चिंताजनक: कोरोना ने तीन लाख से ज्यादा की ली जान, नए मरीज कम, मगर नहीं घटी मृत्युदर

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 24 May 2021 12:40 AM IST

सार

  • कोविड वॉर रूम में तैयार रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई,  मई में ही अब तक 85 हजार से ज्यादा लोगों ने तोड़ा दम
  • 10 मार्च 2020 को कर्नाटक के कलबुर्गी में हुई थी कोरोना से पहली मौत
कोरोना से मौतें (फाइल फोटो)
कोरोना से मौतें (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 देश में कोरोना वायरस ने अब तक तीन लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। राज्यों से मिली जानकारी के बाद केंद्र के कोविड वॉर रूम में यह रिपोर्ट तैयार की गई। देश में संक्रमण से पहली मौत 10 मार्च, 2020 को कर्नाटक के कलबुर्गी में हुई थी। उस दौरान 76 वर्षीय बुजुर्ग ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
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इसके बाद हर दिन मौत के मामले बढ़ते गए, लेकिन पहली लहर से ज्यादा जानलेवा असर इसी साल फरवरी के बाद दिखाई दिया है। तब से अब तक सवा लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इसी महीने के 22 दिन में 85 हजार से ज्यादा लोगों ने संक्रमण के चलते दम तोड़ दिया।




केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बीते एक दिन में 3,741 मरीजों की मौत हुई है, जिसके बाद संक्रमण से जान गंवानों वालों की संख्या 2,99,266 तक पहुंच गई थी। हालांकि, रविवार दोपहर तक दिल्ली सहित कई और राज्यों से जानकारी मिलने के बाद यह आंकड़ा तीन लाख पार कर चुका है।

मंत्रालय के मुताबिक, बीते एक दिन में संक्रमण के 2,40,842 नए मामले मिले हैं, जबकि 3,55,102 मरीजों को स्वस्थ घोषित किया गया। इसके चलते 1,18,001 सक्रिय मरीज कम हुए हैं। इसी के साथ कुल सक्रिय मरीजों की संख्या 28,05,399 पर आ गई है। देश में अभी कोरोना से ठीक होने वालों की दर 88.30 और सक्रिय दर 10.57 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ प्रो. रिजो एम जॉन का कहना है कि दूसरी लहर में मौतें कभी कम नहीं हुई है। पिछले तीन सप्ताह की औसतन स्थिति देखें तो हर दिन 3700 से ज्यादा मरीजों की मौत हुई है जो दुनिया के बाकी देशों की तुलना में भी सबसे अधिक है।

पहली बार 21 लाख से ज्यादा जांच
देश में पहली बार एक दिन में 21 लाख से भी ज्यादा सैंपल की जांच की गई है, जिसका असर यह रहा कि 10 मार्च के बाद संक्रमण दर अब 11.34 फीसदी दर्ज की गई। बीते एक दिन में देश में 21,23,782 सैंपल की जांच की गई थी। इसी के साथ ही पिछले पांच दिन में ही एक करोड़ से अधिक सैंपल की जांच हो चुकी है।

13 दिन में ही आधी हुई संक्रमण दर
आंकड़ों के अनुसार 10 मई को देश में 22.61 फीसदी सैंपल कोरोना संक्रमित मिले थे। हालांकि, इसके बाद हर दिन संक्रमित मिलने वाले सैंपल की दर में कमी आती चली गई और 13 दिन बाद यह आंकड़ा करीब आधे यानी 11.34 फीसदी तक पहुंच गया है।

जून तक राज्यों को 10 करोड़ खुराक से ही चलाना होगा काम
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि राज्यों के पास अब भी 1.90 करोड़ खुराक उपलब्ध हैं। इसके अलावा 40,650 खुराक सोमवार तक पहुंच जाएंगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वैक्सीन उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का लगातार काम किया जा रहा है लेकिन यह एक या दो दिन में पूरा नहीं किया जा सकता। अभी जून तक के लिए राज्यों को करीब 10 करोड़ खुराक उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई है। इनमें से पांच करोड़ खुराक केंद्र सरकार मुफ्त मुहैया कराएगी। 

दिल्ली में 31 तक, राजस्थान में आठ जून तक बढ़ा लॉकडाउन
दिल्ली में 31 मई की सुबह पांच बजे तक, जबकि राजस्थान में आठ जून तक लॉकडाउन जैसी पाबंदियां बढ़ा दी गई हैं। दोनों राज्यों में ये पाबंदियां 24 जून को खत्म हो रही थीं। इस बार भी दिल्ली में मेट्रो नहीं चलेगी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अगर मामलों के घटने का सिलसिला अगले एक हफ्ते इसी तरह जारी रहा तो 31 मई से हम अनलॉक की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

वहीं, राजस्थान में 8 जून  सुबह पांच बजे तक लॉकडाउन रहेगा। विवाह समारोहों पर 30 जून तक पाबंदी लगा दी गई है। सार्वजनिक स्थानों पर फेस मास्क नहीं लगाने की जुर्माना राशि 500 से बढ़ाकर 1,000 रुपये कर दी गई है।

गंगा में शव बहाने के लिए राहुल ने फिर साधा केंद्र पर निशाना
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को एक बार फिर गंगा नदी में बहाए जा रहे शवों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने कहा, गंगा में शवों को बहाना किसी की सामूहिक जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसके लिए अकेली केंद्र सरकार जिम्मेदार है।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने हिंदी भाषा में लिखे ट्वीट में कहा, मैं शवों के फोटो साझा करना पसंद नहीं करता। देश-दुनिया ऐसे फोटो देखकर दुखी है। लेकिन जिन्होंने मजबूरी में मृत प्रियजनों को गंगा किनारे छोड़ दिया, उनका दर्द भी समझना होगा। गलती उनकी नहीं है। इसकी जिम्मेदारी सामूहिक नहीं, सिर्फ केंद्र सरकार की है।

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