खुफिया रिपोर्ट में खुलासा: नक्सल कैडर ने दी खर्च कम करने की हिदायत, हो गई है पैसे की किल्लत

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 31 Oct 2020 06:10 PM IST

सार

रिपोर्ट के मुताबिक, नक्सल कैडर का साफ कहना है कि हमारे सामने वित्तीय समस्या आ गई है। खर्च पर कंट्रोल करो। पार्टी का आंदोलन बहुत घाटे में है। कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है...
नक्सली
नक्सली - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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देश में नक्सल प्रभावित जिलों का दायरा अब सिमटता जा रहा है। सीआरपीएफ एवं राज्यों की स्पेशल टॉस्क फोर्स के बलबूते काफी हद तक नक्सली वारदातों पर अंकुश लग रहा है। गत वर्ष जहां 90 जिलों में नक्सली वारदात हुई थी, वहीं इस साल 46 जिलों में सिमट गई हैं। नक्सल कैडर परेशान हो गया है। अपनी विभिन्न यूनिटों को भेजे संदेश में नक्सल के टॉप कैडर ने स्वीकार किया है कि हम मुश्किल में आ रहे हैं।

एक खुफिया रिपोर्ट, जो कि नक्सलियों के उस लैटर के बाद तैयार की गई है, जिसे निचली इकाइयों को भेजा गया था। वह लैटर खुफिया ईकाई की एक यूनिट के हाथ लगा है। इसमें कई भेद खुल गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नक्सल कैडर का साफ कहना है कि हमारे सामने वित्तीय समस्या आ गई है। खर्च पर कंट्रोल करो। पार्टी का आंदोलन बहुत घाटे में है। कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। पत्र के अंत में लिखा, मार्क्सवादी सिद्धांत सीख देता है, कोई भी स्थिति स्थाई नहीं रहती। इसे लेकर सुरक्षा बलों को सचेत किया गया है कि वे अपनी ऑपरेशनल रणनीति को उक्त बातों के हिसाब से परिवर्तित करें।


सूत्रों के मुताबिक, इस रिपोर्ट में कई तरह के खुलासे हुए हैं। राजनंदगांव की मुठभेड़ के बाद बरामद हुए नक्सलियों के कागजात भी कई बातों की तरफ इशारा कर रहे हैं। इनमें लिखा है कि मेडिकल उपकरण, समाचार पत्र, स्टेशनरी, इंटरनेट वाले फोन, अनाज, सैन्य सामान और गोला बारूद आदि एकत्रित करने के लिए दुकानदारों, साहुकारों, सोसायटी, ग्रामीण, निम्न मध्यम वर्ग, गुरुजी, नौकरी पेशे वाले और कालेज के स्टूडेंट से संपर्क करो।

वहीं बड़ी डील के लिए टॉप कैडर, माइनिंग और दूसरे क्षेत्रों के उद्योग मालिकों से पहले की भांति बातचीत जारी रखेगा। शहरी क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा संपर्क बढ़ाया जाए। सुरक्षा बलों की हर पल की जानकारी एकत्रित की जाए। मजदूरों, वकीलों और डॉक्टरों की एसोसिएशन से बात करें। पुलिस कैंप की खबर देने के लिए नए लोगों की भर्ती की जाए। ऐसे लोगों को तैयार करें, जो अपने इलाके में नए मुखबिर बना सकें। गांव में जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करें।

साथ ही, जो भी नया सदस्य अपने साथ जोड़ें, उसे कम से कम छह माह तक परखें। ध्यान रहे कि कुछ ही लोगों को पीएलजीए में लाना है। बाकी लोगों से खबरें और संसाधन जुटाने हैं। ग्राउंड लेवल पर अच्छा काम करने वालों को ही पार्टी की सदस्यता दी जाएगी। रूट सर्वे और गोला बारूद जुटाने पर विशेष ध्यान देना होगा। फोर्स की ताकत का अंदाजा लगाने वाले लोग अपने साथ जोड़ें।

रिपोर्ट में यह जिक्र भी है कि पिछले साल दंतेवाड़ा के आसपास 80 से ज्यादा बड़े नक्सली मारे गए हैं। इनमें सुकमा में 17, बीजीपुर में 15, दंतेवाड़ा में 17, कांकेर दो और धमतरी आदि में भी नक्सलियों को जान-माल का नुकसान पहुंचा है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में नए रूट तलाशे जाएं। हालांकि यह काम संयुक्त मोर्चा और एरिया कमेटी को सौंपा गया है। समन्वय ढांचा निर्माण प्रस्ताव की जिम्मेदारी अलग कैडर को दी गई है।

एक अधिकारी के मुताबिक, नक्सली तेंदूपत्ता को लेकर नई रणनीति बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने गत वर्ष तेंदूपत्ता का दाम 250 रुपये से 400 रुपये कर दिया था। मध्यप्रदेश में इसका दाम 150 रुपये से 200 रुपये हो गया। इससे नक्सलियों को लगा कि सरकार उनके और जनता के बीच के संबंध को खत्म करना चाहती है। इससे पहले तेंदूपत्ता का दाम बढ़वाने के लिए नक्सली अपने तरीके से किसानों को बहकाते थे।

सरकार द्वारा दाम बढ़ाने के बाद उन्हें लगा कि अब लोग उनके बहकावे में नहीं आएंगे। इसके लिए हर यूनिट में संघर्ष समिति गठित करने के लिए कहा गया है। ठेकेदारों से संपर्क बढ़ाना होगा। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश जोन में हथियारों की कमी हो गई है। मैन पावर भी नहीं बची है। विशेष बुलेटिन अब छह माह में निकाला जाएगा। तेंदूपत्ता के ठेकेदारों और मुंशी का काम करने वालों पर शिकंजा कसना होगा। छत्तीसगढ़ पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि अब धीरे धीरे नक्सल कैडर को खत्म किया जा रहा है। इनकी नई भर्ती पर भी रोक लग रही है। इनकी परेशानी की सबसे बड़ी वजह यही है कि इन्हें नए साथी नहीं मिल रहे हैं।

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