन के बेहद करीबी हैं और पंजाब को जीत दिलाने के लिए रणनीति बना रहे हैं। इस फैसले से कैप्टन अमरिंदर सिंह भी सहमत बताए जा रहे हैं। वैसे अब तक कैप्टन सिद्धू को पंजाब का अध्यक्ष बनाए जाने के खिलाफ चल रहे थे।

अकाली दल-बसपा के गठजोड़ की हवा निकालने की तैयारी
दरअसल, पंजाब में अनुसूचित जाति समुदाय की भागीदारी लगभग एक तिहाई है। अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठजोड़कर कांग्रेस के सामने एक नई चुनौती स्थिति खड़ी कर दी है। सत्ता विरोधी लहर के साथ अगर अकाली-बसपा समीकरण काम करता है तो इससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। लिहाजा बहुत सोच-समझकर इस रणनीति को ध्वस्त करने के लिए पार्टी में दो कार्यकारी अध्यक्ष  बनाने का फैसला कर लिया गया है। इस रणनीति के अंतर्गत नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी की कमान देने के साथ ही पार्टी में दो नए कार्यकारी अध्यक्ष  बनाए जा सकते हैं। इसमें एक अनुसूचित जाति  समुदाय से तो दूसरा गैर सिख समुदाय से हो सकता है।
 
सुनील जाखड़ को केंद्रीय टीम में लाने की तैयारी
पंजाब कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ को जल्दी ही केंद्रीय टीम में वापस लाया जा सकता है। उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी के मद्देनजर राहुल-प्रियंका टीम को मदद करने के लिए लगाए जाने की बात कही जा रही है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों की अच्छी समझ रखने वाले सुनील जाखड़ पार्टी को इन राज्यों में मजबूती दिलाने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि पार्टी उनके अनुभव का लाभ लेने के लिए उन्हें केंद्रीय टीम में लाने की तैयारी कर रही है।  

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