तालिबान का खतरा: कंधार में भारतीय दूतावास की आपातकालीन सेवाएं रहेंगी चालू, स्टाफ को बुलाया वापस

एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 11 Jul 2021 12:13 PM IST

सार

राजनयिक सूत्रों ने कहा कि भारत सरकार ने कंधार में अपना दूतावास बंद नहीं किया है। सुरक्षा कारणों से स्टाफ कम कर दिया है। दूतावास में आपातकालीन सेवाएं खुली रहेंगी। दूतावास को बंद करने की खबरें गलत हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी और तालिबान के बढ़ते कब्जे को देखते हुए हिंसा की आशंका के चलते कंधार में भारतीय दूतावास बंद करने की खबरें आईं थीं, जिन्हें विदेश मंत्रालय ने खारिज कर दिया है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत सरकार ने कंधार में अपना दूतावास बंद नहीं किया है। सुरक्षा कारणों से भारतीय स्टाफ को वापस बुला लिया है। स्थानीय कर्मचारियों के माध्यम से दूतावास में आपातकालीन सेवाएं खुली रहेंगी। दूतावास को बंद करने की खबरें गलत हैं। 




विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, 'कंधार स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास को बंद नहीं किया गया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से भारतीय कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वापस बुला लिया गया है। दूतावास का कामकाज स्थानीय कर्मचारियों की मदद से जारी है।' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि स्थिति स्थिर होने तक यह पूरी तरह से अस्थायी उपाय है।'

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत ने कंधार में अपना दूतावास बंद कर दिया है।भारतीय वायुसेना की विशेष उड़ान से मिशन में तैनात कम से कम 50 राजनयिकों व आईटीबीपी के जवानों को दिल्ली लाया गया है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है। आशंका है कि तालिबान कंधार को भी निशाने पर ले सकता है। यह शहर पहले आतंकी संगठन का मुख्यालय हुआ करता था। फिलहाल, काबुल में भारतीय दूतावास और बाल्ख प्रांत में मजार-ए-शरीफ पर दूतावास खुले हुए हैं। 

तालिबान की धमकी- अफगानिस्तान पर नियंत्रण के लिए दो सप्ताह काफी
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा अफगान सुरक्षा बलों पर भरोसा जताने के ठीक बाद तालिबान ने धमकी दी है कि यदि हम चाहें तो मात्र दो सप्ताह में अफगानिस्तान को अपने नियंत्रण में ले सकते हैं।

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान के 85 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण के दावे के तुरंत बाद मॉस्को पहुंचे तालिबानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख शहाबुद्दीन दिलावर ने पत्रकारों से कहा कि हमारे पास करीब 75 हजार लड़ाके हैं, जिनका मुकाबला करना अफगानिस्तान के तीन लाख जवानों के वश में नहीं है। बाइडन ने अफगानिस्तान में तालिबान के प्रभाव को नकारते हुए कहा था कि उन्हें अफगान सुरक्षा बलों पर भरोसा है।




इस पर दिलावर ने कहा, 'हम दो हफ्ते में देश पर नियंत्रण बना सकते हैं, बेहतर है कि विदेशी सेना शांति से अफगानिस्तान छोड़ने के मौके का फायदा उठाए। इस बीच, तालिबान ने पश्चिम अफगानिस्तान में ईरान और चीन से लगे सीमा क्षेत्र में भी कब्जा कर लिया है। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने बताया कि हमने ईरानी सीमा पर इस्लाम कला के सीमावर्ती शहर और तुर्कमेनिस्तान के तोरघुंडी क्रॉसिंग पर कब्जा कर लिया है।'

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