जम्मू-कश्मीर: आतंकवाद को लेकर मिल रहे इनपुट बढ़ा रहे हैं सरकार की चिंता, हक्कानी नेटवर्क बन रहा परेशानी का सबब

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Oct 2021 02:41 PM IST

सार

अभी तक आतंकवादियों के रूप में अफगान के शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिल पाया है। सैन्य अधिकारी के अनुसार जिन आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई है, उससे पता चल रहा है कि पहले की तुलना में अधिक प्रशिक्षित आतंकी आ रहे हैं। इनके पास इलेक्ट्रानिक उपकरण, इम्प्रूव्ड डिवाइस अन्य साजो-सामान मिल रहे हैं...
आतंकी हमले के बाद तलाशी अभियान चलाते जवान
आतंकी हमले के बाद तलाशी अभियान चलाते जवान - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार

जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर नेपाल से लगती हुई सीमा पर भी सीमा सुरक्षा बल काफी चौकसी बरत रहा है। यही स्थिति सेना मुख्यालय की भी है। सेना मुख्यालय ने नियंत्रण रेखा के उस पार से होने वाली घुसपैठ को लेकर खास सतर्कता बरते जाने के निर्देश दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि सीमापार से आतंकवादी घुसपैठ बढ़ने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए पूरी कृष्णा घाटी पर सक्रियता बढ़ा दी गई है।
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रिपोर्ट्स हैं कि आतंकी उरी से लेकर मेंढर, रामपुर, गुरेज, डोडा, राजौरी, पुंछ समेत सभी रास्तों का विभिन्न तरीके से इस्तेमाल करके घुसपैठ कर सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक सीमा के उस पार निक्किआल, कोटली समेत तमाम आतंकवादी ठिकानों में 250-300 आतंकी घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। मेजर जनरल स्तर के अधिकारी का कहना है कि हर साल घुसपैठिए अपने तौर तरीकों में बदलाव करते हैं। उनका एक मात्र मकसद सुरक्षा बलों की आंख में धूल झोंककर घुसपैठ में कामयाब होना और दहशत गर्दी मचाना है। सबकुछ सीमापार बैठे उने आका के निर्देश पर होता है। हमारा काम उनकी घुसपैठ को रोकना है और हम उन्हें कामयाब नहीं होने देंगे। बताते हैं सीमावर्ती क्षेत्र में सेना ने तलाशी अभियान चला रखा है।

क्या है अंदेशा

वायुसेना से अवकाश प्राप्त वाइस मार्शल एनबी सिंह कहते हैं कि अफगानिस्तान में अमेरिका की फौज के वापस जाने के बाद तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि उनमें भी सत्ता को लेकर बड़ा मतभेद सामने आया है, लेकिन इससे पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठनों को नई ऊर्जा मिल गई है। लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) बलबीर सिंह संधू का भी कहना है कि पाकिस्तान पर अमेरिका का दबाव कम हुआ है। चीन के साथ उसके संबंध ठीक चल रहे हैं। अफगानिस्तान में भी पाकिस्तान को कुछ करने का मौका मिल रहा है। इसके अलावा अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क को भी बड़ी सफलता मिली है। भारत में आतंकवाद फैलाने वाले और पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठन इससे उत्साहित होकर नापाक हरकते करने की फिराक में हैं। इसके कारण इस ठंड के महीने में घुसपैठ बढ़ने की आशंका ज्यादा है। हालांकि इसमें उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिलने वाली है।

क्या अफगानी आतंकियों के घुसपैठ की भी आशंका है?

सीमापार से घुसपैठ का दबाव है। पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी इसके लिए घात लगाए बैठे हैं, लेकिन अभी तक आतंकवादियों के रूप में अफगान के शामिल होने का कोई ठोस सबूत नहीं मिल पाया है। हालांकि सेना मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि इस तरह की किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सैन्य अधिकारी के अनुसार जिन आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई है, उससे पता चल रहा है कि पहले की तुलना में अधिक प्रशिक्षित आतंकी आ रहे हैं। इनके पास इलेक्ट्रानिक उपकरण, इम्प्रूव्ड डिवाइस अन्य साजो-सामान मिल रहे हैं। यह सब पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आदि के सहयोग के बिना संभव नहीं है।
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